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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) द्वारा मापे जाने वाले भारत के औद्योगिक उत्पादन में अप्रैल 2026 में 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि 2022-23 को नए आधार वर्ष के रूप में अपनाने वाली संशोधित श्रृंखला के तहत दर्ज की गई है। यह विकास दर पुराने 2011-12 के आधार वर्ष के तहत पिछले वर्ष के इसी महीने में दर्ज की गई 5.8% की वृद्धि की तुलना में थोड़ी धीमी थी।
IIP में यह संशोधन हाल ही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमानों को 2022-23 के आधार वर्ष में अपडेट किए जाने के बाद किया गया है।
नई IIP श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) की मुख्य विशेषताएं
संशोधित IIP श्रृंखला समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव पेश करती है।
- व्यापक क्षेत्रीय कवरेज (Expanded Sectoral Coverage): व्यापक क्षेत्रीय सूचकांकों की संख्या बढ़ाकर चार कर दी गई है।
- बरकरार और पुनर्गठित (Retained & Restructured): खनन (Mining), विनिर्माण (Manufacturing), और बिजली (अब बिजली और गैस आपूर्ति के रूप में विलय)।
- नए जुड़े क्षेत्र (Newly Added): जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियां।
बेहतर सूक्ष्मता और उप-वर्गीकरण
- खनन: डेटा को अब ईंधन खनिजों, धात्विक खनिजों और गैर-धात्विक खनिजों में उप-वर्गीकृत किया गया है।
- बिजली: भारत के ऊर्जा संक्रमण (energy transition) को दर्शाते हुए उत्पादन को स्पष्ट रूप से नवीकरणीय (renewable) और गैर-नवीकरणीय (non-renewable) ऊर्जा स्रोतों में वर्गीकृत किया गया है।
- वस्तुओं की विस्तारित टोकरी (Enlarged Basket of Goods): नई श्रृंखला में 463 वस्तु समूहों के तहत 1,042 उत्पादों को शामिल किया गया है, जो पुरानी श्रृंखला (407 समूहों में 839 वस्तुएं) की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
- अपडेटेड भारांश (Updated Weightage): प्रत्येक क्षेत्र और विनिर्माण उप-उद्योग को दिए गए भारांश (weights) को 2022-23 श्रृंखला के अपडेटेड सकल मूल्य वर्धन (GVA) के साथ पुनर्गठित किया गया है। विनिर्माण (Manufacturing) की हिस्सेदारी अभी भी सबसे अधिक (~75%) बनी हुई है।
- पिछली कड़ियों से तुलनात्मकता (Backward Comparability): विश्लेषणात्मक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने नई (2022-23) और पुरानी (2011-12) श्रृंखला के बीच डेटा की तुलना करने के लिए एक लिंकिंग फॉर्मूला (linking formula) प्रदान किया है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन की एक झलक (अप्रैल 2026)
नए तैयार किए गए सूचकांक (आधार: 2022-23 में 100) के तहत, चार प्रमुख क्षेत्रों में से तीन में विकास की गति धीमी रही, जबकि एक में गिरावट (संकुचन) दर्ज की गई:
1. व्यापक क्षेत्रीय प्रदर्शन (Broad Sectoral Performance):
- विनिर्माण (~75% भारांश): इसमें 6.2% की दर से वृद्धि हुई (जो 2025 में 6.3% से कम है)। छह उद्योगों में गिरावट आई, जिनमें मुख्य रूप से “कोक और परिष्कृत पेट्रोलियम” (-0.4%), “तैयार वस्त्र/पहनावे के कपड़े” (-7%), और “लकड़ी के उत्पाद” (-12.5%) शामिल हैं। “विद्युत उपकरण/इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट” उद्योग का प्रदर्शन बेहतरीन रहा, जिसमें 19.2% का उछाल आया।
- खनन और उत्खनन: इसमें 5.1% की तीव्र गिरावट (संकुचन) देखी गई।
- बिजली और गैस आपूर्ति: इसमें 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई।
- जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन: इसमें 6.6% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
2. उपयोग-आधारित वर्गीकरण रुझान (Use-Based Classification Trends):
- तेज वृद्धि (Accelerated Growth): पूंजीगत वस्तुएं/कैपिटल गुड्स (16%), बुनियादी ढांचा/निर्माण वस्तुएं (7.1%), और मध्यवर्ती वस्तुएं/इंटरमीडिएट गुड्स (7.7%)। पूंजीगत वस्तुओं का मजबूत प्रदर्शन अर्थव्यवस्था में मजबूत निवेश और क्षमता विस्तार का संकेत देता है।
- धीमी वृद्धि (Decelerated Growth): प्राथमिक वस्तुएं (0.8%), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं/कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (4.3%), और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं/कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स (2.8%), जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में तत्काल उपभोक्ता मांग में सापेक्ष मंदी का संकेत देती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) प्रश्न
प्रश्न. हाल ही में संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) श्रृंखला के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IIP की गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है।
- नई श्रृंखला बिजली सूचकांक को कड़ाई से नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में वर्गीकृत करती है।
- विनिर्माण क्षेत्र के भीतर उद्योगों का भारांश (weighting) अब अपडेटेड सकल मूल्य वर्धन (GVA) 2022-23 श्रृंखला के अनुरूप है।
- जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को विशेष रूप से विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मुख्य IIP गणनाओं से हटा दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? (a) केवल 1, 2 और 3 (b) केवल 2, 3 और 4 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a) व्याख्या: कथन 4 गलत है। जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को सूचकांक से हटाने के बजाय इसमें नया शामिल किया गया है, जिससे इसका दायरा (coverage) व्यापक हो गया है।
मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न
प्रश्न. अर्थव्यवस्था के बदलते प्रतिमानों (paradigms) को शामिल करने के लिए व्यापक आर्थिक संकेतकों (macroeconomic indicators) का विकसित होना आवश्यक है। इस संदर्भ में, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार वर्ष में संशोधन के पीछे के तर्कों की चर्चा कीजिए। 2022-23 की श्रृंखला में नए क्षेत्रों को शामिल करना और बेहतर सूक्ष्मता (improved granularity) भारत के वर्तमान आर्थिक संक्रमण (economic transition) को किस प्रकार दर्शाती है? (150 शब्द, 10 अंक)
मुख्य परीक्षा के उत्तर के लिए संकेत (Hints):
- भूमिका (Introduction): IIP को संक्षेप में परिभाषित करें और हाल ही में इसके आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 किए जाने का उल्लेख करें।
- संशोधन का औचित्य/तर्क (Rationale for Revision): समय के साथ “आधार प्रभाव” (base effect) के कारण होने वाली विसंगतियों को दूर करने, बदलते उपभोग/उत्पादन पैटर्न को शामिल करने और अपडेटेड GVA/GDP संकेतकों के साथ डेटा का सटीक मिलान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
- आर्थिक संक्रमण को दर्शाना (Reflecting Economic Transition):
- ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): बिजली सूचकांक को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय में विभाजित करना जलवायु लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और तेजी से बढ़ते हरित ऊर्जा क्षेत्र को दर्शाता है।
- नागरिक बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण (Modernizing Civic Infrastructure): जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन को शामिल करना शहरी उपयोगिता सेवाओं (urban utility services) के औपचारिकीकरण और बढ़ते आर्थिक महत्व को रेखांकित करता है।
- विकसित होती वस्तुओं की टोकरी (Evolving Basket): उत्पादों की संख्या 839 से बढ़कर 1,042 होना औद्योगिक विविविधीकरण, तकनीकी प्रगति और पुरानी हो चुकी वस्तुओं के बाहर होने को दर्शाता है।
- निष्कर्ष (Conclusion): इस बात के साथ निष्कर्ष निकालें कि कैसे एक अधिक सटीक सांख्यिकीय माप नीति निर्माताओं, आरबीआई (RBI) और निवेशकों को लक्षित आर्थिक हस्तक्षेप (targeted economic interventions) तैयार करने में मदद करता है।
