विषय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध और विज्ञान-प्रौद्योगिकी (सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र- II और III)
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हाल ही में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शंघाई में ‘वैश्विक AI शासन’ (Global AI Governance) पर एक नई पहल की घोषणा की है, जो मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ (Global South) और विकासशील देशों पर केंद्रित है। इसके तहत चीन ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 29 अन्य देशों के साथ मिलकर शंघाई में विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन (World Artificial Intelligence Cooperation Organisation – WAICO) की स्थापना की है।
WAICO: प्रमुख बिंदु
- नेतृत्व और भागीदारी: WAICO में ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं।
- ब्रिक्स (BRICS) के संस्थापक देशों में से केवल भारत इस संगठन में शामिल नहीं हुआ है, जबकि उसने शंघाई शिखर सम्मेलन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building): चीन ने अगले पांच वर्षों में विकासशील देशों को AI प्रशिक्षण और सेमिनार कार्यक्रमों में 5,000 अवसर प्रदान करने की घोषणा की है।
- संयुक्त सहयोग केंद्र: आसियान (ASEAN), अरब लीग, अफ्रीकी संघ (AU), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स के साथ संयुक्त AI अनुप्रयोग सहयोग केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- पश्चिमी AI मॉडल का विकल्प और सुरक्षा चिंताएं
- रणनीतिक स्वायत्तता: चीन पश्चिमी देशों में स्थित AI मॉडल (जैसे- ओपनएआई का चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक का क्लॉड) पर निर्भरता को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
- ओपन-सोर्स पहल (Open-Source Initiative): मूनशॉट (Moonshot – किमी K3 मॉडल) और डीपसीक (DeepSeek) जैसी चीनी AI फर्में ‘ओपन-सोर्स’ मॉडल पेश कर रही हैं। चीन का मानना है कि इससे विकासशील देशों में प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा मिलेगा और उसे बढ़त हासिल होगी।
‘वैश्विक AI शासन’ (Global AI Governance) क्या है?
- ‘वैश्विक AI शासन’ से तात्पर्य उन मानदंडों, नीतियों, कानूनी ढांचों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के एकीकृत समूह से है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास, तैनाती और उपयोग को विनियमित (Regulate) करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI प्रौद्योगिकियों का विकास पारदर्शी, सुरक्षित, नैतिक और मानवाधिकारों के अनुरूप हो, तथा इसके जोखिमों (जैसे- डीपफेक, पूर्वाग्रह) को कम करते हुए इसके लाभों का पूरी मानवता के बीच न्यायसंगत वितरण हो सके।
‘वैश्विक AI शासन’ की आवश्यकता क्यों?
- सीमाविहीन प्रकृति (Border-less Nature): AI प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। किसी एक देश में विकसित किया गया शक्तिशाली AI मॉडल (जैसे ChatGPT) दुनिया के किसी भी कोने में प्रभाव डाल सकता है। इसलिए खंडित राष्ट्रीय कानूनों के बजाय वैश्विक दृष्टिकोण आवश्यक है।
- अस्तित्वगत और सुरक्षा जोखिम: डीपफेक (Deepfakes), उन्नत साइबर हमलों, बायो-टेररिज्म और ‘घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों’ (Lethal Autonomous Weapons) के विकास जैसे खतरों से निपटने के लिए।
- एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और नैतिकता (Algorithmic Bias): AI सिस्टम में नस्लीय, लैंगिक या भाषाई पूर्वाग्रह अंतर्निहित हो सकते हैं। पारदर्शी और जवाबदेह AI सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक नैतिक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।
- तकनीकी एकाधिकार पर अंकुश (Tackling Tech Monopoly): कुछ मुट्ठी भर बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों (Big Tech) के पास AI अनुसंधान और डेटा का एकाधिकार है। एक वैश्विक शासन ढांचा इस शक्ति-असंतुलन को रोक सकता है।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: AI द्वारा स्वचालन (Automation) से बड़े पैमाने पर नौकरियों के विस्थापन और विकसित तथा विकासशील देशों (डिजिटल डिवाइड) के बीच बढ़ती असमानता को रोकने के लिए।
‘वैश्विक AI शासन’ से संबन्धित वैश्विक पहलें
- यूरोपीय संघ का AI अधिनियम (EU AI Act): यह दुनिया का पहला व्यापक और कानूनी रूप से बाध्यकारी AI कानून है। यह ‘जोखिम-आधारित दृष्टिकोण’ (Risk-based approach) अपनाता है, जिसमें AI प्रणालियों को अस्वीकार्य (Unacceptable), उच्च, मध्यम और निम्न जोखिम में बांटा गया है।
- ब्लेचली घोषणा (Bletchley Declaration): ब्रिटेन में आयोजित पहले वैश्विक AI सुरक्षा शिखर सम्मेलन (नवंबर 2023) में भारत सहित 28 देशों द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए गए। यह ‘फ्रंटियर AI’ (अत्याधुनिक AI मॉडलों) के जोखिमों को पहचानने और कम करने पर केंद्रित है।
- ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन AI (GPAI): यह 29 देशों का एक अंतरराष्ट्रीय बहु-हितधारक मंच है (भारत इसका संस्थापक सदस्य है), जो मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर AI के जिम्मेदार विकास का समर्थन करता है।
- संयुक्त राष्ट्र के प्रयास: मार्च 2024 में UN महासभा ने सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी AI को बढ़ावा देने के लिए अपना पहला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। साथ ही, UN ने एक ‘वैश्विक AI सलाहकार निकाय’ (AI Advisory Body) का भी गठन किया है।
- G7 की हिरोशिमा AI प्रक्रिया (Hiroshima AI Process): इसका उद्देश्य जनरेटिव AI (Generative AI) से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए उन्नत AI प्रणालियों के विकासकर्ताओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय मार्गदर्शक सिद्धांत स्थापित करना है।
मुद्दे और चुनौतियाँ
- आम सहमति का अभाव (Lack of Consensus): प्रमुख वैश्विक खिलाड़ियों के दृष्टिकोण में भारी विरोधाभास है। अमेरिका नवाचार-समर्थक (Innovation-pro) है, यूरोपीय संघ कठोर विनियमन (Strict regulation) चाहता है, जबकि चीन राज्य-नियंत्रित AI मॉडल (State-controlled) पर जोर देता है।
- नवाचार बनाम नियमन की गति (Pace of Technology): AI प्रौद्योगिकी का विकास कानूनों और संधियों के निर्माण की तुलना में बहुत तेज गति से हो रहा है, जिससे नीतियां जल्दी ही पुरानी (Obsolete) पड़ जाती हैं।
- ग्लोबल साउथ की उपेक्षा: अधिकांश AI मानक विकसित देशों (पश्चिमी देशों) द्वारा तय किए जा रहे हैं। इसमें विकासशील देशों की विशिष्ट चिंताओं (जैसे- भाषाई विविधता, डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी) को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
- प्रवर्तन तंत्र की कमी (Lack of Enforcement Mechanism): वर्तमान में अधिकांश वैश्विक पहलें (जैसे GPAI या ब्लेचली) केवल घोषणात्मक (Declaratory) प्रकृति की हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों या कंपनियों को दंडित करने के लिए कोई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था नहीं है।
भविष्य की रणनीति
- अंतर्राष्ट्रीय AI एजेंसी की स्थापना: परमाणु ऊर्जा के नियमन के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) की तर्ज पर AI की वैश्विक निगरानी, मानक-निर्धारण और ऑडिटिंग के लिए एक शक्तिशाली ‘ग्लोबल AI एजेंसी’ का गठन किया जाना चाहिए।
- समावेशी ‘बहु-हितधारक’ दृष्टिकोण (Multi-stakeholder Approach): AI शासन में केवल सरकारों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। नीतियां बनाते समय तकनीकी दिग्गजों, नागरिक समाज, शिक्षाविदों और विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ (भारत, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- एजाइल रेगुलेशन (Agile Regulation): तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए नियमन को कठोर बनाने के बजाय लचीला (Flexible) रखा जाना चाहिए। इसके लिए ‘रेगुलेटरी सैंडबॉक्स’ (Regulatory Sandbox – नियंत्रित वातावरण में परीक्षण) दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए।
- नवाचार और सुरक्षा में संतुलन (Balancing Innovation and Safety): एक ऐसा सार्वभौमिक ढांचा विकसित किया जाए जो अनुचित प्रतिबंध लगाकर नवाचार को बाधित न करे, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट ‘रेड लाइन्स’ (Red lines) तय करे—जैसे डीपफेक का चुनाव में उपयोग या मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले फेशियल रिकग्निशन सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे ‘विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन’ (WAICO) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- WAICO की स्थापना मुख्य रूप से पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका और यूरोपीय संघ) के सहयोग से की गई है।
- इस संगठन का मुख्यालय शंघाई (चीन) में स्थित है।
- भारत, ब्रिक्स (BRICS) का संस्थापक सदस्य होने के बावजूद, WAICO में शामिल नहीं हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) केवल 2 और 3
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है क्योंकि WAICO की स्थापना चीन द्वारा ग्लोबल साउथ (एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका) के विकासशील देशों के साथ मिलकर की गई है, न कि पश्चिमी देशों के सहयोग से।
- कथन 2 और 3 सही हैं। इसका मुख्यालय शंघाई में है और भारत इस पहल में शामिल नहीं हुआ है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन (WAICO) की स्थापना ग्लोबल साउथ में अपना प्रभाव बढ़ाने और तकनीकी संप्रभुता स्थापित करने की चीन की रणनीति का हिस्सा है।” इस कथन के आलोक में, वैश्विक AI शासन (Global AI Governance) के क्षेत्र में उभरती हुई भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का विश्लेषण कीजिए और भारत के लिए इसके निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
दृष्टिकोण (Approach for Mains Answer):
- प्रस्तावना (Introduction): शंघाई में WAICO के हालिया गठन का उल्लेख करें और बताएं कि यह कैसे चीन की वैश्विक AI नेतृत्व की आकांक्षा को दर्शाता है।
- मुख्य भाग 1 (चीन की रणनीति और WAICO का महत्व):
- ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) को आकर्षित करने के लिए चीन की क्षमता निर्माण योजना (5000 प्रशिक्षण अवसर)।
- पश्चिमी AI मॉडलों (ChatGPT आदि) पर निर्भरता कम करने के लिए डीपसीक (DeepSeek) जैसे ओपन-सोर्स मॉडलों को बढ़ावा देना।
- वैचारिक घुसपैठ का विरोध (सांस्कृतिक संप्रभुता का तर्क)।
- मुख्य भाग 2 (भूमंडलीय AI भू-राजनीति): स्पष्ट करें कि कैसे AI अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा, राष्ट्रीय सुरक्षा और ‘डेटा उपनिवेशवाद’ (Data Colonialism) से बचने का नया हथियार बन गया है।
- मुख्य भाग 3 (भारत के लिए निहितार्थ): भारत के ब्रिक्स में होते हुए भी WAICO से दूर रहने के कारणों (जैसे चीन के साथ सीमा विवाद और डेटा सुरक्षा चिंताएं) पर चर्चा करें। भारत के अपने AI विज़न (जैसे ‘INDIAai’ मिशन और ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन AI – GPAI में भूमिका) को कैसे मजबूत किया जाना चाहिए, यह सुझाएं।
- निष्कर्ष (Conclusion): स्पष्ट करें कि AI का विकास किसी एक देश का एकाधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि यह वैश्विक भलाई के लिए होना चाहिए, जिसमें भारत एक लोकतांत्रिक और पारदर्शी AI फ्रेमवर्क प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
