इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के नेतृत्व में नौ भारतीय अंतरिक्ष-तकनीक स्टार्टअप्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में वेनिस, इटली में ‘स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026′ में कई साझेदारियों और सहयोगी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
सहयोग की मुख्य विशेषताएं
- रणनीतिक जुड़ाव: भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने गहरे वाणिज्यिक और तकनीकी सहयोग का पता लगाने के लिए ‘इतालवी अंतरिक्ष उद्योग अध्ययन समूह’ (Italian Space Industry Study Group) के साथ बातचीत की, जिससे भारत और यूरोप के बीच अंतरिक्ष गलियारे को मजबूती मिली।
- समझौता ज्ञापन (MoUs):
- एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज और इम्पल्सो स्पेस: एकीकृत मिशन प्रबंधन और लॉन्च सेवा नेटवर्क के माध्यम से ग्राहकों की पहुंच को सुव्यवस्थित करने और लॉन्च के अवसरों का पता लगाने के लिए समझौता।
- केपलर एयरोस्पेस और एपोजियो स्पेस: ‘ग्राउंड स्टेशन एज़ ए सर्विस’ (GSaaS) बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और क्यूबसैट प्रणालियों तथा उपग्रह मिशन संचालन में सहयोग करने के लिए ढांचागत समझौता।
- द्विपक्षीय संरेखण: ये वाणिज्यिक अंतरिक्ष साझेदारियां 2025-2029 भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना के अनुरूप हैं, जिसे 2024 में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने के लिए घोषित किया गया था।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र: वर्तमान स्थिति और भविष्य
- वर्तमान बाजार हिस्सेदारी: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग $8.4 बिलियन मूल्य की है, जो वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का लगभग 2% है।
- भविष्य का अनुमान: IN-SPACe के अनुसार, यह क्षेत्र अगले दशक में पांच गुना बढ़कर $44 बिलियन होने का अनुमान है। भारत का लक्ष्य 2035 तक $1.8 ट्रिलियन की अनुमानित वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का 8-10% हिस्सा हासिल करना है।
- बजटीय प्रोत्साहन: अंतरिक्ष बजट में पिछले दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2025-2026 में ₹13,416 करोड़ तक पहुंच गया है।
- निर्यात सफलता: भारत ने 30 से अधिक देशों के लिए 400 से अधिक विदेशी उपग्रह लॉन्च करके खुद को एक विश्वसनीय वाणिज्यिक लॉन्च हब के रूप में स्थापित किया है।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण (NewSpace चरण)
- संस्थागत सुधार: 2020 के अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने इस क्षेत्र को खोल दिया है। IN-SPACe को निजी संस्थाओं को अधिकृत और विनियमित करने के लिए एक एकल-खिड़की स्वायत्त नोडल एजेंसी के रूप में बनाया गया था।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): ISRO की वाणिज्यिक शाखा के रूप में, NSIL उद्योग की भागीदारी को बढ़ाने और लॉन्च सेवाओं के मुद्रीकरण पर ध्यान केंद्रित करती है।
- उदारीकृत FDI: सरकार अब गैर-संवेदनशील श्रेणियों (जैसे घटक निर्माण) में स्वचालित मार्ग के माध्यम से 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देती है।
- वित्तीय सहायता: सरकार ने निजी R&D में तेजी लाने के लिए ₹1,000 करोड़ के वेंचर कैपिटल फंड और ₹500 करोड़ के टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड को मंजूरी दी है।
अंतरिक्ष स्टार्टअप और पारिस्थितिकी तंत्र की उपलब्धियां
- PPP नक्षत्र: चार प्रमुख स्टार्टअप्स (पिक्सेल, सैटश्योर, पियर्साइट और ध्रुव स्पेस) के एक संघ ने 12-उपग्रह पृथ्वी अवलोकन नक्षत्र बनाने के लिए भारत की पहली बड़ी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) बोली जीती है।
- लॉन्च वाहन: अग्निकुल कॉसमॉस (3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन) और स्काईरूट एयरोस्पेस ने सफल उप-कक्षीय लॉन्च और मोटर परीक्षण किए हैं।
- फंडिंग में उछाल: भारतीय अंतरिक्ष-तकनीक स्टार्टअप्स ने 140% से अधिक की इक्विटी फंडिंग वृद्धि देखी है।
निजीकरण के लाभ
- लागत प्रभावी नवाचार: निजी स्टार्टअप चपलता के साथ काम करते हैं, जिससे पुन: प्रयोज्य सूक्ष्म-लॉन्च (micro-launchers) और क्यूबसैट जैसे नवाचार कम लागत पर संभव हुए हैं।
- सामाजिक-आर्थिक अनुप्रयोग: उपग्रह डेटा कृषि, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है।
- ISRO को राहत: नियमित वाणिज्यिक लॉन्च से ISRO को मुक्त करने से अंतरिक्ष एजेंसी अब गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण (गगनयान, चंद्रयान-4, शुक्र मिशन) पर ध्यान केंद्रित कर पा रही है।
चुनौतियां और राह
- चुनौतियां: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मुद्रास्फीति के मुकाबले कोर कैपिटल एक्सपेंडिचर में ठहराव, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, और आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता प्रमुख चुनौतियां हैं।
- आगे की राह:
- एंकर ग्राहक: सरकार को स्टार्टअप्स से सीधे सेवाएं खरीदकर ‘एंकर ग्राहक’ के रूप में कार्य करना चाहिए।
- बुनियादी ढांचे का विस्तार: तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में समर्पित लॉन्चपैड जैसे बुनियादी ढांचे का समय पर पूरा होना अनिवार्य है।
- गुणवत्ता आश्वासन: वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय अंतरिक्ष शक्ति बने रहने के लिए कठोर गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करना महत्वपूर्ण है।
प्रमुख शब्दावली
- GSaaS: एक साझा बुनियादी ढांचा मॉडल जहाँ कंपनियां अपने उपग्रहों से संचार के लिए ग्राउंड स्टेशन एंटीना का किराया देती हैं।
- CubeSats: मानकीकृत आकार के छोटे उपग्रह (10x10x10 सेमी इकाइयां) जो अनुसंधान और पृथ्वी अवलोकन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न (PT): Q1. भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के संस्थागत ढांचे के संबंध में:
- IN-SPACe निजी संस्थाओं की गतिविधियों के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक एकल-खिड़की एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की वाणिज्यिक शाखा के रूप में कार्य करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: B (केवल 2 सही है, क्योंकि IN-SPACe अंतरिक्ष विभाग (DoS) के अंतर्गत है।)
मुख्य परीक्षा प्रश्न: Q. भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की वास्तविक क्षमता को अनलॉक करने में गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) की भूमिका पर चर्चा करें। हालिया संस्थागत सुधार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग उन्हें वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में कैसे एकीकृत करते हैं? (15 अंक, 250 शब्द)
