विषय: पर्यावरण एवं जैव विविधता (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-III)
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मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict- HWC) की बढ़ती घटनाओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए, केरल वन विभाग ने हाथियों की प्रोफाइलिंग कर रहा है। इस पहल के तहत उत्तरी केरल (विशेष रूप से अरालम फार्म, कन्नूर और कोट्टियूर के आसपास) में मानव बस्तियों में आदतन भटककर आने वाले अलग-अलग हाथियों की व्यक्तिगत पहचान और डेटाबेस तैयार कर रहा है।
पहल के प्रमुख बिंदु
1. सामान्य ट्रैकिंग के बजाय व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग:
- हाथियों के पूरे झुंड पर नज़र रखने के बजाय, वन विभाग विशेष रूप से “आदतन भटकने वाले” हाथियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRTs), फील्ड कर्मचारी और फॉरेस्ट वॉचर (वन रक्षक) तस्वीरों, वीडियो और फील्ड रिपोर्ट का उपयोग करके सक्रिय रूप से इन विशिष्ट जानवरों का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं।
2. पूर्वानुमानित व्यवहार पैटर्न की पहचान:
- अवलोकनों से पता चलता है कि ये समस्याग्रस्त हाथी विशिष्ट और पूर्वानुमानित दिनचर्या का पालन करते हैं।
- वे आमतौर पर मानव बस्तियों में तब प्रवेश करते हैं जब मानवीय गतिविधियां सबसे कम (रात के समय) होती हैं, कृषि फसलों को खाते हैं और मानव टकराव से बचने के लिए दिन निकलने से पहले ही समझदारी से जंगल में लौट जाते हैं।
घुसपैठ की मौसमी वृद्धि
- कई वर्षों के ऐतिहासिक डेटा से एक स्पष्ट मौसमी प्रवृत्ति का संकेत मिलता है।
- शुरुआती मानसूनी महीनों (जुलाई और अगस्त) के दौरान जंगली जानवरों की घुसपैठ लगातार अपने चरम पर होती है।
- हाथियों की इस प्रवृत्ति और व्यवहार को फील्ड कर्मचारियों द्वारा अच्छी तरह से प्रलेखित किया गया है।
- वन विभाग ने उल्लेख किया है कि मानव आवासों में इस मानसूनी प्रवास के पीछे के सटीक पारिस्थितिक या जैविक कारणों को समझने के लिए एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
इस कदम का महत्व
- लक्षित न्यूनीकरण (Targeted Mitigation): अक्सर हाथियों का एक छोटा प्रतिशत ही फसलों को नुकसान पहुंचाने और मानव टकराव की अधिकांश घटनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। प्रोफाइलिंग से पूरे झुंड को परेशान किए बिना लक्षित हस्तक्षेप के लिए इन विशिष्ट ‘समस्याग्रस्त जानवरों’ की पहचान करने में मदद मिलती है।
- संसाधनों की सक्रिय तैनाती: मौसमी चरम (जुलाई-अगस्त) और दैनिक व्यवहार पैटर्न (रात के समय हमले) को समझकर, वन विभाग त्वरित प्रतिक्रिया दलों (RRTs) और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अधिक कुशलता से तैनात कर सकता है।
- डेटा-संचालित संरक्षण: व्यक्तिगत विशेषताओं (जैसे शारीरिक निशान, दांतों का आकार, या घाव) का दस्तावेजीकरण एक मजबूत डेटाबेस बनाता है, जो भविष्य में स्थानांतरण, रेडियो-कॉलरिंग, या हाथी के व्यवहार पर वैज्ञानिक अध्ययन में सहायता कर सकता है।
अरालम वन्यजीव अभयारण्य
- अवस्थिति: यह पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों पर स्थित केरल का सबसे उत्तरी वन्यजीव अभयारण्य है।
- महत्व: यह कर्नाटक के ब्रह्मगिरी वन्यजीव अभयारण्य से सटा हुआ है और इस क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- अरालम स्टेट फार्म इस अभयारण्य से जुड़ा हुआ है, जो इसे फसल-छापेमारी के लिए अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र (High-vulnerability zone) बनाता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष क्या है?
- मानव-वन्यजीव संघर्ष से तात्पर्य मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच नकारात्मक अंतःक्रियाओं से है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- यह संघर्ष आमतौर पर तब होता है जब वन्यजीवों की ज़रूरतें और व्यवहार, बढ़ती मानव आबादी के लक्ष्यों के साथ भौगोलिक रूप से ओवरलैप (टकराव) करते हैं।
- इसके परिणामों में फसलों को नुकसान, संपत्ति की क्षति, पशुधन की हानि और गंभीर मामलों में मानव जीवन की हानि व बदले की भावना से वन्यजीवों की हत्या शामिल है।
- हाथी अत्यधिक बुद्धिमान, घुमंतू और विशाल शाकाहारी जीव (mega-herbivores) हैं, जिनकी आहार संबंधी आवश्यकताएं बहुत अधिक होती हैं (वे प्रतिदिन 150 किलोग्राम तक भोजन और सैकड़ों लीटर पानी का उपभोग करते हैं)।
मानव-हाथी संघर्ष क्यों होता है?
- आवास का विखंडन और नुकसान: कृषि, मानव बस्तियों और रैखिक बुनियादी ढांचे (रेलवे, राजमार्ग, नहरें और बिजली की लाइनें) के तेजी से विस्तार ने पारंपरिक हाथी आवासों को काट दिया है, जिससे उनके रहने का स्थान सिकुड़ गया है।
- वनों का क्षरण: आक्रामक खरपतवार प्रजातियों का प्रसार, जंगल की आग और समग्र क्षरण से जंगलों के अंदर प्राकृतिक चारे और जल स्रोतों की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे हाथियों को जीवित रहने के लिए मानव-बहुल परिदृश्य में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
- फसल पैटर्न में बदलाव: जंगल के किनारे गन्ना, केला और धान जैसी अत्यधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक नकदी फसलों की खेती हाथियों के लिए एक मजबूत चुंबक का काम करती है, जिससे वे अक्सर फसलों पर हमला करते हैं।
- हाथी गलियारों (एलिफेंट कॉरिडोर) में बाधा: हाथियों की स्थानिक स्मृति बहुत मजबूत होती है और वे पीढ़ियों से पारंपरिक प्रवासी मार्गों का पालन करते हैं। जब इन संकरे गलियारों को रिसॉर्ट्स, खनन या गांवों द्वारा अवरुद्ध कर दिया जाता है, तो हाथियों को मानव बस्तियों से होकर गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है।
सरकार द्वारा की गई पहलें
सरकार ने इन संघर्षों को कम करने के लिए कई प्रशासनिक, तकनीकी और सामुदायिक स्तर की पहल शुरू की हैं:
- प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992): यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा करना है, साथ ही मानव-हाथी संघर्ष और बंदी हाथियों के कल्याण के मुद्दों को सक्रिय रूप से संबोधित करना है।
- तकनीकी हस्तक्षेप: पूर्व चेतावनी प्रणाली (SMS अलर्ट, रेडियो-कॉलरिंग) और AI-आधारित निगरानी लागू करना। इसका एक प्रमुख उदाहरण गजराज प्रणाली (Gajraj System) है, जो रेलगाड़ियों की टक्कर से हाथियों की मौत को रोकने के लिए रेलवे पटरियों पर स्थापित एक AI-आधारित घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली है।
- भौतिक और जैविक-बाधाएं: सौर ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक बाड़ लगाना, हाथी-रोधी खाइयां (EPTs) खोदना और अभिनव जैविक बाड़ (Bio-fences) लागू करना। उदाहरण के लिए प्रोजेक्ट RE-HAB (मधुमक्खियों का उपयोग करके हाथी-मानव हमलों को कम करना), जो हाथियों को दूर रखने के लिए मधुमक्खी-बक्सों का उपयोग करता है।
- त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRTs): भटकने वाले हाथियों को सुरक्षित रूप से वापस जंगलों में खदेड़ने के लिए अनुकूलित वाहनों, ड्रोन और गैर-घातक निवारकों से लैस विशेष वन विभाग की टीमों की तैनाती।
- वित्तीय मुआवजा: प्रभावित स्थानीय समुदायों द्वारा गुस्से में की जाने वाली जवाबी हत्याओं को रोकने के लिए मानव जीवन की हानि, संपत्ति की क्षति और फसल के विनाश के लिए अनुग्रह राशि (मुआवजा) प्रदान करना।
क्या किया जाना चाहिए?
- गलियारों को सुरक्षित और बहाल करना: देश भर में शेष हाथी गलियारों को कानूनी रूप से अधिसूचित करना और भौतिक रूप से सुरक्षित करना। महत्वपूर्ण बाधा वाले क्षेत्रों से भूमि अधिग्रहण या गांवों के स्वैच्छिक और पर्याप्त मुआवजे के साथ पुनर्वास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- पर्यावरण के अनुकूल भूमि उपयोग योजना: वन क्षेत्रों और उसके आसपास के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जानवरों के अनुकूल डिज़ाइन, जैसे कि पशु अंडरपास, ओवरपास और इको-ब्रिज को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए ताकि उनके सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित किया जा सके।
- सीमांत क्षेत्रों में फसल विविधीकरण: वन सीमांत क्षेत्रों में किसानों को पारंपरिक नकदी फसलों के बजाय अदरक, हल्दी, मिर्च और नींबू जैसी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करना और सब्सिडी देना, जो हाथियों को पसंद नहीं हैं।
- सुव्यवस्थित मुआवजा तंत्र: मुआवजे के वितरण में देरी अक्सर भारी गुस्से और जवाबी कार्रवाई (जैसे करंट लगाना या जहर देना) को जन्म देती है। स्थानीय समर्थन बनाए रखने के लिए एक तेज़, पारदर्शी और डिजिटल मुआवाज़ा तंत्र स्थापित करना महत्वपूर्ण है।
- सह-अस्तित्व मॉडल को बढ़ावा देना: स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों और पर्यावरण-पर्यटन (इको-टूरिज्म) में शामिल करके “संघर्ष न्यूनीकरण” से “मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व” की ओर नैरेटिव (कथा) को स्थानांतरित करना, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण से आर्थिक लाभ हो।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत में हाथी संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- मानव-हाथी संघर्ष के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाला अरालम वन्यजीव अभयारण्य केरल के पश्चिमी घाट में स्थित है।
- एशियाई हाथी अपनी भोजन की आदतों में पूर्णतः दिनचर (केवल दिन के दौरान सक्रिय) होते हैं, जो रात के समय फसलों पर होने वाले हमलों को रोकता है।
- भारतीय हाथी को IUCN रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2, और 3
उत्तर: (b) केवल 1 और 3
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: अरालम वन्यजीव अभयारण्य केरल (कन्नूर जिले) में पश्चिमी घाट में स्थित है।
- कथन 2 गलत है: हाथी मानव उपस्थिति के आधार पर अपने व्यवहार को बदलने के लिए जाने जाते हैं। उच्च मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में, हाथी अक्सर मानव मुठभेड़ों से बचने के लिए फसलों को नुकसान पहुंचाने के लिए रात्रिचर आदतें (रात में सक्रिय) अपना लेते हैं, जैसा कि हाल ही में केरल की प्रोफाइलिंग पहल में उल्लेख किया गया है।
- कथन 3 सही है: एशियाई हाथी (भारतीय उप-प्रजाति सहित) IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के पारंपरिक तरीके, जैसे कि भौतिक बाधाएं, काफी हद तक अपर्याप्त साबित हुए हैं।” केरल वन विभाग की हालिया पहल के आलोक में, चर्चा करें कि व्यवहार संबंधी प्रोफाइलिंग (Behavioral profiling) और प्रौद्योगिकी भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान कैसे प्रदान कर सकते हैं। (150 शब्द)
