भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बैठक

India-Australia

21 नवंबर, 2025 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की मुलाकात हुई। यह मीटिंग साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हो रही G20 लीडर्स समिट के दौरान हुई है।
मुख्य बिन्दु
दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग के गहरे होने और अलग-अलग तरह के होने पर खुशी जताई।
दोनों देशों ने पांच साल पहले 2020 में अपने रिश्ते को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया था।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद पर भारत के साथ अपनी एकजुटता दिखाई और आतंकवाद के खिलाफ ग्लोबल लड़ाई को मजबूत करने की अपील की।
इस मीटिंग में दोनों नेताओं ने राजनीतिक, डिफेंस और सिक्योरिटी, एनर्जी, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट, ज़रूरी मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी, एजुकेशन और लोगों के बीच जुड़ाव जैसे द्विपक्षीय सहयोग के सेक्टर्स पर चर्चा की।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने आपसी फायदे के रीजनल और ग्लोबल मुद्दों पर भी अपने विचार शेयर किए।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध : ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

19वीं शताब्दी और औपनिवेशिक काल

  • प्रारंभिक संपर्क: 19वीं शताब्दी में जब दोनों देश ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन थे, तभी से व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क शुरू हो गए थे।
  • गिरमिटिया मजदूर: कुछ भारतीय श्रमिक और व्यापारी (विशेष रूप से पंजाब और गुजरात से) ऑस्ट्रेलिया गए, हालांकि यह आवाजाही चीन के गिरमिटिया मजदूरों जितनी व्यापक नहीं थी।
  • व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी”: 1901 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा अपनाई गई इस नीति ने गैर-यूरोपीय आप्रवासन को प्रतिबंधित कर दिया, जिससे भारत से लोगों के आने पर रोक लग गई और दोनों देशों के लोगों के बीच सीधा संपर्क सीमित हो गया।

विश्व युद्ध और स्वतंत्रता

  • प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध: भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना ने दोनों विश्व युद्धों में ब्रिटिश साम्राज्य के हिस्से के रूप में एक साथ लड़ाई लड़ी।
  • स्वतंत्रता के बाद (1947): भारत की स्वतंत्रता के बाद, दोनों देश राष्ट्रमंडल के सदस्य बने रहे, जिससे संस्थागत संबंध बने रहे। हालांकि, इस दौरान संबंध मुख्य रूप से ब्रिटेन पर केंद्रित थे और एशिया में भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के कारण बहुत घनिष्ठ नहीं थे।

शीत युद्ध (1947 – 1991)

  • रणनीतिक भिन्नता: इस काल में दोनों के रणनीतिक हित अलग-अलग थे।
    • ऑस्ट्रेलिया: सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ANZUS (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका) संधि पर निर्भर था।
    • भारत: गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का हिस्सा था और सोवियत संघ के साथ करीबी संबंध बनाए हुए था।
  • संबंधों में ठहराव: राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों के कारण द्विपक्षीय संबंध इस अवधि के दौरान शांत और सीमित रहे।

1990 के दशक: आर्थिक और परमाणु मोड़

  • भारत का आर्थिक उदारीकरण (1991): भारत की अर्थव्यवस्था खुलने के बाद व्यापार और निवेश के अवसर बढ़े, जिससे आर्थिक संबंध मजबूत होने लगे।
  • परमाणु परीक्षण: 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद, ऑस्ट्रेलिया ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई। यह संबंधों में एक महत्वपूर्ण तनाव बिंदु था।
  • क्रिकेट कूटनीति: राजनीतिक तनाव के बावजूद, क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाला एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु बना रहा।

21वीं शताब्दी: रणनीतिक साझेदारी का उदय

  • आप्रवासन में वृद्धि: “व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी” को खत्म करने और शिक्षा व रोजगार के अवसरों के कारण, 2000 के दशक में भारतीय प्रवासियों और छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई, जिसने जन-संबंधों को अभूतपूर्व मजबूती दी।
  • चीन का उदय: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता ने दोनों देशों के रणनीतिक हितों को एक साथ ला दिया।
    • 2007 में क्वाड (QUAD) के गठन की पहली कोशिश हुई, लेकिन बाद में यह निष्क्रिय हो गया।
  • 2009-2010 का तनाव: भारतीय छात्रों पर कुछ हमलों की घटनाओं से संबंधों में अस्थायी तनाव आया, लेकिन दोनों सरकारों ने इसे दूर करने के लिए कदम उठाए।
  • यूरेनियम आपूर्ति: 2014 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो भारत को यूरेनियम बेचने की अनुमति देता है। यह परमाणु परीक्षणों के बाद संबंधों की बहाली में एक बड़ा कदम था।
  • संबंधों का शिखर:
    • 2017: क्वाड को पुनर्जीवित किया गया।
    • 2020: संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) के स्तर तक बढ़ाया गया।
    • 2022: आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA) पर हस्ताक्षर किए गए।

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