नीति आयोग का रोडमैप: 2035 तक भारत को बायोइकोनॉमी पावरहाउस बनाने की रणनीति

जैवअर्थव्यवस्था की फोटो

हाल ही में नीति आयोग द्वारा “Roadmap for building India as a leading bioeconomy powerhouse by 2035” नामक एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2035 तक भारत को दुनिया की शीर्ष तीन जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) शक्तियों में से एक बनाना है।

प्रमुख सिफारिशें और लक्ष्य

  • बायोइकोनॉमी का आकार बढ़ाना: इस रणनीति के तहत भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) को वर्ष 2025 के $195.3 बिलियन से बढ़ाकर 2035 तक $691 बिलियन और 2047 तक $2.6 ट्रिलियन करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • रोजगार सृजन: इसके माध्यम से 30 मिलियन (3 करोड़) से अधिक उच्च-मूल्य वाले (high-value) रोजगार के अवसरों को सृजित करने का अनुमान है।
  • बायोइकोनॉमी ग्रोथ फंड: जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ‘वैली ऑफ डेथ’ (प्रूफ-ऑफ़-कॉन्सेप्ट रिसर्च और व्यावसायिक स्तर के उत्पादन के बीच का अंतर) को पाटने के लिए वर्ष 2026-35 के लिए ₹50,000 करोड़ का फंड प्रस्तावित किया गया है। यह फंड बायोमैन्युफैक्चरिंग, उन्नत चिकित्सा (advanced therapeutics) और सिंथेटिक बायोलॉजी के लिए बुनियादी ढांचा सहायता, इक्विटी-जोखिम उपकरण और व्यवहार्यता-अंतर वित्तपोषण (VGF) प्रदान करेगा।
  • पीएलआई (PLI) योजना: बायोमैन्युफैक्चरिंग के लिए एक समर्पित ‘उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन’ (PLI) योजना शुरू करने का प्रस्ताव है।
  • BioE3 नीति से आगे का दृष्टिकोण: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को जैव प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) के व्यापक ढांचे से आगे बढ़कर नई वित्तीय व्यवस्था, नियामक सुधारों और क्रॉस-मिनिस्ट्रियल गवर्नेंस (विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय) के साथ एक मिशन-मोड निष्पादन रणनीति अपनानी चाहिए।
  • उद्देश्य में बदलाव: इसका लक्ष्य केवल अनुसंधान (Research) तक सीमित न रहकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों का निर्माण करना है।

छह राष्ट्रीय जैव-मिशन

रोडमैप के तहत स्पष्ट परिणामों और नेतृत्वकर्ता मंत्रालयों के साथ 2035 तक निम्नलिखित छह मिशन शुरू करने की सिफारिश की गई है:

  1. जीनइंडिया (GeneIndia): सस्ती जीन और सेल थेरेपी के विकास के लिए।
  2. एग्रीबायो 2.0 (AgriBio 2.0): जलवायु-अनुकूल जीन-संपादित फसलों और जैविक कृषि इनपुट के लिए।
  3. बायोएक्स फाउंड्री (BioX Foundry): सिंथेटिक बायोलॉजी के नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए।
  4. वन हेल्थ ग्रिड (One Health Grid): संक्रामक रोगों और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) की एकीकृत निगरानी के लिए।
  5. मरीन बायोटेक्नोलॉजी (Marine Biotechnology): समुद्री शैवाल की खेती और समुद्री जैव-उत्पादों के विस्तार के लिए।
  6. बायोफार्मानेक्स्ट (BioPharmaNext): भारत को बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और एआई-सक्षम ड्रग डिस्कवरी (दवा खोज) के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए।

जैव-अर्थव्यवस्था क्या है?

  • जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) ज्ञान-आधारित एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जो भोजन, ऊर्जा, उत्पादों, रसायनों और स्वास्थ्य देखभाल के लिए नवीकरणीय जैविक संसाधनों (जैसे- फसलें, वन, पशु और सूक्ष्मजीव) के उपयोग पर निर्भर करती है।
  • सरल शब्दों में, यह अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है जो वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार (Innovation) के माध्यम से जैविक संसाधनों को मूल्यवर्धित (value-added) और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों में बदलता है।
  • प्रमुख घटक: इसके अंतर्गत बायोफार्मा (Biopharma), एग्री-बायोटेक (Agri-biotech), बायो-इंडस्ट्रियल (जैसे बायोफ्यूल, बायोप्लास्टिक और एंजाइम) तथा बायो-आईटी एवं सेवाएँ (Bio-IT & Services) शामिल हैं।

जैव-अर्थव्यवस्था और भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ (Sustainable) और भविष्य के लिए तैयार करने में जैव-अर्थव्यवस्था एक प्रमुख स्तंभ बन चुकी है:

  • तीव्र विकास प्रक्षेपवक्र (Growth Trajectory): भारत की जैव-अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2014 में यह लगभग $10 बिलियन थी, जो वर्तमान में $130 बिलियन के आंकड़े को पार कर चुकी है और वर्ष 2025 तक इसके $195.3 बिलियन होने का अनुमान है।
  • आर्थिक लक्ष्य की प्राप्ति: यह क्षेत्र भारत के ‘$5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य और ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक प्रमुख उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभा रहा है।
  • रोजगार सृजन (Job Creation): यह उच्च-कौशल वाले हरित रोजगार (Green jobs) उत्पन्न कर रहा है। नए नीति आयोग रोडमैप के अनुसार इस क्षेत्र में 30 मिलियन (3 करोड़) उच्च-मूल्य वाले रोजगार सृजित करने की क्षमता है।
  • आयात निर्भरता में कमी: बायो-एथेनॉल (Bio-ethanol) और बायो-डीजल जैसे जैव-ईंधन के बढ़ते उत्पादन से जीवाश्म ईंधन (कच्चे तेल) के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो रही है, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
  • कृषि और स्वास्थ्य में क्रांति: ‘एग्री-बायोटेक’ जलवायु-अनुकूल (climate-resilient) फसलें विकसित कर खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय सुनिश्चित कर रहा है। वहीं, ‘बायोफार्मा’ क्षेत्र (विशेषकर टीकों और सस्ती दवाओं का उत्पादन) ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थिति प्रदान की है।

भविष्य की रणनीति

भारत को वर्ष 2035 तक दुनिया की शीर्ष तीन जैव-प्रौद्योगिकी शक्तियों में स्थापित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है:

  • नियामक सुधार (Regulatory Reforms): जैव-उत्पादों के व्यावसायीकरण, जीन-संपादन (gene-editing) अनुसंधान और क्लिनिकल परीक्षणों के लिए एकल-खिड़की अनुमोदन (Single-window clearance) प्रणाली लागू की जानी चाहिए, ताकि लालफीताशाही (Red tapism) को कम किया जा सके।
  • वित्तपोषण का प्रभावी निष्पादन: नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित ₹50,000 करोड़ के ‘बायोइकोनॉमी ग्रोथ फंड’ को तेजी से धरातल पर उतारना चाहिए। इसमें स्टार्टअप्स को ‘वैली ऑफ डेथ’ से उबारने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) सुलभ करानी होगी।
  • कौशल संवर्धन (Skill Development): सिंथेटिक बायोलॉजी, AI-आधारित ड्रग डिस्कवरी (दवा खोज) और उन्नत बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम को अद्यतन करना होगा, ताकि उद्योग की मांग के अनुरूप मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ‘बायोएक्स फाउंड्री’ जैसे नवाचार क्लस्टरों के निर्माण में कॉर्पोरेट क्षेत्र को भागीदार बनाना आवश्यक है।
  • वैश्विक सहयोग (Global Collaboration): तकनीकी हस्तांतरण (Technology transfer), बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा और वैश्विक मानकों को अपनाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाना चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) रोडमैप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को $691 बिलियन तक पहुंचाना है।
  2. जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अनुसंधान और व्यावसायिक उत्पादन के बीच के अंतर को पाटने के लिए ₹50,000 करोड़ के ‘बायोइकोनॉमी ग्रोथ फंड’ का प्रस्ताव किया गया है।
  3. रोडमैप के तहत ‘जीनइंडिया’ (GeneIndia) और ‘बायोफार्मानेक्स्ट’ (BioPharmaNext) सहित छह राष्ट्रीय जैव-मिशनों की सिफारिश की गई है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

व्याख्या: नीति आयोग के रोडमैप के अनुसार, 2035 तक जैव-अर्थव्यवस्था को $691 बिलियन करने का लक्ष्य है (कथन 1 सही है)। ‘वैली ऑफ डेथ’ को समाप्त करने के लिए ₹50,000 करोड़ का फंड प्रस्तावित है (कथन 2 सही है)। साथ ही, देश को वैश्विक केंद्र बनाने के लिए छह राष्ट्रीय जैव-मिशनों की सिफारिश की गई है (कथन 3 सही है)। अतः तीनों कथन सही हैं।

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “हाल ही में नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित जैव-अर्थव्यवस्था रोडमैप केवल अनुसंधान तक सीमित न रहकर भारत को एक वैश्विक बायोमैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है।” इस कथन के आलोक में रोडमैप की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए तथा यह भी बताइए कि यह भारत की आर्थिक और तकनीकी संप्रभुता को कैसे मजबूत कर सकता है? (250 शब्द, 15 अंक)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *