निम्न-कार्बन भविष्य एवं खनन का विरोधाभास

Elements of Green Tech

जैसे-जैसे दुनिया 2050 तक ‘शुद्ध शून्य’ (Net-zero) भविष्य की ओर बढ़ रही है, एक विडंबना सामने आई है: “हरित” संक्रमण वर्तमान में वैश्विक खनन के सबसे बड़े चालकों में से एक है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बनाने के लिए पारंपरिक कार की तुलना में छह गुना अधिक खनिज इनपुट की आवश्यकता होती है, जो वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और स्थानीय पारिस्थितिक सुरक्षा के बीच एक बड़ा तनाव पैदा करता है।

खनन में स्थिरता के तीन ढांचे (Frameworks)

“सतत खनन” (Sustainable Mining) के अंतर्निहित विरोधाभास को दूर करने के लिए, नीति-निर्माता तीन अवधारणाओं का उपयोग करते हैं:

  1. कमजोर स्थिरता (Weak Sustainability): यह “पूंजी विनिमय” (Capital Exchange) मॉडल है। इसके अनुसार, खनन तब स्वीकार्य है जब निकाली गई प्राकृतिक पूंजी (Natural Capital) को मानव पूंजी (Human Capital) में बदल दिया जाए। उदाहरण के लिए: खनन रॉयल्टी का उपयोग स्कूल, अस्पताल और नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड बनाने के लिए करना जो खदान के बंद होने के बाद भी टिके रहें।
  2. सतत खनन (Sustainable Mining): यह चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) पर केंद्रित है। चूंकि खनिज सीमित हैं, इसलिए स्थिरता उन्हें अनिश्चित काल तक उपयोग में रखने से प्राप्त होती है। हालांकि, लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की वर्तमान वैश्विक रीसाइक्लिंग दर 5% से कम है, जिसका अर्थ है कि हम अभी भी केवल धरती से निकालने (Linear Extraction) के चरण में हैं।
  3. जिम्मेदार खनन (Responsible Mining): यह परिचालन पदचिह्न (Operational Footprint) पर केंद्रित है। इसमें ट्रकों के लिए ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ का उपयोग करना, खदानों को सौर/पवन ऊर्जा से चलाना और सोशल लाइसेंस टू ऑपरेट’ (स्थानीय समुदायों की सहमति और लाभ में हिस्सेदारी) हासिल करना शामिल है।

महत्वपूर्ण खनिज: “नया तेल” (The New Oil)

ऊर्जा संक्रमण ने दुनिया के रणनीतिक फोकस को जीवाश्म ईंधन से हटाकर विशिष्ट “महत्वपूर्ण खनिजों” (Critical Minerals) की ओर स्थानांतरित कर दिया है।

तकनीकप्रमुख खनिज आवश्यकताएंआवश्यकता क्यों है?
EV बैटरीलिथियम, कोबाल्ट, निकलउच्च ऊर्जा घनत्व और भंडारण के लिए।
पवन टरबाइनदुर्लभ मृदा तत्व (जैसे निओडिमियम)शक्तिशाली स्थायी चुंबकों के लिए।
सौर पैनलतांबा, सिलिकॉन, चांदीचालकता और फोटॉन अवशोषण के लिए।
पावर ग्रिडतांबा, एल्युमिनियमवैश्विक विद्युत ढांचे के विस्तार के लिए।

नैतिक और पारिस्थितिक दुविधा

  • सैक्रिफाइस ज़ोन (Sacrifice Zone): दक्षिण अमेरिका के “लिथियम ट्रायंगल” या कांगो (DRC) की कोबाल्ट खदानों जैसे क्षेत्रों को विकसित दुनिया के लिए “स्वच्छ” ऊर्जा प्रदान करने हेतु जल की कमी और मानवाधिकारों के हनन का सामना करना पड़ता है।
  • अपरिवर्तनीयता (Irreversibility): कोई भी “मानव पूंजी” (पैसा या शिक्षा) नष्ट हुए वर्षावन या ओपन-पिट माइनिंग के कारण खोई हुई विलुप्त प्रजातियों को वापस नहीं ला सकती है।
  • रीसाइक्लिंग अंतराल (Recycling Gap): जब तक लिथियम-आयन बैटरी के लिए रीसाइक्लिंग तकनीक परिपक्व नहीं होती, दुनिया प्राथमिक निष्कर्षण (धरती से खनन) पर निर्भर बनी रहेगी।

UPSC परिप्रेक्ष्य: शासन और पर्यावरण

1. GS पेपर 3 के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाएं

  • प्राकृतिक पूंजी लेखांकन (Natural Capital Accounting): किसी क्षेत्र में खनन का निर्णय लेने से पहले पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (जैसे स्वच्छ हवा/पानी) द्वारा प्रदान किए गए आर्थिक मूल्य को मापना।
  • जिला खनिज फाउंडेशन (DMF): यह एक भारतीय वैधानिक निकाय (MMDR अधिनियम के तहत) है जो प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए खनन निधि का उपयोग करके “कमजोर स्थिरता” को लागू करता है।
  • क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (Critical Minerals Mission): लिथियम (जम्मू-कश्मीर में पाया गया) और वैनेडियम जैसे खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने हेतु भारत की हालिया नीतिगत पहल।

UPSC अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा (PT) प्रश्न

प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सा ढांचा सुझाव देता है कि खनन को ‘सतत’ माना जा सकता है यदि उत्पन्न धन को शिक्षा और बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाए?

A) मजबूत स्थिरता (Strong Sustainability)

B) कमजोर स्थिरता (Weak Sustainability)

C) चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)

D) जिम्मेदार खनन (Responsible Mining)

उत्तर: B) कमजोर स्थिरता (Weak Sustainability)

मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न

प्रश्न: “निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था का मार्ग गहन खनिज निष्कर्षण से होकर गुजरता है।” ‘हरित खनन’ से जुड़ी पारिस्थितिक और नैतिक चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और एक चक्रीय खनिज अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

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