7 मई, 2026 को, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG), के. संजय मूर्ति ने 5वें ब्रिक्स सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान (BRICS SAI) नेताओं के शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। अपने संबोधन में, उन्होंने कहा कि CAG वर्तमान में 101 भारतीय शहरों का अपनी तरह का पहला ऑडिट कर रहा है, ताकि केवल वित्तीय अनुपालन से आगे बढ़कर नागरिकों के लिए वास्तविक ‘ईज ऑफ लिविंग’ (EoL) का मूल्यांकन किया जा सके।
ऑडिट के उद्देश्य और मानक
- बदलाव: केवल ‘आउटपुट’ (जैसे बिछाई गई सड़क के किलोमीटर, बने हुए मेट्रो स्टेशनों की संख्या) मापने के बजाय ‘आउटकम’ या परिणामों (जैसे क्या यात्रा के समय में कमी आई? क्या हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ? क्या सभी की समान पहुंच है?) के मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित करना।
- मूल्यांकन के मुख्य स्तंभ:
- जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life): स्वास्थ्य, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा।
- पहुंच (Access): आवश्यक सेवाओं और कार्यस्थलों तक पहुँचने में आसानी।
- स्थिरता (Sustainability): पर्यावरणीय प्रभाव और संसाधनों की दक्षता।
- अनुभव/धारणा (Perception): सरकारी सेवाओं पर नागरिकों की प्रतिक्रिया।
मल्टी-मोडल परिवहन और लॉजिस्टिक्स ऑडिट
CAG, IITs, IIMs और विश्व बैंक के साथ साझेदारी में विशेष रूप से ‘मल्टी-मोडल परिवहन’ और ‘फर्स्ट-माइल/लास्ट-माइल’ लॉजिस्टिक्स का ऑडिट कर रहा है।

- मल्टी-मोडल परिवहन (Multi-modal Transport): एक एकीकृत प्रणाली जिसमें परिवहन के दो या दो से अधिक साधनों (जैसे मेट्रो + बस + साइकिलिंग) का उपयोग एक ही टिकट या प्लेटफॉर्म के तहत एक सहज यात्रा के लिए किया जाता है।
- फर्स्ट-माइल/लास्ट-माइल कनेक्टिविटी:
- फर्स्ट-माइल: आपके घर से मास ट्रांजिट हब (जैसे मेट्रो स्टेशन तक पैदल चलना) तक की यात्रा।
- लास्ट-माइल: ट्रांजिट हब से गंतव्य तक का अंतिम चरण (जैसे स्टेशन से ऑफिस तक ई-रिक्शा)।
- समस्या: CAG ने नोट किया कि “ऐसी मेट्रो लाइनें जो बस नेटवर्क से नहीं जुड़तीं”, प्रणालियों (Systems) की विफलता को दर्शाती हैं, बुनियादी ढांचे की नहीं।
5वां ब्रिक्स SAI लीडर्स समिट 2026
- मेजबान: बेंगलुरु, भारत (2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान)।
- विषय (Theme): ‘शहरी गतिशीलता पर ध्यान केंद्रित करते हुए ईज ऑफ लिविंग’।
- मुख्य परिणाम: ‘बेंगलुरु घोषणा’ और ‘ब्रिक्स SAI कार्य योजना 2027-28’ को अपनाना।
- तकनीकी एकीकरण: CAG की ‘रणनीतिक योजना 2030′ शहरी परियोजनाओं के रीयल-टाइम ऑडिट के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर जोर देती है।
भारत में शहरी शासन का महत्व
| मानक (Metric) | डेटा बिंदु (Data Point) |
| आर्थिक योगदान | शहर 3% भूमि घेरते हैं लेकिन राष्ट्रीय GDP में 60% योगदान देते हैं। |
| रोजगार केंद्र | 2030 तक, भारत में सभी नई नौकरियों का 70% शहरों में सृजित होगा। |
| जनसांख्यिकीय बदलाव | 2050 तक, भारत की 50% से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। |
| आर्थिक नुकसान | वैश्विक ट्रैफिक जाम के कारण यात्रियों को सालाना 100-180 उत्पादक घंटों का नुकसान होता है। |
5-E फ्रेमवर्क
CAG ने स्थायी शहरी परिवर्तन के लिए प्रधानमंत्री के 5-E विजन पर प्रकाश डाला:
- Ease of Living (ईज ऑफ लिविंग): जीवन की गुणवत्ता और आराम।
- Education (शिक्षा): शिक्षण केंद्रों तक पहुंच।
- Employment (रोजगार): नौकरी के बाजारों से कनेक्टिविटी।
- Economy (अर्थव्यवस्था): लॉजिस्टिक्स और वाणिज्य में दक्षता।
- Entertainment (मनोरंजन): खुले स्थानों और संस्कृति तक पहुंच।
‘ईज ऑफ लिविंग’ (EoL) क्या है?
ईज ऑफ लिविंग एक मूल्यांकन उपकरण है जिसका उपयोग केवल भौतिक बुनियादी ढांचे के बजाय नागरिक-केंद्रित परिणामों के आधार पर शहरों में जीवन की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।
- परिभाषा: यह आउटपुट-आधारित शासन (जैसे “क्या फ्लाईओवर बनाया गया है?”) से आउटकम-आधारित शासन (जैसे “क्या फ्लाईओवर ने औसत यात्री के लिए यात्रा के समय को कम किया है?”) की ओर एक बदलाव है।
- मुख्य स्तंभ (आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय – MoHUA ढांचा):
- जीवन की गुणवत्ता: स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आवास।
- आर्थिक क्षमता: नौकरी के अवसर और आर्थिक विकास।
- स्थिरता: पर्यावरण, हरित क्षेत्र और अपशिष्ट प्रबंधन।
- नागरिक धारणा: नगरपालिका सेवाओं के संबंध में निवासियों की प्रतिक्रिया।
प्रमुख चुनौतियां
निवेश के बावजूद, “ईज ऑफ लिविंग” प्राप्त करने में महत्वपूर्ण बाधाएं हैं:
| चुनौती | विवरण |
| खंडित योजना (Fragmented Planning) | विभागों (जैसे सड़क प्राधिकरण बनाम मेट्रो प्राधिकरण) के बीच समन्वय की कमी के कारण परिवहन लिंक टूट जाते हैं। |
| फर्स्ट-माइल/लास्ट-माइल गैप | हाई-स्पीड ट्रांजिट मौजूद है, लेकिन नागरिक अपने घर और स्टेशन के बीच की छोटी दूरी को सुरक्षित या किफायती तरीके से तय करने में संघर्ष करते हैं। |
| डेटा की अशुद्धता | पारंपरिक ऑडिट अक्सर “जमीनी हकीकत” को याद कर देते हैं क्योंकि वे रीयल-टाइम अनुभव के बजाय कागजी कार्रवाई पर निर्भर होते हैं। |
| तीव्र शहरीकरण | बुनियादी ढांचे का विकास अक्सर शहरी केंद्रों में लोगों के भारी आगमन के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहता है। |
| पर्यावरणीय तनाव | शहरी बाढ़ और ‘हीट आइलैंड’ आर्थिक रूप से समृद्ध शहरों के ‘लिवेबिलिटी’ (रहने योग्य) सूचकांक को भी कम कर देते हैं। |
आगे की राह
- मल्टी-मोडल एकीकरण: बसों, मेट्रो और पैरा-ट्रांजिट (ई-रिक्शा) के बीच एक एकीकृत टिकटिंग प्रणाली और भौतिक कनेक्टिविटी विकसित करना।
- डेटा-संचालित ऑडिटिंग: शहरी परियोजनाओं को ट्रैक करने के लिए AI, GIS मैपिंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करना।
- ULBs को मजबूत करना: स्थानीय लॉजिस्टिक्स को संभालने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अधिक वित्तीय स्वायत्तता और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ सशक्त बनाना।
- गैर-मोटर चालित परिवहन (NMT): लास्ट-माइल गैप को पाटने के लिए पैदल पथ और साइकिलिंग लेन को प्राथमिकता देना।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा (PT) / वस्तुनिष्ठ
प्रश्न 1. 5वें ब्रिक्स सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान (SAI) नेताओं के शिखर सम्मेलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसकी मेजबानी भारत द्वारा 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत बेंगलुरु में की गई थी।
- शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय ‘डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन’ था।
- शिखर सम्मेलन ‘बेंगलुरु घोषणा’ को अपनाने के साथ संपन्न हुआ।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, और 3
उत्तर: (b) केवल 1 और 3
मुख्य परीक्षा / विषयपरक
प्रश्न 1. “शहरी गतिशीलता वह जगह है जहाँ शासन अमूर्त होना बंद हो जाता है और व्यक्तिगत हो जाता है।” इस कथन के आलोक में, भारतीय शहरों में ईज ऑफ लिविंग में सुधार करने में परिणाम-उन्मुख ऑडिटिंग (Outcome-oriented auditing) की भूमिका पर चर्चा करें। (250 शब्द, 15 अंक)
