विषय: विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र- III)
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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सतत परिवहन (Sustainable Transport) और उन्नत कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, हरियाणा के जींद (Jind) में भारत की पहली ‘हाइड्रोजन-संचालित ईंधन सेल ट्रेन’ (Hydrogen-powered fuel cell train) को हरी झंडी दिखाई।
प्रमुख बिंदु
- स्वदेशी डिजाइन और एकीकरण: 10-डिब्बों (Coaches) वाली इस ट्रेन को पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और एकीकृत (Indigenously designed and integrated) किया गया है।
- क्षमता और शक्ति: यह 3,200 हॉर्सपावर (HP) की प्रणोदन प्रणाली (Propulsion system) द्वारा संचालित है।
- यह दुनिया के सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-ईंधन वाले यात्री ट्रेनसेट (Passenger trainsets) में से एक है।
हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक की कार्यप्रणाली
- पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ग्रिड पर निर्भर ट्रेनों के विपरीत, यह ट्रेन ऑनबोर्ड (Onboard) अपनी बिजली स्वयं उत्पन्न करती है।
- इसमें ‘ईंधन सेल’ (Fuel Cell) के भीतर हाइड्रोजन गैस और वायुमंडलीय ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical reaction) कराई जाती है, जिससे विद्युत ऊर्जा पैदा होती है।
- शून्य उत्सर्जन (Zero Emission): इस पूरी प्रक्रिया में उपोत्पाद (By-product) के रूप में केवल जल वाष्प (Water vapour) का उत्सर्जन होता है।
- इस प्रकार यह पूर्णतः पर्यावरण के अनुकूल ट्रेन बन जाती है।
हाइड्रोजन: परिवहन ईंधन के रूप में
- उच्च ऊर्जा घनत्व (High Energy Density): हाइड्रोजन का द्रव्यमान आधारित ऊर्जा घनत्व (Energy density by mass) अत्यधिक उच्च होता है। 1 किलोग्राम हाइड्रोजन में लगभग 142 मेगाजूल (MJ) ऊर्जा होती है, जो पारंपरिक डीजल या गैसोलीन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।
- शून्य टेलपाइप उत्सर्जन (Zero Tailpipe Emissions): हाइड्रोजन ईंधन सेल (Fuel Cell) वाहनों में जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली बनती है, तो उपोत्पाद (By-product) के रूप में केवल जल वाष्प (
) और ऊष्मा उत्सर्जित होती है। यह परिवहन क्षेत्र को पूर्णतः कार्बन-मुक्त (Decarbonize) करने में सक्षम है।
- त्वरित रिफ्यूलिंग और लंबी रेंज: बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs) की तुलना में हाइड्रोजन वाहनों (FCEVs) को बहुत तेजी से (पारंपरिक ईंधन की तरह कुछ मिनटों में) रिफ्यूल किया जा सकता है, और यह भारी परिवहन (जैसे ट्रेनों, ट्रकों और जहाजों) के लिए लंबी दूरी की रेंज प्रदान करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। हाइड्रोजन को घरेलू स्तर पर उत्पादित करके देश जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम कर सकता है।
हाइड्रोजन ईंधन के विभिन्न प्रकार एवं उनका उत्पादन
हाइड्रोजन को उसके उत्पादन के स्रोतों और उत्सर्जन के आधार पर विभिन्न “रंगों” (Colors) में वर्गीकृत किया जाता है:
| हाइड्रोजन का प्रकार | उत्पादन की विधि (Method of Production) | पर्यावरणीय प्रभाव / कार्बन फुटप्रिंट |
| ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) | नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) का उपयोग करके जल का इलेक्ट्रोलाइजेश (Electrolysis) ( | शून्य कार्बन उत्सर्जन (यह सबसे स्वच्छ और टिकाऊ प्रकार है)। |
| ग्रे हाइड्रोजन (Grey Hydrogen) | जीवाश्म ईंधन, मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग (SMR) द्वारा। | उच्च कार्बन उत्सर्जन (वर्तमान में वैश्विक स्तर पर इसका उत्पादन सबसे अधिक होता है)। |
| ब्लू हाइड्रोजन (Blue Hydrogen) | ग्रे हाइड्रोजन की तरह प्राकृतिक गैस से उत्पादन, लेकिन इसमें कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) तकनीक का उपयोग किया जाता है। | कम कार्बन उत्सर्जन (उत्सर्जित कार्बन को वायुमंडल में जाने से पहले ही कैप्चर कर लिया जाता है)। |
| ब्राउन/ब्लैक हाइड्रोजन | कोयले के गैसीकरण (Coal Gasification) की प्रक्रिया द्वारा उत्पादित। | अत्यधिक उच्च कार्बन उत्सर्जन (पर्यावरण के लिए सबसे हानिकारक)। |
हाइड्रोजन का परिवहन ईंधन के रूप में प्रयोग: चुनौतियाँ
- उच्च उत्पादन लागत: वर्तमान में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन अत्यंत खर्चीला है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolysers) की लागत और इसके लिए आवश्यक नवीकरणीय ऊर्जा की इनपुट लागत काफी अधिक है।
- भंडारण और परिवहन (Storage and Transportation): हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे हल्का तत्व है, जिसका आयतनात्मक ऊर्जा घनत्व (Energy density by volume) कम होता है। इसे संपीड़ित (Compress) करने के लिए
जितने अत्यधिक उच्च दबाव या इसे तरल रूप में रखने के लिए
के क्रायोजेनिक तापमान की आवश्यकता होती है, जो बेहद जटिल और जोखिम भरा है।
- अवसंरचना (Infrastructure) की कमी: भारत में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशनों (HRS), समर्पित पाइपलाइनों और सुरक्षित भंडारण केंद्रों का व्यापक ढांचा मौजूद नहीं है। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का यह अभाव इसके त्वरित व्यावसायीकरण में बड़ी बाधा है।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएं: हाइड्रोजन अत्यंत ज्वलनशील (Highly Flammable) होती है और इसकी अदृश्य लौ (Invisible flame) के कारण रिसाव (Leakage) का पता लगाना कठिन होता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं।
- दक्षता का नुकसान (Efficiency Loss): बिजली से हाइड्रोजन बनाने (Electrolysis) और फिर हाइड्रोजन से वापस बिजली बनाने (Fuel Cell) की इस दोहरी प्रक्रिया (Round-trip efficiency) में ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है।
भविष्य की रणनीति
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का प्रभावी कार्यान्वयन: सरकार को इस मिशन के तहत वित्तीय प्रोत्साहनों (जैसे SIGHT कार्यक्रम) के माध्यम से घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण को बढ़ावा देना चाहिए ताकि ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को
प्रति किलोग्राम के प्रतिस्पर्धी स्तर पर लाया जा सके।
- पायलट परियोजनाओं का विस्तार: भारतीय रेलवे द्वारा जींद (हरियाणा) में शुरू की गई पहली हाइड्रोजन ट्रेन की तर्ज पर अन्य भारी परिवहन क्षेत्रों (जैसे लंबी दूरी की बसों और ट्रकों) में भी पायलट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- सुरक्षित अवसंरचना का विकास: सुरक्षा मानकों (Safety Standards) को कड़ा करते हुए देश भर में ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर और रिफ्यूलिंग ग्रिड का विकास किया जाना चाहिए। शुरुआत में औद्योगिक केंद्रों के पास ‘हाइड्रोजन हब’ (Hydrogen Hubs) विकसित किए जा सकते हैं।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश: हाइड्रोजन के सुरक्षित भंडारण के लिए उन्नत सामग्रियों (जैसे सॉलिड-स्टेट मेटल हाइड्राइड स्टोरेज) और स्वदेशी ईंधन सेल प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है।
- कार्बन टैक्स और नीतियां: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों और वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्रों में धीरे-धीरे ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग का अनिवार्य कोटा (Green Hydrogen Purchase Obligations) लागू किया जाना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ईंधन सेल यात्री ट्रेन का शुभारंभ हरियाणा के जींद से किया गया है।
- हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक में बिजली उत्पन्न करने के लिए हाइड्रोजन और वायुमंडलीय ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिसका एकमात्र उपोत्पाद (By-product) जल वाष्प है।
- हाल ही में सिख गुरुओं की विरासत को समर्पित एक अत्याधुनिक संग्रहालय की आधारशिला अमृतसर (पंजाब) में रखी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि सिख गुरुओं की विरासत को समर्पित इस अत्याधुनिक संग्रहालय की आधारशिला अमृतसर में नहीं, बल्कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में रखी गई है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक (Hydrogen Fuel Cell Technology) भारत के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त (Decarbonize) करने और सतत ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।” भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ के संदर्भ में, इस तकनीक के लाभों और इसके कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
दृष्टिकोण (Approach for Mains Answer):
- प्रस्तावना (Introduction): जींद (हरियाणा) से भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
- मुख्य भाग 1 (कार्यप्रणाली और लाभ): स्पष्ट करें कि ईंधन सेल कैसे कार्य करता है (हाइड्रोजन + ऑक्सीजन = बिजली + जल वाष्प)। इसके लाभों (शून्य-उत्सर्जन, उच्च ऊर्जा दक्षता, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भूमिका) पर चर्चा करें।
- मुख्य भाग 2 (चुनौतियां): ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ के उत्पादन की उच्च लागत, सुरक्षित भंडारण (Storage) और परिवहन की समस्या, और देश भर में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Refueling Infrastructure) की कमी जैसी चुनौतियों को रेखांकित करें।
- निष्कर्ष (Conclusion): भारत के ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (National Green Hydrogen Mission) का संदर्भ देते हुए एक भविष्योन्मुखी और सकारात्मक निष्कर्ष लिखें।
