आज, 22 मई को विश्व स्तर पर ‘अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ (International Day for Biological Diversity) मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस वर्ष का विषय “Acting locally for global impact” (वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य) है, जो यह रेखांकित करता है कि जैव विविधता के नुकसान को रोकने के लिए सामुदायिक स्तर पर की गई पहल ही सबसे प्रभावी है। इस संदर्भ में, ओडिशा के आदिवासी समुदायों द्वारा अपनाई जा रही बीज संरक्षण पद्धतियां आज वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं।
ओडिशा का बीज संरक्षण मॉडल
ओडिशा के वर्षा-सिंचित क्षेत्रों में आदिवासी (Adivasi) किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी पारंपरिक बीजों और खेती की तकनीकों को संरक्षित कर रहे हैं। यहाँ महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है:
- महिला बीज संरक्षक: ये महिलाएं पारंपरिक फसलों का रखरखाव करती हैं, जो वहां की विशिष्ट मिट्टी और अनियमित वर्षा के अनुकूल होती हैं।
- सामुदायिक बीज बैंक (Community Seed Banks): पूर्वी घाट के कोंध (Kondh) और पराजा (Paraja) जनजातीय समुदायों की महिलाएं इन बैंकों का नेतृत्व करती हैं। ये बैंक मुख्य रूप से बाजरा (Millets), दालों और पहाड़ी धान की किस्मों की आनुवंशिक विविधता को सुरक्षित रखते हैं।
संस्थागत और परियोजना समर्थन
- DIVERSIFARM-India: फ्रिडटजॉफ नैनसेन इंस्टीट्यूट और एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की यह पहल छोटे किसानों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका को मजबूत करने का काम कर रही है।
- श्री अन्न अभियान: इसके माध्यम से ओडिशा के 30 जिलों में फसलों की लचीली किस्मों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए हैं।
बाजरा (Millets): जलवायु-अनुकूल कृषि का आधार
बाजरा (रागी, ज्वार, बाजरा) कम पानी वाली, अर्ध-शुष्क और वर्षा-सिंचित क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त फसल है।
- जलवायु लचीलापन: गेहूं या चावल की तुलना में इन्हें बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे ये सूखे के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।
- अनुकूलन: किसान फसल कटाई के बाद बीजों का चयन बहुत सावधानी से करते हैं ताकि फसलें स्थानीय जलवायु के तनाव के अनुसार खुद को ढाल सकें।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा (PT) प्रश्न
Q. जैव विविधता संरक्षण और भारत की पारंपरिक कृषि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस प्रतिवर्ष 1992 के पृथ्वी शिखर सम्मेलन में ‘जैव विविधता पर कन्वेंशन’ (CBD) को अपनाने की याद में मनाया जाता है।
- ओडिशा के पूर्वी घाट में कोंध और पराजा जनजातीय समुदाय मुख्य रूप से आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) नकदी फसलों को संरक्षित करने के लिए सामुदायिक बीज बैंक चलाते हैं।
- धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में बाजरा (Millets) की खेती के लिए काफी अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 (व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि समुदाय पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करते हैं न कि GM फसलों को। कथन 3 गलत है क्योंकि बाजरा को कम पानी की आवश्यकता होती है।)
मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न
Q. “अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का 2026 का विषय—’वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य’—भारत की स्वदेशी कृषि प्रणालियों में व्यावहारिक अनुप्रयोग ढूंढता है।” चर्चा करें कि ओडिशा जैसे राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाला बीज संरक्षण और बाजरा की खेती कैसे जलवायु-अनुकूल कृषि और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों में योगदान करती है। (150 शब्द, 10 अंक)
