गुजरात के गिर वनों में ‘इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ का सफल पुनर्वास

इंडियन ग्रे हॉर्नबिल

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘बर्ड्स’ (Birds) में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, गुजरात के गिर वनों (Gir forests) से विलुप्त होने के लगभग 60 साल बाद इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ (Indian Grey Hornbill) ने अपने सफल पुनर्वास के बाद लगातार चार वर्षों तक सफल प्रजनन दर्ज किया है।

इसके साथ ही गुजरात वन विभाग ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहाँ जंप-स्टार्ट’ (Jump-start) तकनीक के माध्यम से पैदा हुआ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (Great Indian Bustard – GIB) का दूसरा चूजा 40-दिन की अपनी सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण अवधि को पार कर जीवित रहने में सफल रहा है।

प्रमुख बिंदु

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विलुप्ति:
    • इंडियन ग्रे हॉर्नबिल 1950 और 1960 के दशक के बीच गिर परिदृश्य (Gir landscape) से पूरी तरह से विलुप्त हो गए थे।
    • इनकी प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति (Species Recovery) के लिए गुजरात वन विभाग और उसके संरक्षण भागीदारों द्वारा एक व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  • पुनर्वास परियोजना (Reintroduction Programme):
    • इस परियोजना के तहत दो चरणों में कुल 40 इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को गिर के जंगलों में छोड़ा गया।
    • वर्ष 2021 से 2022 के बीच 28 पक्षियों को और उसके बाद 2023 में 12 पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
  • वैज्ञानिक निगरानी और परिणाम:
    • छोड़े जाने के पहले ही वर्ष में एक जोड़े ने सफलतापूर्वक प्रजनन किया, जबकि दूसरे वर्ष में तीन अन्य प्रजनन जोड़ों ने घोंसले बनाए। यह इस बात का प्रमाण है कि बहाल की गई आबादी प्राकृतिक रूप से खुद को स्थापित कर रही है।
    • वैज्ञानिकों ने पक्षियों की गतिविधियों, उनके द्वारा आवास के उपयोग और प्रजनन व्यवहार को ट्रैक करने के लिए 11 नर पक्षियों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर (Satellite transmitters) लगाए थे।

इंडियन ग्रे हॉर्नबिल का पारिस्थितिक महत्व

ग्रे हॉर्नबिल वन पारिस्थितिकी तंत्र में एक ‘कीस्टोन प्रजाति’ (Keystone species) के रूप में कार्य करते हैं। इनका पारिस्थितिक महत्व निम्नलिखित है:

  • जंगल के किसान’ (Farmers of the Forest): हॉर्नबिल को अक्सर जंगल के किसान कहा जाता है। ये फल (विशेषकर अंजीर/Ficus प्रजाति जैसे बरगद, पीपल, गूलर) खाते हैं और लंबी दूरियां तय करते हैं। इनके बीजों का मल के रूप में त्याग करने से वनों का बड़े पैमाने पर विस्तार होता है।
  • वनों का पुनर्जनन (Forest Regeneration): ऐसे कई पेड़-पौधे हैं जिनके बीज केवल तभी अंकुरित होते हैं जब वे हॉर्नबिल के पाचन तंत्र से होकर गुजरते हैं। इस प्रकार ये जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जनन में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक (Indicator Species): हॉर्नबिल को रहने और घोंसला बनाने के लिए पुराने, ऊंचे और विशाल पेड़ों (जिनमें खोखली गुहाएं/Cavities हों) की आवश्यकता होती है। किसी जंगल में हॉर्नबिल की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वह वन परिपक्व और स्वस्थ है।
  • खाद्य श्रृंखला का संतुलन: ये मुख्य रूप से फलाहारी (Frugivorous) होते हैं, लेकिन प्रजनन के मौसम में प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के लिए कीड़े-मकोड़े, छोटे सरीसृप (छिपकली) और चूहों का भी शिकार करते हैं, जिससे कीटों की आबादी नियंत्रित रहती है।

इंडियन ग्रे हॉर्नबिल: एक सामान्य परिचय

  • वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): ऑसीसेरोस बायरोस्ट्रिस (Ocyceros birostris)
  • भौगोलिक विस्तार: यह प्रजाति मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, नेपाल और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों) के मैदानी इलाकों और तलहटी में पाई जाती है।
  • शारीरिक विशेषताएँ (Physical Characteristics):
    • यह एक मध्यम आकार का पक्षी है जिसके पंख स्लेटी-भूरे (Greyish-brown) रंग के होते हैं।
    • इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी चोंच के ऊपर बनी एक विशिष्ट सींग जैसी संरचना है, जिसे कास्क’ (Casque) कहा जाता है।
    • उड़ान भरते समय इसके पंखों से एक विशिष्ट भारी ध्वनि (Heavy swooshing sound) उत्पन्न होती है।
  • आवास (Habitat): ये आमतौर पर पर्णपाती वनों (Deciduous forests), खुली सवाना भूमि और यहाँ तक कि ऊंचे व पुराने पेड़ों वाले शहरी क्षेत्रों में भी देखे जाते हैं।
  • अनोखा प्रजनन व्यवहार (Unique Nesting Behavior): मादा हॉर्नबिल घोंसले के लिए पेड़ के खोखले तने (Tree cavities) का चयन करती है और प्रजनन काल के दौरान खुद को उस छेद के अंदर मिट्टी और अपनी बीट से पूरी तरह सील कर लेती है। केवल एक छोटी सी दरार छोड़ी जाती है, जिसके माध्यम से नर पक्षी मादा और चूजों को भोजन लाकर खिलाता है।

संरक्षण की स्थिति

यद्यपि गुजरात के गिर वनों जैसे कुछ विशिष्ट क्षेत्रों से यह स्थानीय रूप से विलुप्त (Locally extinct) हो गए थे, लेकिन वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर इनकी समग्र आबादी स्थिर मानी जाती है। इनकी संरक्षण स्थिति निम्नलिखित है:

  1. IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List): कम चिंताजनक (Least Concern – LC)
  2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: भारत में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (WPA), 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों की सूची में रखा गया है और इसके शिकार या अवैध व्यापार पर सख्त प्रतिबंध है।
  3. प्रमुख खतरे: हालाँकि ये ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में हैं, लेकिन पुराने व विशाल पेड़ों की कटाई (आवास विनाश) इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि इन्हें घोंसला बनाने के लिए ऐसे ही पेड़ों की आवश्यकता होती है।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. ‘इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ को हाल ही में गुजरात के गिर वनों में सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया गया है, जहाँ से यह प्रजाति दशकों पूर्व विलुप्त हो गई थी।
  2. वन पारिस्थितिकी तंत्र में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल लंबी दूरी के बीज प्रकीर्णक (Long-distance seed disperser) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3. ‘जंप-स्टार्ट’ (Jump-start) तकनीक का उपयोग हाल ही में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (GIB) के सफल संरक्षण और प्रजनन के लिए किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d) 1, 2 और 3

व्याख्या: दिए गए गद्यांश के अनुसार तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 60 वर्षों बाद गिर वनों में हॉर्नबिल का सफल पुनर्वास हुआ है, जो बीजों के फैलाव में मदद करते हैं। इसके अलावा गुजरात में ‘जंप-स्टार्ट’ तकनीक से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चूजे को सफलतापूर्वक बचाया गया है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Mains Question)

प्रश्न: “गिर के वनों में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल का सफल पुनर्वास और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में हालिया उपलब्धियां, भारत में विलुप्तप्राय प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति (Species Recovery) की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ती हैं।” इस कथन के आलोक में प्रजातियों के पुनर्वास कार्यक्रमों के पारिस्थितिक महत्व और इसके सफल कार्यान्वयन में नवीन तकनीकों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

दृष्टिकोण (Approach for Mains Answer):

  • प्रस्तावना (Introduction): गुजरात के गिर वनों में ‘इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ के सफल पुनर्वास और ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (GIB) के संरक्षण की हालिया सफलता का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
  • मुख्य भाग 1 (पारिस्थितिक महत्व): समझाएं कि किसी प्रजाति (जैसे- हॉर्नबिल) का पुनर्वास क्यों आवश्यक है। खाद्य श्रृंखला के संतुलन, ‘लंबी दूरी के बीज प्रकीर्णक’ के रूप में जंगलों के पुनर्जनन (Regeneration) और जैव विविधता को बनाए रखने में इनकी भूमिका को स्पष्ट करें।
  • मुख्य भाग 2 (नवीन तकनीकों की भूमिका): संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के उपयोग पर चर्चा करें। हॉर्नबिल की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट ट्रांसमीटर (Satellite transmitters) का उपयोग और GIB के संरक्षण के लिए ‘जंप-स्टार्ट’ तकनीक जैसी अभिनव विधियों का उल्लेख करें।
  • मुख्य भाग 3 (चुनौतियां): प्रजातियों के नए आवास में अनुकूलन, शिकार, आवास विनाश और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों को भी संक्षेप में बताएं।
  • निष्कर्ष (Conclusion): वन्यजीव संरक्षण को केवल पशुओं को बचाने तक सीमित न मानकर, इसे समग्र पारिस्थितिक बहाली (Ecological restoration) का हिस्सा बताते हुए एक सकारात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

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