ईरान संघर्ष पर अमेरिकी सीनेट का प्रस्ताव

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हाल ही में, अमेरिकी सीनेट ने एक मुख्य रूप से प्रतीकात्मक समवर्ती प्रस्ताव (Concurrent Resolution) को 50-48 के बहुमत से पारित किया है। यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के साथ शत्रुता समाप्त करने का निर्देश देता है, जब तक कि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) स्पष्ट रूप से सैन्य कार्रवाई को अधिकृत (मंजूरी) न दे।

समाचार से जुड़ी मुख्य बातें

  • विधायी रुख (Legislative Stand): यह प्रस्ताव पहले ही प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) द्वारा पारित किया जा चुका है। इसके सीनेट से भी पारित होने के बाद अब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन आधिकारिक तौर पर इस जारी संघर्ष के खिलाफ रिकॉर्ड पर आ गए हैं।
  • प्रस्ताव की प्रकृति (Nature of the Resolution): चूंकि यह एक “समवर्ती प्रस्ताव” है, इसलिए यह हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति के डेस्क पर नहीं जाता है और इसकी कानूनी बाध्यता विवादित है। यह मुख्य रूप से व्हाइट हाउस की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक फटकार के रूप में कार्य करता है।
  • कार्यपालिका का विरोध (Executive Pushback): व्हाइट हाउस ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए तर्क दिया है कि युद्ध छेड़ने की राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों को सीमित करने का प्रयास करने वाले ऐसे सभी प्रस्ताव पूरी तरह से असंवैधानिक हैं।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

  • तत्काल कारण (Trigger): संघर्ष का वर्तमान चरण फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के बाद तेजी से बढ़ा।
  • क्षेत्रीय प्रसार (Regional Spillover): यह शत्रुता अब एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल गई है, जिसमें लेबनान और फारस की खाड़ी के विभिन्न देश जैसे पड़ोसी देश भी शामिल हो गए हैं।
  • आर्थिक प्रभाव (Economic Impact): इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों (Global Energy Markets) को गंभीर रूप से झकझोर दिया है, जिससे तेल आपूर्ति श्रृंखला (Oil Supply Chain) में व्यवधान की चिंताएं बढ़ गई हैं।
  • ऐतिहासिक मिसाल (Historical Precedent): राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल के दौरान भी, कांग्रेस ने 2019 (यमन संघर्ष) और 2020 (ईरान संघर्ष) में इसी तरह के युद्ध शक्तियों के विधेयक (War Powers Bills) पारित किए थे। हालांकि, राष्ट्रपति द्वारा दोनों पर वीटो लगा दिया गया था, और सीनेट उस वीटो को पलटने के लिए आवश्यक दो-तिहाई (2/3) बहुमत हासिल करने में विफल रही थी।

1973 के युद्ध शक्तियां अधिनियम को समझना (Understanding the 1973 War Powers Act)

  • उत्पत्ति (Origin): इसे वियतनाम युद्ध के बाद अधिनियमित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कांग्रेस की सहमति के बिना संयुक्त राज्य अमेरिका को किसी भी सशस्त्र संघर्ष में झोंकने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाना था।
  • मुख्य प्रावधान (Key Provision): यह कानून अनिवार्य करता है कि अमेरिकी सशस्त्र बलों को किसी भी संभावित या जारी शत्रुता (Hostilities) में शामिल करने के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति को कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी या युद्ध की घोषणा प्राप्त करनी होगी।
  • विवाद (Controversy): अमेरिका के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) के प्रशासनों ने ऐतिहासिक रूप से इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह कानून कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति की अंतर्निहित शक्तियों का हनन करता है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.) के विधायी तंत्र और 1973 के युद्ध शक्तियां अधिनियम (War Powers Act) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित एक “समवर्ती प्रस्ताव” (Concurrent Resolution) को बाध्यकारी कानूनी शक्ति रखने के लिए राष्ट्रपति के अनिवार्य हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है।
  2. 1973 का युद्ध शक्तियां अधिनियम अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए सेना को शत्रुता में शामिल करने के 60 दिनों के भीतर बजटीय या विधायी रूप से कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य बनाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

सही उत्तर: (b)

व्याख्या: > * कथन 1 गलत है: समवर्ती प्रस्ताव का उपयोग आमतौर पर दोनों सदनों पर लागू होने वाले नियमों को बनाने/संसोधित करने या दोनों सदनों की संयुक्त भावना (Sentiment) को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए नहीं जाता है और इसमें कानून की बाध्यकारी शक्ति नहीं होती है।

  • कथन 2 सही है: यह 1973 के युद्ध शक्तियां अधिनियम का मूल प्रावधान है, जिसके तहत राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी आवश्यक है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता न केवल पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती है, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति निर्माण में कार्यपालिका (Executive) और विधायिका (Legislature) के बीच गहरे संस्थागत घर्षण को भी उजागर करती है।” वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

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