हिंद महासागर के समुद्री चोकपॉइंट्स की भू-राजनीति

हिन्द महासागर के जलडमरूमध्य

हाल ही में, ईरान की संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही की निगरानी और टोल वसूलने के लिए एक नई ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ (PGSA) के प्रबंधन के तहत एक “पेशेवर तंत्र” की घोषणा की है। वहीं, इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने का विचार रखा था, हालांकि बाद में उसने अंतरराष्ट्रीय नौवहन स्वतंत्रता कानूनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

संदर्भ: हिंद महासागर की “बंद” प्रकृति

अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के विपरीत, हिंद महासागर भौगोलिक रूप से एक “बंद” महासागर है। इसके जल तक पहुंच कुछ संकीर्ण जलडमरूमध्य (Straits) द्वारा नियंत्रित होती है।

  • वैश्विक केंद्र: हिंद महासागर वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 30%, दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 80% संभालता है और यहां सालाना लगभग 100,000 जहाज गुजरते हैं।
  • अकिलीज़ हील (कमजोरी): चूंकि वैश्विक व्यापारिक मार्ग इन संकीर्ण भौगोलिक बाधाओं (Chokepoints) पर मिलते हैं, इसलिए इन स्थानों पर कोई भी भू-राजनीतिक अस्थिरता, टोल लगाने या नाकेबंदी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पंगु बना सकती है और गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।

हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स

1. होर्मुज जलडमरूमध्य (फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार)

  • स्थान: फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
  • रणनीतिक मूल्य: यह वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति के पांचवें हिस्से के लिए एकमात्र समुद्री प्रवेश द्वार है।
  • वर्तमान खतरा: PGSA की स्थापना और टोल प्रणाली से ईरान अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य पर संप्रभु नियंत्रण का प्रयोग कर रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा है।

2. बाब-अल-मंडेब (“आंसुओं का द्वार”)

  • स्थान: अरब प्रायद्वीप (यमन) और हॉर्न ऑफ अफ्रीका (जिबूती/इरिट्रिया) के बीच स्थित है। यह लाल सागर और स्वेज नहर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है।
  • रणनीतिक मूल्य: यह एशिया को यूरोप से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पश्चिमी द्वार है।
  • वर्तमान खतरा: यह अक्सर चर्चा में रहता है। 2023-2024 के गाजा संघर्ष के दौरान यमन के हूती उग्रवादियों ने यातायात बाधित किया था।
  • विकल्प और लागत: एकमात्र विकल्प ‘केप ऑफ गुड होप’ (अफ्रीका का दक्षिणी सिरा) है, जिसमें 10-14 दिन का अतिरिक्त समय और लगभग $2 मिलियन अतिरिक्त खर्च आता है।

3. मलक्का जलडमरूमध्य (“गूजबेरी जलडमरूमध्य”)

  • स्थान: मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच। यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ता है।
  • रणनीतिक मूल्य: वैश्विक समुद्री व्यापार का 24% और तेल शिपमेंट का 45% यहीं से गुजरता है।
  • “मलक्का दुविधा” (Malacca Dilemma): चीन के 75% आयातित तेल का मार्ग यहीं से गुजरता है, जो इसे चीन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनाता है।

चीन की ‘मलक्का दुविधा’ (Malacca Dilemma)

मलक्का जलडमरूमध्य, हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला सबसे छोटा समुद्री मार्ग है। चीन के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक कमजोरी है, जिसे ‘मलक्का दुविधा’ कहा जाता है। इसके मुख्य कारण हैं:

  • अत्यधिक ऊर्जा निर्भरता: चीन अपनी समुद्री तेल जरूरतों का लगभग 80% इसी मार्ग से आयात करता है। किसी भी नाकेबंदी से चीन की अर्थव्यवस्था और सैन्य तंत्र ठप हो सकता है।
  • भौगोलिक संकीर्णता: फिलिप्स चैनल पर इसकी चौड़ाई मात्र 1.7 मील है, जिससे यहाँ निगरानी या नाकेबंदी करना बेहद आसान है।
  • पश्चिमी देशों का प्रभुत्व: बीजिंग को डर है कि ताइवान या दक्षिण चीन सागर में संघर्ष की स्थिति में, अमेरिकी नौसेना अपने सहयोगियों (जैसे इंडोनेशिया) के साथ मिलकर इस मार्ग को बंद कर सकती है।
  • भारत का कारक: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर भारत की बढ़ती सैन्य उपस्थिति उसे ‘सी डिनायल’ (sea denial) की क्षमता प्रदान करती है, जिससे संकट के समय चीन के यातायात को नियंत्रित करना भारत के लिए आसान है।

इस समस्या को हल करने के लिए चीन की रणनीतियां

  1. ओवरलैंड कॉरिडोर और पाइपलाइन (BRI): चीन ‘लैंड ब्रिज’ बना रहा है ताकि मलक्का को पूरी तरह से बायपास किया जा सके:
    • CMEC (चीन-म्यांमार): म्यांमार के क्याउकफ्यू (Kyaukpyu) बंदरगाह से युन्नान तक पाइपलाइन।
    • CPEC (चीन-पाकिस्तान): ग्वादर बंदरगाह को सड़क और पाइपलाइन से शिनजियांग से जोड़ना।
    • रूस और मध्य एशिया: उत्तर और पश्चिम से जमीनी ऊर्जा आयात में विविधता लाना।
  2. वैकल्पिक समुद्री मार्ग:
    • पोलर सिल्क रोड: आर्कटिक मार्ग का उपयोग करना।
    • थाईलैंड लैंड ब्रिज: अंडमान सागर और थाईलैंड की खाड़ी को जोड़ने वाली 90 किमी की परियोजना।
    • सुंडा और लोम्बोक जलडमरूमध्य: मलक्का बंद होने की स्थिति में इंडोनेशिया के अन्य रास्तों का विकल्प।
  3. नौसैनिक आधुनिकीकरण (String of Pearls): अपनी नौसेना को मजबूत करना और हिंद महासागर में जिबूती, हंबनटोटा (श्रीलंका) जैसे बंदरगाहों के माध्यम से ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ बनाना ताकि समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) की सुरक्षा की जा सके।
  4. घरेलू ऊर्जा परिवर्तन: आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और भारी मात्रा में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का निर्माण करना।

भारत के लिए निहितार्थ

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपना 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। किसी भी तरह की नाकेबंदी भारत के आयात बिल को बढ़ाती है और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ाती है।
  • व्यापार प्रतिस्पर्धा: बाब-अल-मंडेब में व्यवधान भारतीय निर्यातकों को केप ऑफ गुड होप का उपयोग करने के लिए मजबूर करता है, जिससे भारतीय वस्तुओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता घट जाती है।
  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी: मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति और आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • नौसेना कूटनीति और सागर (SAGAR): भारत को इन चोकपॉइंट्स पर अपनी नौसैनिक उपस्थिति मजबूत करनी चाहिए और ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन’ (SAGAR) विजन के तहत तटीय देशों के साथ रक्षा सहयोग गहरा करना चाहिए।
  • वैकल्पिक गलियारे: अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को जल्द चालू करना ताकि समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR): होर्मुज जलडमरूमध्य में अचानक किसी व्यवधान से बचने के लिए भारत को अपनी SPR क्षमता का आक्रामक विस्तार करना चाहिए।

अभ्यास प्रश्न

1. प्रारंभिक परीक्षा (PT) प्रश्न

Q. निम्नलिखित युग्मों पर विचार करें:

  1. बाब-अल-मंडेब: लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है।
  2. होर्मुज जलडमरूमध्य: फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
  3. मलक्का जलडमरूमध्य: अंडमान सागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। उपरोक्त में से कौन से सही सुमेलित हैं? (a) 1 और 2 (b) 2 और 3 (c) 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 उत्तर: (d) सभी सही हैं।

2. मुख्य परीक्षा प्रश्न

Q. “हिंद महासागर के समुद्री चोकपॉइंट्स वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा की अकिलीज़ हील हैं।” होर्मुज और बाब-अल-मंडेब में हालिया भू-राजनीतिक व्यवधानों के आलोक में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष उत्पन्न रणनीतिक कमजोरियों का मूल्यांकन करें। भारत को अपने समुद्री और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किन उपायों को अपनाना चाहिए? (250 शब्द, 15 अंक)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *