भारत कीआतंकवाद-विरोधी नीति: ‘प्रहार’

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भारत की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति—प्रहार'(PRAHAAR)  जारी की गई है। यह नीति भारत की आंतरिक सुरक्षा के ढांचे में एक युगांतकारी परिवर्तन को दर्शाती है, जो केवल प्रतिक्रियात्मक न होकर ‘प्रो-एक्टिव’ (Pro-active) दृष्टिकोण पर आधारित है।

1. नीति का मूल दर्शन एवं उद्देश्य

‘प्रहार’ नीति का मुख्य आधार आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की अवधारणा है। इस नीति के कुछ प्रमुख वैचारिक पक्ष निम्नलिखित हैं:

  • परिभाषा का विस्तार: भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता।
  • त्रि-आयामी सुरक्षा: यह स्वीकार करता है कि भारत को जल, थल और नभ—तीनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • आर्थिक सुरक्षा: इसका मुख्य लक्ष्य बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे ‘महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों’ (Critical Infrastructure) को सरकारी और गैर-सरकारी तत्वों (State and Non-state actors) से सुरक्षित रखना है।

2. नीति के मुख्य स्तंभ (Key Pillars)

आतंकवाद के समूचे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को ध्वस्त करने के लिए नीति ने चार मुख्य रणनीतियां अपनाई हैं:

  1. अपराधीकरण: प्रत्येक आतंकवादी कृत्य के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना।
  2. वित्तीय प्रहार: आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थकों की फंडिंग के स्रोतों (जैसे क्रिप्टो वॉलेट, हवाला आदि) को पूरी तरह बंद करना।
  3. लॉजिस्टिक्स पर रोक: हथियारों, गोला-बारूद और सुरक्षित पनाहगाहों तक उनकी पहुंच को शून्य करना।
  4. वैश्विक सहयोग: अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से ‘सीमा पार आतंकवाद’ की चुनौतियों का समाधान करना।

3. उभरती हुई चुनौतियां और तकनीकी खतरे

नीति ‘हाइब्रिड वारफेयर’ और तकनीक के दुरुपयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है:

क. साइबर और डिजिटल खतरा

  • राष्ट्र-राज्य अभिनेता (Nation-state actors): अन्य देशों द्वारा प्रायोजित साइबर हमले भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहे हैं।
  • डार्क वेब और एन्क्रिप्शन: आतंकी संगठन सोशल मीडिया, डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स का उपयोग संचार, प्रोपेगेंडा और सुरक्षित धन हस्तांतरण के लिए कर रहे हैं।

ख. नई तकनीक का घातक उपयोग

  • ड्रोन और रोबोटिक्स: पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
  • CBRNED खतरा: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल (CBRNED) सामग्रियों तक आतंकियों की पहुंच को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता है।

ग. आतंकी-अपराध सांठगांठ (Terror-Crime Nexus)

  • आतंकवादी समूह अब रसद (Logistics), भर्ती और स्थानीय जानकारी के लिए संगठित आपराधिक नेटवर्कों का सहारा ले रहे हैं।

4. संस्थागत और संरचनात्मक सुधार

सुरक्षा तंत्र को अधिक धारदार बनाने के लिए ‘प्रहार’ कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव देती है:

  • एकीकृत ढांचा: पूरे देश में एक समान आतंकवाद-विरोधी संरचना (Uniform Anti-terror Structure) स्थापित करना, ताकि केंद्र और राज्यों की प्रतिक्रिया में सामंजस्य बना रहे।
  • कानूनी विशेषज्ञता: जांच के प्रत्येक चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करना, ताकि अदालतों में केस मजबूत रहें और दोषियों को सजा मिलने की दर (Conviction Rate) बढ़ सके।
  • खुफिया तालमेल: NIA और राज्य आतंकवाद-विरोधी दस्तों (ATS) के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए मानक प्रक्रियाओं (SOPs) का विकास।

5. सामाजिक आयाम: कट्टरपंथ का प्रतिकार

केवल बल प्रयोग से आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता, इसलिए नीति में ‘सॉफ्ट पावर’ पर भी बल दिया गया है:

  • सामुदायिक जुड़ाव: कट्टरपंथ और उग्रवादी हिंसा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उदारवादी धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज (NGOs) की सहायता लेना।
  • युवा सुरक्षा: भारतीय युवाओं को अल-कायदा और ISIS जैसे वैश्विक आतंकी समूहों के प्रभाव में आने से बचाने के लिए निरंतर निगरानी और परामर्श कार्यक्रम चलाना।

6. निष्कर्ष और भविष्य की राह

‘प्रहार’ नीति भारत के सुरक्षा दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल वर्तमान खतरों को पहचानती है, बल्कि भविष्य की ‘टेक्नोलॉजी-आधारित’ लड़ाई के लिए भी तैयार है।

UPSC के लिए विश्लेषण बिंदु:

  • संघीय चुनौती: चूंकि ‘पुलिस’ राज्य का विषय है, इसलिए “समान आतंकवाद-विरोधी संरचना” लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता होगी।
  • क्षमता निर्माण: सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक साइबर और ड्रोन-विरोधी तकनीक से लैस करना इस नीति की सफलता की अनिवार्य शर्त होगी।

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