स्कूल शासन का विकेंद्रीकरण: SMCs के लिए नए दिशानिर्देश

केन्द्रीय विद्यालय

शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल शासन के विकेंद्रीकरण के लिए स्कूल प्रबंधन समितियों (School Management Committees – SMCs) के गठन को अनिवार्य करते हुए नए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप हैं और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम और समग्र शिक्षा अभियान के तहत पिछले सभी निर्देशों का स्थान लेंगे।

नए दिशानिर्देशों के मुख्य प्रावधान

A. एकीकृत ढांचा और दायरा

  • उच्च कक्षाओं तक विस्तार: SMC का अधिदेश अब कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों (माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक संस्थानों) को कवर करता है। इससे पहले RTE अधिनियम के तहत, SMC मुख्य रूप से प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 8 तक) पर केंद्रित थीं।
  • SMDCs का प्रतिस्थापन: नई SMCs मौजूदा ‘स्कूल प्रबंधन विकास समितियों’ (SMDCs) का स्थान लेंगी ताकि स्कूल नेतृत्व के लिए एक एकल, एकीकृत और सुव्यवस्थित दृष्टिकोण बनाया जा सके।
  • समय सीमा: प्रत्येक स्कूल को शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के एक महीने के भीतर अपनी SMC का गठन करना होगा।

B. लोकतांत्रिक और समावेशी संरचना शिक्षा को एक “साझा जिम्मेदारी” बनाने के लिए SMC की संरचना को कड़ाई से परिभाषित किया गया है:

  • अभिभावक/संरक्षक: समिति के 75% सदस्य अनिवार्य रूप से अभिभावक होने चाहिए।
  • महिला प्रतिनिधित्व: समिति में कम से कम 50% महिलाएं होनी चाहिए।
  • अन्य हितधारक (25%): इसमें निर्वाचित स्थानीय प्रतिनिधि, शिक्षक, पूर्व छात्र और स्थानीय विशेषज्ञ (जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और शिक्षाविद) शामिल होंगे।
  • सामाजिक समावेशन: सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs), जिनमें SC, ST, OBC और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CwSN) शामिल हैं, का आनुपातिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य है।

C. बढ़ी हुई वित्तीय स्वायत्तता और परिचालन शक्तियां SMC अब केवल एक सलाहकार निकाय नहीं है; इसके पास महत्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियां हैं:

  • निर्माण कार्य (Civil Works): समितियां ₹30 लाख तक की लागत वाले स्कूल निर्माण कार्यों को स्वतंत्र रूप से निष्पादित करने के लिए अधिकृत हैं।
  • सार्वजनिक निविदा: ₹30 लाख से अधिक की परियोजनाओं के लिए, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए SMC सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया (CPWD/PWD नियमावली के अनुसार) में भाग लेंगी।
  • वित्तीय निगरानी: स्कूल के बजट की समीक्षा करना, वित्तीय अनियमितताओं को रोकना और प्राप्तियों एवं व्यय का सटीक रिकॉर्ड बनाए रखना।

D. मुख्य जिम्मेदारियां

  • मुख्यधारा में लाना: स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान करना और उन्हें औपचारिक शिक्षा प्रणाली में वापस लाने के लिए सामुदायिक अभियान का नेतृत्व करना।
  • संसाधन वितरण: छात्रों के हक (Entitlements) जैसे वर्दी, पाठ्यपुस्तकें और छात्रवृत्ति का समय पर और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करना।

इस कदम का महत्व

  1. वास्तविक विकेंद्रीकरण: यह शक्ति को राज्य/जिला नौकरशाही से सीधे समुदाय को हस्तांतरित करता है, जिससे शासन ‘नीचे से ऊपर’ (Bottom-up) और स्थानीय संदर्भ के अनुकूल बनता है।
  2. पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): 75% अभिभावक प्रतिनिधित्व और बजट पर सीधे नियंत्रण के साथ, SMC सामाजिक ऑडिट के लिए एक अंतर्निहित तंत्र के रूप में कार्य करती हैं, जिससे धन की बर्बादी/लीकेज कम होती है।
  3. सेवाओं का अभिसरण (Convergence): आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को शामिल करने से स्कूल स्तर पर प्रारंभिक बचपन की देखभाल, स्वास्थ्य और शिक्षा का एकीकरण होता है।

संभावित चुनौतियां

  • क्षमता की कमी: कई अभिभावकों, विशेष रूप से ग्रामीण या हाशिए के क्षेत्रों में, ₹30 लाख तक के बजट का प्रबंधन करने या निर्माण कार्यों को संभालने के लिए आवश्यक वित्तीय साक्षरता की कमी हो सकती है।
  • अभिजात वर्ग का कब्जा (Elite Capture): इस बात का जोखिम है कि 25% कोटे के भीतर प्रभावशाली व्यक्ति या स्थानीय राजनेता निर्णय लेने की प्रक्रिया पर हावी हो सकते हैं, जिससे वंचित अभिभावकों की आवाज़ दब सकती है।

UPSC अभ्यास प्रश्न

भाग 1: प्रारंभिक परीक्षा (वस्तुनिष्ठ)

Q1. शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के लिए जारी नए दिशानिर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार SMC बनाने का अधिदेश केवल प्रारंभिक स्कूलों (कक्षा 8 तक) तक सीमित है।
  2. SMC के कम से कम 75% सदस्य छात्रों के माता-पिता या अभिभावक होने चाहिए।
  3. SMCs को मानक सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया से गुजरे बिना ₹30 लाख तक की लागत वाले सभी स्कूल निर्माण कार्यों को निष्पादित करने का अधिकार है।

उपरोक्त कथनों में से कौन से सही हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2, और 3

उत्तर: (b) केवल 2 और 3 (व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि नए दिशानिर्देशों में इसे कक्षा 12 तक बढ़ा दिया गया है।)

भाग 2: मुख्य परीक्षा (वर्णनात्मक)

प्रश्न: “सामुदायिक भागीदारी सफल शैक्षिक सुधारों का आधार है।” विश्लेषण कीजिए कि कैसे NEP 2020 के तहत स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के नए दिशानिर्देश स्कूल शासन को विकेंद्रीकृत करने का लक्ष्य रखते हैं और उनके प्रभावी कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ क्या हैं? (15 अंक, 250 शब्द)

उत्तर के लिए मॉडल संरचना:

  • प्रस्तावना: NEP 2020 के अनुरूप SMCs को पुनर्गठित करने के हालिया दिशानिर्देशों का उल्लेख करें। शिक्षा को “साझा जिम्मेदारी” के रूप में परिभाषित करें।
  • मुख्य भाग 1 (विकेंद्रीकरण के तंत्र): कक्षा 12 तक विस्तार, लोकतांत्रिक संरचना (75% अभिभावक, 50% महिलाएं), और ₹30 लाख तक के कार्यों के लिए वित्तीय सशक्तिकरण।
  • मुख्य भाग 2 (महत्व/प्रभाव): स्थानीय सामाजिक ऑडिट, लर्निंग आउटकम में सुधार और स्वास्थ्य-शिक्षा का एकीकरण।
  • मुख्य भाग 3 (चुनौतियां): तकनीकी/वित्तीय साक्षरता की कमी, ‘एलीट कैप्चर’ का जोखिम और दिहाड़ी मजदूरों के पास समय का अभाव।
  • निष्कर्ष: संरचनात्मक सशक्तिकरण के साथ-साथ SMC सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *