हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस इकाई (Counter-Intelligence Unit) ने ‘समग्र शिक्षा योजना’ (Samagra Shiksha Scheme) के तहत स्कूली बच्चों के लिए “अलगाववाद समर्थक” (Pro-separatist) किताबें छापने और वितरित करने के आरोप में तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया है। इन पर नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आतंकवाद निरोधी कानून गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मुख्य बिंदु
- शिक्षा का शस्त्रीकरण (Weaponization of Education): पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से स्कूली बच्चों के मस्तिष्कों में अलगाववादी विचारधारा और कट्टरपंथ (Radicalization) के बीज बोने का प्रयास किया जा रहा था, जो कि एक खतरनाक वैचारिक युद्ध है।
- सरकारी तंत्र व निधियों का दुरुपयोग: राष्ट्र विरोधी नैरेटिव (Narrative) फैलाने के लिए भारत सरकार की प्रमुख ‘समग्र शिक्षा योजना’ और उसके तहत आवंटित की जाने वाली निधियों (Funds) का सीधा दुरुपयोग किया गया है।
- निगरानी तंत्र की विफलता: सरकारी योजना के तहत ऐसी सामग्री का छपना और वितरित होना राज्य के शिक्षा विभाग, निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) और सामग्री ऑडिट (Content Audit) में एक बड़ी चूक को उजागर करता है।
- दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक युद्ध: यह घटना केवल एक सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि युवाओं को मुख्यधारा से अलग करने, संस्थानों के प्रति अविश्वास जगाने और मनोवैज्ञानिक अलगाव (Psychological alienation) पैदा करने के एक दीर्घकालिक षड्यंत्र का हिस्सा है।
विधिक और संस्थागत ढांचा (Legal and Institutional Framework)
- गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA): यह भारत का मुख्य आतंकवाद निरोधी कानून है। इसका उपयोग राज्य के खिलाफ असंतोष भड़काने, अलगाववाद का समर्थन करने और संप्रभुता को चुनौती देने वाली गतिविधियों को दंडित करने के लिए किया जाता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की भूमिका: पुराने राजद्रोह कानून की जगह आए इस नए आपराधिक कानून में ‘राज्य के खिलाफ अपराधों’ के तहत भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए बेहद सख्त दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।
- समग्र शिक्षा अभियान का स्वरूप: यह प्री-स्कूल (Pre-school) से लेकर 12वीं कक्षा तक की स्कूली शिक्षा को कवर करने वाली एक एकीकृत और केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका उद्देश्य समान और समावेशी शिक्षा प्रदान करना है।
- वित्तीय सहायता का स्वरूप: इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को पाठ्यपुस्तकों, स्कूल ड्रेस और अन्य शिक्षण सामग्री के विकास व वितरण के लिए वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाता है।
भविष्य के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम (Necessary Corrective Measures)
- स्वतंत्र ‘कंटेंट ऑडिट कमेटी’ का गठन: राज्य के शिक्षा विभाग में एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समिति स्थापित की जानी चाहिए जो किसी भी पाठ्यपुस्तक या शिक्षण सामग्री की छपाई से पूर्व उसका गहन राष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता ऑडिट करे।
- खुफिया तंत्र और शिक्षा विभाग में समन्वय: राज्य शिक्षा बोर्डों और निजी प्रकाशन गृहों के बीच किसी भी संभावित नेक्सस (Nexus) को तोड़ने के लिए काउंटर-इंटेलिजेंस एजेंसियों और शिक्षा विभाग के बीच निरंतर सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।
- कठोर वित्तीय ट्रैकिंग (Strict Financial Tracking): समग्र शिक्षा योजना या अन्य किसी भी सरकारी योजना से जारी होने वाले फंड के उपयोग की कड़ी ट्रैकिंग और सख्त ऑडिट व्यवस्था लागू की जाए ताकि सरकारी पैसे का उपयोग राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में न हो सके।
- मूल्य आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन: स्कूलों के पाठ्यक्रम में राष्ट्र-निर्माण, संवैधानिक मूल्यों और अखंडता को बढ़ावा देने वाले विषयों को विशेष प्राथमिकता दी जाए ताकि छात्रों को ‘सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन’ (Soft Radicalization) से सुरक्षित रखा जा सके।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Prelims Question)
प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ‘समग्र शिक्षा योजना’ केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (कक्षा 1 से 8 तक) शिक्षा के लिए केंद्र प्रायोजित एक एकीकृत योजना है।
- गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत केवल भारतीय नागरिकों पर मुकदमा चलाया जा सकता है, विदेशी नागरिकों पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (d) न तो 1 और न ही 2
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: समग्र शिक्षा योजना केवल कक्षा 1 से 8 तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘प्री-स्कूल से लेकर 12वीं कक्षा’ तक की स्कूली शिक्षा को कवर करने वाली एक व्यापक योजना है।
- कथन 2 गलत है: UAPA के प्रावधान भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। भले ही अपराध भारत के बाहर किया गया हो, इस कानून के तहत विदेशी नागरिकों को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Mains Question)
प्रश्न: “शिक्षा प्रणाली में कट्टरवाद और अलगाववादी विचारधारा का प्रवेश किसी भी राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक अदृश्य परंतु गंभीर खतरा है।” जम्मू-कश्मीर के हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, सरकारी शिक्षा योजनाओं के ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए संस्थागत उपाय सुझाइए। (250 शब्द)
दृष्टिकोण (Approach for Mains Answer):
- प्रस्तावना (Introduction): जम्मू-कश्मीर में ‘समग्र शिक्षा योजना’ के तहत अलगाववादी सामग्री छापने वाले प्रकाशकों की हालिया गिरफ्तारी का संदर्भ देते हुए उत्तर की शुरुआत करें। बताएं कि कैसे यह ‘सॉफ्ट रेडिकलाइजेशन’ (Soft Radicalization) का एक रूप है।
- मुख्य भाग 1 (आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा):
- युवा मस्तिष्कों का ब्रेनवॉश करना और मनोवैज्ञानिक अलगाव (Psychological alienation) पैदा करना।
- राज्य के संस्थानों के प्रति अविश्वास पैदा करना।
- भविष्य के लिए स्लीपर सेल (Sleeper cells) और छद्म-युद्ध (Proxy war) के लिए वैचारिक जमीन तैयार करना।
- मुख्य भाग 2 (संस्थागत उपाय/समाधान):
- कड़ी निगरानी (Strict Monitoring): शिक्षा विभाग में एक स्वतंत्र ‘कंटेंट ऑडिट कमेटी’ (Content Audit Committee) की स्थापना जो यह सुनिश्चित करे कि कोई भी सामग्री राष्ट्रीय हितों के खिलाफ न हो।
- खुफिया तंत्र की सक्रियता: राज्य शिक्षा बोर्डों और प्रकाशन गृहों के बीच नेक्सस (Nexus) को तोड़ने के लिए काउंटर-इंटेलिजेंस और शिक्षा विभागों के बीच समन्वय।
- वित्तीय ऑडिट: सरकारी निधियों (Funds) के उपयोग की कड़ी ट्रैकिंग (Tracking) करना।
- निष्कर्ष (Conclusion): स्पष्ट करें कि आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वैचारिक मोर्चे पर भी लड़ी जानी चाहिए। राष्ट्रीय मूल्य आधारित शिक्षा (Value-based education) के महत्व पर जोर देते हुए उत्तर समाप्त करें।
