हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और स्थिति को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर किए गए हालिया हमलों ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है।
प्रमुख बिंदु
- समझौता ज्ञापन (MoU) और उसका उल्लंघन
- अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य संघर्ष विराम को आगे बढ़ाना और अंतिम समाधान हेतु वार्ता शुरू करना था।
- ईरान के अनुसार, अमेरिकी उल्लंघनों ने इस MoU के कई हिस्सों को अप्रभावी बना दिया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे “समय की बर्बादी” करार देते हुए ईरान पर प्रतिदिन समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
- विवाद का मूल कारण – होर्मुज जलडमरूमध्य
- संघर्ष के केंद्र में यह सवाल है कि वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट, होर्मुज जलडमरूमध्य को कौन नियंत्रित करेगा।
- MoU में जलडमरूमध्य के माध्यम से टैंकरों के सुरक्षित मार्ग का आह्वान किया गया था।
- ईरान ने अपने तट के साथ एक नया मार्ग खोला है और वाणिज्यिक जहाजों को स्थानीय अधिकारियों के समन्वय में इसी “निर्दिष्ट मार्ग” का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
- वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और कूटनीतिक प्रभाव
- ओमान तट के साथ एक वैकल्पिक मार्ग से गुजरने वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों (मार्शल आइलैंड्स के M/T अल रक़य्यात, सऊदी अरब के M/T वेडयान और लाइबेरिया के M/T साइप्रस प्रोस्पेरिटी) पर हमले किए गए।
- इन हमलों के बाद, अमेरिका ने ईरान को दी गई वह प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) रद्द कर दी, जिसके तहत ईरान को अपना तेल बेचने की अनुमति मिली हुई थी।
- सैन्य तनाव और हवाई हमले
- अमेरिकी कार्रवाई: यूएस सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह को सुरक्षित करने के लिए ईरान के 80 से अधिक ठिकानों (वायु रक्षा प्रणाली, रडार साइट्स, एंटी-शिप मिसाइल और 60 से अधिक IRGC नौकाओं) पर सटीक हवाई हमले किए।
- ईरानी जवाबी कार्रवाई: अमेरिकी हमलों (जिसमें 8 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए) के जवाब में, ईरान ने फारस की खाड़ी में 85 अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाने का दावा किया है।
भारत का रुख (India’s Stance)
- भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है।
- भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों को तत्काल संवाद और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) का मार्ग अपनाना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Prelims Question)
प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) और अमेरिका-ईरान विवाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस विवाद का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक टैंकरों के सुरक्षित मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करना है।
- हालिया तनाव के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) को रद्द कर दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों व्याख्या: दिए गए गद्यांश के अनुसार दोनों कथन सत्य हैं। विवाद के मूल में होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण है और ओमान तट के पास तीन जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान की तेल बिक्री से जुड़ी प्रतिबंध छूट को वापस ले लिया है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Mains Question)
प्रश्न: “होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी एक गंभीर खतरा है।” इस कथन के आलोक में हालिया विवाद के मुख्य कारणों का विश्लेषण कीजिए। इस संकट पर भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही है? (250 शब्द)
दृष्टिकोण (Approach for Mains Answer):
- प्रस्तावना: हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच टूटे संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न हुए संकट का संक्षिप्त विवरण दें।
- मुख्य भाग 1 (विवाद के कारण): MoU का विफल होना, जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की होड़, ईरान द्वारा नए मार्ग का निर्धारण, वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और अमेरिका द्वारा प्रतिबंध छूट रद्द करने जैसे कारकों को स्पष्ट करें।
- मुख्य भाग 2 (वैश्विक व्यापार पर प्रभाव): होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक महत्ता (तेल व्यापार का चोकपॉइंट) और वहां अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करें।
- मुख्य भाग 3 (भारत की प्रतिक्रिया): भारत की चिंता (वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा) और भारत द्वारा ‘संवाद और कूटनीति’ के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान की अपील का वर्णन करें।
- निष्कर्ष: संयम बरतने की आवश्यकता और नियम-आधारित समुद्री व्यापार व्यवस्था को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए उत्तर समाप्त करें।
