यूएई के फुजैराह (Fujairah) में तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इस घटना में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जो पश्चिम एशिया संघर्ष में एक गंभीर मोड़ को दर्शाता है। इस घटना ने भारत के कूटनीतिक लहजे में एक स्पष्ट बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया है।
पृष्ठभूमि: 2026 पश्चिम एशिया संकट
- शुरुआत: 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद संघर्ष तेज हो गया।
- युद्धविराम: 8 अप्रैल को पाकिस्तान में आयोजित “इस्लामाबाद वार्ता” के माध्यम से शत्रुता को अस्थायी रूप से रोकने में सफलता मिली थी।
- संघर्ष विराम का उल्लंघन: 4 मई को युद्धविराम तब टूट गया जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” लॉन्च किया। इसका उद्देश्य हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जबरन खोलना था, जिसकी ईरान ने नाकेबंदी कर दी थी। इसके जवाब में ईरान ने यूएई के बुनियादी ढांचे पर “असममित” (Asymmetric) जवाबी हमला किया।
भारत के कूटनीतिक रुख में बदलाव
ऐतिहासिक रूप से, भारत “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) की नीति अपनाता रहा है, जिसमें वह किसी विशिष्ट पक्ष की आलोचना से बचता था। हालांकि, फुजैराह हमले के बाद इसमें बदलाव देखा गया है:
| विशेषता | पुराना रुख | वर्तमान बदलाव (मई 2026) |
| पक्षों का नाम लेना | अमेरिका, इज़राइल या ईरान का नाम लेने से बचता था। | नागरिक क्षेत्रों पर ईरानी नेतृत्व वाले हमलों की कड़ी निंदा की। |
| रेड लाइन्स (Red Lines) | शांति के लिए सामान्य अपील। | भारतीय नागरिकों का घायल होना और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अब एक ‘रेड लाइन’ है। |
| एकजुटता | सभी पक्षों के साथ संतुलित संबंध। | यूएई के साथ दृढ़ ‘एकजुटता’। पीएम मोदी 15 मई को यूएई का दौरा करेंगे। |
भारत के लिए इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व
खाड़ी में अस्थिरता भारत के राष्ट्रीय हितों को तीन प्रमुख स्तंभों के माध्यम से सीधे प्रभावित करती है:
- भारतीय प्रवासी (Diaspora):
- लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं।
- अकेले यूएई में सबसे बड़ा समुदाय (43 लाख) है, जो वहां की कुल आबादी का एक-तिहाई है।
- आर्थिक प्रेषण (Remittances):
- यह क्षेत्र प्रेषण के रूप में सालाना $40 बिलियन से अधिक का योगदान देता है।
- इस कुल आवक का आधे से अधिक हिस्सा अकेले यूएई से आता है।
- ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार:
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट; नाकेबंदी के कारण तेल की कीमतों में 60% से अधिक की वृद्धि हुई है।
- फुजैराह: तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के मार्ग को दरकिनार (Bypass) करने की सुविधा देता है।
भूगोल पर ध्यान: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
- स्थान: यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
- महत्व: यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन चोकपॉइंट है।
- “दोहरी नाकेबंदी”: वर्तमान स्थिति को दोहरी नाकेबंदी के रूप में वर्णित किया गया है, जहाँ अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करती है, जबकि ईरान हॉर्मुज़ के माध्यम से पारगमन को रोकता है।
मुख्य अवधारणा: असममित युद्ध (Asymmetric Warfare)
अमेरिकी/इज़राइली पारंपरिक हमलों के जवाब में ईरान “असममित” रणनीति अपना रहा है—अर्थात ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके क्षेत्रीय सहयोगियों (जैसे यूएई) के नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए युद्ध की आर्थिक लागत को बढ़ाया जा सके।
आगे की राह
- संवाद और कूटनीति: भारत सैन्य वृद्धि के बजाय “शांतिपूर्ण समाधान” के लिए बातचीत का समर्थन करना जारी रखेगा।
- नागरिकों की सुरक्षा: 1 करोड़ प्रवासियों की सुरक्षा या निकासी के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOPs) को मजबूत करना प्राथमिकता बनी हुई है।
- ऊर्जा विविधीकरण: तेल की कीमतों में 60% उछाल को देखते हुए, भारत को वैकल्पिक ऊर्जा की ओर अपनी गति बढ़ानी होगी और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPRs) को मजबूत करना होगा।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (PT)
Q1. पश्चिम एशिया के भूगोल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी से जोड़ता है।
- फुजैराह यूएई का एक रणनीतिक बंदरगाह है जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरे बिना हिंद महासागर तक पहुँच प्रदान करता है।
- फारस की खाड़ी की सीमा ईरान और सऊदी अरब दोनों से लगती है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 2 और 3)
(व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। बाब-अल-मंडेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है।)
