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हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के मध्य फ्रांस के शहर नीस में भारत-फ्रांस संबंध को नई दिशा देने के लिए द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसके दौरान ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ को अपनाया और एक ‘आर्थिक सुरक्षा पर संवाद’ (Dialogue on Economic Security) की स्थापना की। इससे पहले 2026 में, द्विपक्षीय संबंधों को आधिकारिक तौर पर ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर उन्नत किया गया था।
द्विपक्षीय बैठक के मुख्य परिणाम
- इनोवेशन रोडमैप 2030: इसे डीप-टेक (deep-tech), सेमीकंडक्टर्स और नवीकरणीय ऊर्जा में दीर्घकालिक दिशा प्रदान करने के लिए अपनाया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रशासन (governance) और अनुसंधान में सहयोग का विस्तार करने के लिए एक ‘संयुक्त भारत-फ्रांस एआई कार्य समूह’ (Joint India-France AI Working Group) का गठन किया गया।
- आर्थिक सुरक्षा पर संवाद: दोनों अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक भू-राजनीतिक झटकों से बचाने के उद्देश्य से, विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) और साइबर सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन (supply chain resilience) को मजबूत करने के लिए इसकी स्थापना की गई।
- व्यापार और निवेश लक्ष्य: दोनों नेता पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना (वर्तमान ~ $16 बिलियन से) करने के लिए एक ‘उच्च-स्तरीय तंत्र’ (High-Level Mechanism) स्थापित करने पर सहमत हुए। उन्होंने हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र कार्यान्वयन पर भी जोर दिया।
- परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग: चर्चाओं में भारत के नए लागू किए गए ‘शांति अधिनियम’ (SHANTI Act – परमाणु क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला कानून) के निहितार्थों पर प्रकाश डाला गया, जिसने फ्रांसीसी कंपनियों के लिए उन्नत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के निर्माण में सीधे या संयुक्त उद्यमों के माध्यम से भाग लेने के द्वार खोल दिए हैं। मानव अंतरिक्ष उड़ान (human spaceflight) और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार में सहयोग को भी प्राथमिकता दी गई।
- लोगों से लोगों के बीच संबंध और डिजिटल बुनियादी ढांचा: पेरिस और नीस हवाई अड्डों पर भारत के ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) के विस्तार पर प्रकाश डाला गया। इसके अलावा, फ्रांस ने भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त पारगमन (visa-free transit) को तेजी से लागू किया, और पीएम मोदी ने फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए आमंत्रित किया।
भारत-फ्रांस संबंध: इतिहास
भारत-फ्रांस संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुध्रुवीयता (multipolarity) में विश्वास और रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के लिए पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं। फ्रांस एक विश्वसनीय पश्चिमी सहयोगी के रूप में काम करते हुए, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मोड़ों पर लगातार भारत के साथ खड़ा रहा है।
- रणनीतिक साझेदारी की स्थापना (1998): फ्रांस पहला पश्चिमी देश बना जिसके साथ भारत ने रणनीतिक साझेदारी स्थापित की, जिसने पोखरण-II के बाद प्रतिबंध लगाए बिना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मान्यता दी।
- नागरिक परमाणु समझौता (2008): परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) से छूट मिलने के बाद भारत के साथ नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला फ्रांस पहला देश था।
- हॉराइजन्स 2047 रोडमैप (2023): भारत की स्वतंत्रता की आगामी शताब्दी को रेखांकित करते हुए, दोनों देशों ने अगले 25 वर्षों के लिए द्विपक्षीय संबंधों का मार्ग तय करने के लिए ‘हॉराइजन्स 2047’ (Horizon 2047) रोडमैप को अपनाया।
- विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (2026): पारंपरिक रक्षा और अंतरिक्ष से ध्यान हटाकर डीप-टेक, एआई और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग का विस्तार करते हुए इस संबंध को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर उन्नत किया गया।
संबंध का महत्व
- रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीयता: दोनों देश एक बहुध्रुवीय दुनिया का दृष्टिकोण साझा करते हैं, जो द्विध्रुवीय वर्चस्ववादी संरचनाओं के लिए एक प्रतिसंतुलन (counterbalance) के रूप में कार्य करता है। फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे का खुलकर समर्थन करता है।
- रक्षा और सुरक्षा: फ्रांस एक महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार है (स्कोर्पीन पनडुब्बियों और राफेल विमानों की आपूर्ति करता है) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा रक्षा प्लेटफार्मों के सह-डिज़ाइन के माध्यम से भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का सक्रिय रूप से समर्थन करता है।
- हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) स्थिरता: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक निवासी शक्ति (रेयूनियन द्वीप जैसे क्षेत्रों के माध्यम से) होने के नाते, फ्रांस समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, पायरेसी (समुद्री डकैती) का मुकाबला करने और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए भारत के साथ मिलकर सहयोग करता है।
- जलवायु परिवर्तन नेतृत्व: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के संयुक्त शुभारंभ ने दोनों देशों को वैश्विक जलवायु कूटनीति में अग्रणी के रूप में स्थापित किया।
चुनौतियाँ
- व्यापार घाटा और मात्रा: अविश्वसनीय रूप से मजबूत रणनीतिक संबंधों के बावजूद, द्विपक्षीय व्यापार मात्रा अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है और भारी रूप से असंतुलित है, जो अमेरिका या जर्मनी के साथ भारत के व्यापार की तुलना में अपनी वास्तविक क्षमता से बहुत कम प्रदर्शन कर रही है।
- परियोजनाओं में देरी: प्रमुख सहयोगात्मक परियोजनाएं, जैसे कि महाराष्ट्र में जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (फ्रांसीसी दिग्गज कंपनी EDF द्वारा छह EPR रिएक्टरों के लिए नियोजित), नागरिक दायित्व (civil liability), बिजली की लागत और तकनीकी मूल्य निर्धारण से संबंधित अनसुलझे मुद्दों के कारण 15 से अधिक वर्षों से रुकी हुई हैं।
- भू-राजनीतिक मतभेद: हालांकि दोनों देश एक-दूसरे की स्वायत्तता का सम्मान करते हैं, लेकिन वैश्विक संकटों के प्रति उनके दृष्टिकोण में सूक्ष्म अंतर मौजूद हैं। पश्चिम एशिया और यूक्रेन के संघर्षों के संबंध में दोनों देशों के सार्वजनिक रुख को एक समान दिखाने के लिए राजनयिक शब्दावली में अक्सर सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
भविष्य की रणनीति
‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए, दोनों देशों को सरकार-से-सरकार (G2G) की निर्भरता से हटकर मजबूत व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) संबंधों की ओर बढ़ना चाहिए।
- रुकी हुई परियोजनाओं को फास्ट-ट्रैक करना: दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए जैतापुर परमाणु परियोजना में दायित्व और लागत-साझाकरण की बाधाओं को हल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- भारत-यूरोपीय संघ एफटीए का लाभ उठाना: भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के तेजी से संचालन से गैर-टैरिफ बाधाएं संरचनात्मक रूप से समाप्त हो जाएंगी, जो द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए प्राथमिक उत्प्रेरक (catalyst) के रूप में कार्य करेगी।
- तकनीकी सीमा का विस्तार: डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए सीमा पार निवेश को आसान बनाकर और संयुक्त एआई कार्य समूह के परिणामों को बढ़ाकर ‘इनोवेशन रोड迈प 2030’ के कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ विशेष रूप से पारंपरिक रक्षा उपकरणों और नौसेना पनडुब्बियों के सह-उत्पादन पर केंद्रित है।
- 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की छूट के बाद फ्रांस भारत के साथ नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश था।
- दोनों देशों के बीच हाल ही में स्थापित ‘आर्थिक सुरक्षा पर संवाद’ का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों में आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन को मजबूत करना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (b)
- कथन 1 गलत है: ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ मुख्य रूप से पारंपरिक सैन्य हार्डवेयर के बजाय महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को गहरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- कथन 2 सही है: फ्रांस वास्तव में सितंबर 2008 में भारत के साथ नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश था, जिसने भारत के बेदाग अप्रसार रिकॉर्ड को मान्यता दी थी।
- कथन 3 सही है: आर्थिक सुरक्षा पर संवाद आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है।
UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “भारत-फ्रांस संबंधों का ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर उन्नयन पारंपरिक रक्षा सहयोग से डीप-टेक और आर्थिक सुरक्षा की ओर बदलाव को दर्शाता है।” ‘इनोवेशन रोडमैप 2030′ जैसे हालिया द्विपक्षीय परिणामों के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)
मुख्य परीक्षा के लिए संक्षिप्त दृष्टिकोण:
- प्रस्तावना: भारत-फ्रांस संबंधों के ऐतिहासिक आधार (1998 की रणनीतिक साझेदारी) का संक्षेप में उल्लेख करें और 2026 में ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में इसके हालिया उन्नयन को रेखांकित करें।
- पारंपरिक स्तंभ: संक्षेप में स्वीकार करें कि रक्षा (राफेल, स्कोर्पीन) और अंतरिक्ष (ISRO-CNES) ने ऐतिहासिक रूप से इन संबंधों को मजबूती दी है।
- डीप-टेक और आर्थिक सुरक्षा की ओर बदलाव:
- इनोवेशन रोडमैप 2030: संयुक्त एआई कार्य समूह की स्थापना, स्टार्टअप इनक्यूबेशन (भारत इनोवेट्स), और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्यात (यूरोप में UPI)।
- आर्थिक सुरक्षा पर संवाद: एक तेजी से अस्थिर वैश्विक बाजार में आपूर्ति श्रृंखलाओं की रक्षा करने, महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने और डेटा की सुरक्षा के लिए सैन्य सुरक्षा से आगे बढ़ना।
- परमाणु नवाचार: भारत के शांति अधिनियम (SHANTI Act) द्वारा सक्षम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर संभावित सहयोग के माध्यम से केवल बड़े पैमाने के पारंपरिक रिएक्टरों से आगे का विकास।
- निष्कर्ष: निष्कर्ष निकालें कि यह विविधीकरण (diversification) सुनिश्चित करता है कि भू-अर्थशास्त्र (geoeconomics) और चौथी औद्योगिक क्रांति के प्रभुत्व वाले युग में यह साझेदारी लचीली और अत्यधिक प्रासंगिक बनी रहे।
