व्यक्तित्व अधिकारों का संरक्षण

व्यक्तित्व अधिकार

8 मई, 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय प्रदान के हुए, संसद सदस्य शशि थरूर के व्यक्तित्व अधिकारों” (Personality Rights) को संरक्षित किया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने उनकी छवि, आवाज और विशिष्ट भाषण शैली के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगा दी, जिससे सार्वजनिक हस्तियों के व्यक्तित्व से जुड़ी कानूनी सीमाओं को और मजबूती मिली है।

व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं?

व्यक्तित्व अधिकार, जिन्हें अक्सर पब्लिसिटी राइट्स (Publicity Rights) भी कहा जाता है, किसी व्यक्ति के अपनी पहचान (जैसे नाम, छवि, समानता या अन्य विशिष्ट पहचानकर्ता) के व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने के अधिकार को कहते हैं।

  • निजता का अधिकार (Right to Privacy): अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत संरक्षित, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना चित्रित न किया जाए।
  • प्रचार का अधिकार (Right to Publicity): अपनी पहचान के व्यावसायिक मूल्य को स्वयं तक सीमित रखने का अधिकार।

इस निर्णय में संरक्षित प्रमुख पहलू:

  • दृश्य समानता और छवि।
  • विशिष्ट आवाज।
  • हस्ताक्षर भाषण शैली (बोलने का तरीका)।
  • अत्यधिक परिष्कृत शब्दावली (अद्वितीय भाषाई शैली)।

भारत में कानूनी ढांचा

पश्चिमी देशों के विपरीत, भारत में व्यक्तित्व अधिकारों के लिए कोई विशिष्ट कानून नहीं है। इसके बजाय, इन्हें निम्नलिखित के माध्यम से मान्यता दी जाती है:

कानूनी आधारविवरण
अनुच्छेद 21निजता का मौलिक अधिकार (जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामला)।
कॉमन लॉ (Common Law)“पासिंग ऑफ” (Passing Off) का सिद्धांत—किसी को अपने माल/सेवाओं को किसी और के रूप में प्रस्तुत करने से रोकना।
IPR कानूनकॉपीराइट अधिनियम (1957) और ट्रेडमार्क अधिनियम (1999) के तत्व हस्ताक्षरों और विशिष्ट प्रदर्शनों पर लागू होते हैं।
न्यायिक मिसालेंअदालतों ने पहले भी अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ जैसे अभिनेताओं को व्यावसायिक लाभ के लिए AI-जनित सामग्री और नकल से सुरक्षा दी है।

सामरिक महत्व और AI संदर्भ

  • डीपफेक” की चुनौती: यह फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में विशेष रूप से प्रासंगिक है। AI अब आवाजें क्लोन कर सकता है और “डीपफेक” वीडियो बना सकता है। “विशिष्ट आवाज” और “बोलने के तरीके” की सुरक्षा डिजिटल दुरुपयोग के खिलाफ एक कानूनी ढाल प्रदान करती है।
  • व्यावसायिक बनाम गैर-व्यावसायिक उपयोग: जबकि व्यंग्य (Satire) या समाचार रिपोर्टिंग के लिए नकल को अक्सर “उचित उपयोग” (अनुच्छेद 19 – भाषण की स्वतंत्रता) के तहत संरक्षित किया जाता है, अदालत तब हस्तक्षेप करती है जब इन गुणों का उपयोग व्यावसायिक शोषण या जनता को गुमराह करने के लिए किया जाता है।
  • बौद्धिक लक्षणों की मान्यता: “परिष्कृत शब्दावली” की रक्षा करके, अदालत ने व्यक्तित्व अधिकारों के दायरे को शारीरिक बनावट से बढ़ाकर बौद्धिक और व्यवहारिक लक्षणों तक विस्तृत कर दिया है।

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा (PT) प्रश्न

Q1. भारत में ‘व्यक्तित्व अधिकारों’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. व्यक्तित्व अधिकारों को भारत में एक समर्पित केंद्रीय कानून के तहत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
  2. ये अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का विस्तार हैं।
  3. इन अधिकारों के तहत केवल एक सार्वजनिक हस्ती की दृश्य छवि और नाम ही संरक्षित हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2

B) केवल 2

C) केवल 2 और 3

D) 1, 2, और 3

उत्तर: B) केवल 2 (कथन 1 गलत है क्योंकि कोई विशिष्ट कानून नहीं है; कथन 3 गलत है क्योंकि अधिकार आवाज, व्यवहार और शब्दावली तक विस्तृत हैं)।


मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

Q2. “AI-जनित डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग की विशेषता वाला डिजिटल युग, सार्वजनिक हस्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।” हाल के न्यायिक हस्तक्षेपों के आलोक में, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ संतुलन बनाते हुए भारत में व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए एक विशिष्ट विधायी ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा करें। (250 शब्द)

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