केंद्रीय कैबिनेट ने अगले पांच वर्षों (2026-27 से 2030-31) में कपास कपड़ा मूल्य श्रृंखला (textile value chain) को पुनर्जीवित करने के लिए ₹5,659.22 करोड़ के परिव्यय के साथ एक समर्पित “कपास उत्पादकता मिशन” को मंजूरी दी है।
उद्देश्य और रणनीति
- उत्पादकता पर ध्यान (Targeting Productivity): भारतीय कपास की पैदावार (yield) में हालिया ठहराव को दूर करना, जो वर्तमान में वैश्विक औसत से नीचे बनी हुई है।
- गुणवत्ता संबंधी चिंताएं: संदूषण (contamination) को कम करने और वैश्विक कपड़ा मानकों को पूरा करने के लिए भारतीय कपास की ‘स्टेपल लंबाई’ (staple length) में सुधार के उपाय लागू करना।
- तकनीकी हस्तक्षेप (Technological Intervention):
- हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) को बढ़ावा देना।
- श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए मैकेनिकल हार्वेस्टिंग (यांत्रिक कटाई) का समर्थन।
- गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को बढ़ाना।
- बाधाओं को दूर करना (Bottleneck Removal): ‘फार्म टू फाइबर’ (Farm to Fiber) के सफर में आने वाली लॉजिस्टिक और प्रसंस्करण संबंधी समस्याओं का समाधान करना।
भारत में कपास की स्थिति
- भारत दुनिया में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक है और कपास की खेती के तहत सबसे बड़ा क्षेत्र भारत में ही है।
- प्रमुख मुद्दे: मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, पिंक बोलवॉर्म (Pink Bollworm) जैसे कीटों के प्रति संवेदनशीलता, और यंत्रीकृत कटाई (mechanized harvesting) का अभाव।
एकीकृत कीट प्रबंधन
एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) एक पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य कीटों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उन्हें इस स्तर तक नियंत्रित करना है जहाँ वे फसल को आर्थिक नुकसान न पहुँचा सकें।
IPM के मुख्य सिद्धांत
IPM के चार बुनियादी स्तंभ होते हैं:
- कीट की पहचान: सभी कीड़े हानिकारक नहीं होते। पहले यह पहचानना जरूरी है कि कौन सा कीट शत्रु है और कौन सा मित्र (जैसे लेडीबग या मकड़ी)।
- निगरानी (Monitoring): खेत का नियमित निरीक्षण करना ताकि कीटों की संख्या और उनके विकास के चरणों का पता चल सके।
- आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level – ETL): रसायनों का उपयोग तब तक नहीं किया जाता जब तक कीटों की संख्या उस स्तर को पार न कर जाए जहाँ फसल का नुकसान उनके नियंत्रण की लागत से अधिक हो।
- निवारक उपाय: कीटों को पैदा होने से रोकने के लिए कृषि पद्धतियों में बदलाव लाना।
कीट नियंत्रण की विधियाँ
IPM में नियंत्रण के तरीकों को एक विशेष पदानुक्रम (Hierarchy) में अपनाया जाता है:
क. कर्षण या कृषि संबंधी विधियाँ (Cultural Methods)
- फसल चक्र (Crop Rotation): एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल न उगाना।
- मिश्रित खेती: कीटों के प्रसार को रोकने के लिए अलग-अलग फसलें साथ उगाना।
- प्रतिरोधी किस्में: ऐसी किस्मों का चुनाव करना जिनमें स्वाभाविक रूप से कीटों से लड़ने की क्षमता हो।
- बुवाई के समय में बदलाव: कीटों के सक्रिय होने से पहले या बाद में बुवाई करना।
ख. भौतिक और यांत्रिक विधियाँ (Physical & Mechanical Methods)
- कीटों को हाथ से पकड़कर नष्ट करना।
- फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps) और लाइट ट्रैप का उपयोग करना।
- खेतों में चिपचिपे जाल (Sticky Traps) लगाना।
ग. जैविक नियंत्रण (Biological Control)
यह विधि “कीट से कीट को मारने” पर आधारित है।
- परभक्षी (Predators): जैसे लेडीबग जो एफिड्स को खाती है।
- परजीवी (Parasitoids): जैसे ट्राइकोगामा (Trichogramma) जो हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट करते हैं।
- जैव-कीटनाशक: नीम का तेल, Bacillus thuringiensis (Bt) या ट्राइकोडर्मा का उपयोग।
घ. रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control)
यह अंतिम विकल्प होता है। जब अन्य सभी विधियाँ विफल हो जाती हैं, तब रसायनों का उपयोग किया जाता है। इसमें भी कम जहरीले और विशिष्ट कीट पर असर करने वाले रसायनों को प्राथमिकता दी जाती है।
IPM के लाभ
- पर्यावरण सुरक्षा: मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण कम होता है।
- लागत में कमी: रसायनों पर होने वाला अनावश्यक खर्च बचता है।
- मानव स्वास्थ्य: भोजन में कीटनाशकों के अवशेष कम होते हैं।
- प्रतिरोधक क्षमता: कीटों में कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) विकसित नहीं हो पाती।
UPSC के लिए विशेष बिंदु
- सतत कृषि (Sustainable Agriculture): IPM सतत विकास लक्ष्यों (SDG-2: Zero Hunger) को प्राप्त करने में सहायक है।
- सरकारी पहल: भारत सरकार ‘राष्ट्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र’ (NCIPM) के माध्यम से इसे बढ़ावा दे रही है।
- चुनौती: किसानों में जागरूकता की कमी और जैव-कीटनाशकों की बाजार में सीमित उपलब्धता।
एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाना केवल कृषि उत्पादकता के लिए ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
अभ्यास प्रश्न (UPSC हेतु)
प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा): “कपास उत्पादकता मिशन” के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसका प्राथमिक ध्यान भारत में कपास की प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ाने पर है।
- मिशन का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) को बढ़ावा देना है।
- वर्तमान में भारत में दुनिया की सबसे अधिक कपास उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर पैदावार) है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 1 और 3 D) 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
- व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि हालांकि भारत दुनिया का शीर्ष उत्पादक है और खेती का क्षेत्र भी सबसे बड़ा है, लेकिन इसकी उत्पादकता (yield per hectare) ब्राजील, अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “भारतीय कृषि के लिए आवर्ती चुनौती केवल उत्पादन में नहीं, बल्कि लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने में निहित है।” गन्ने और कपास पर हाल के कैबिनेट निर्णयों के आलोक में, किसानों की आय दोगुनी करने में ‘मूल्य-समर्थन’ (price-support) बनाम ‘उत्पादकता-आधारित विकास’ (productivity-led growth) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
