भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति

CEC और ECs की नियुक्ति

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अधिनियम कार्यपालिका (Executive) को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की नियुक्तियों पर “विशेष नियंत्रण” प्रदान करता है, जिससे इसकी स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है।

पृष्ठभूमि: नियुक्ति प्रक्रिया का विकास

ऐतिहासिक रूप से, CEC और ECs की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 324(2) द्वारा शासित थी। हालाँकि, दशकों तक संसद द्वारा कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाया गया था, जिससे एक “विधायी शून्यता” (legislative vacuum) पैदा हो गई थी।

  • मार्च 2023 से पहले: नियुक्तियां राष्ट्रपति द्वारा केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती थीं (कार्यपालिका-प्रधान)।
  • अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (मार्च 2023): एक संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक नियुक्तियां एक समिति द्वारा की जानी चाहिए जिसमें शामिल हों:
    1. प्रधानमंत्री (PM)
    2. लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP)
    3. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
  • 2023 का अधिनियम: दिसंबर 2023 में, संसद ने एक नया कानून बनाया, जिसने चयन समिति में CJI के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया।

चयन तंत्र का तुलनात्मक विश्लेषण

विशेषताSC निर्णय (अनूप बरनवाल)2023 का अधिनियम
अध्यक्षप्रधानमंत्रीप्रधानमंत्री
सदस्य 1विपक्ष का नेता (या सबसे बड़ा दल)विपक्ष का नेता (या सबसे बड़ा दल)
सदस्य 2भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (PM द्वारा नामित)
खोज समितिनिर्दिष्ट नहींकानून मंत्री की अध्यक्षता में; 5 नामों का पैनल तैयार करती है।

प्रमुख मुद्दे और तर्क

याचिकाकर्ताओं के तर्क (ADR और अन्य):

  1. कार्यपालिका का प्रभुत्व: CJI को कैबिनेट मंत्री से बदलकर, समिति में प्रभावी रूप से कार्यपालिका के पक्ष में 2:1 का बहुमत हो गया है।
  2. स्वतंत्रता का उल्लंघन: ECI को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए “बेहद स्वतंत्र” होना चाहिए। कार्यपालिका द्वारा नियंत्रित निकाय में तटस्थता की कमी हो सकती है।
  3. न्यायिक मंशा को पलटना: इस कानून को राजनीतिक हस्तक्षेप से ECI को बचाने के SC के प्रयास को दरकिनार करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ:

  • विधायी क्षमता: न्यायालय ने उल्लेख किया कि मार्च 2023 का निर्णय स्पष्ट रूप से एक “अस्थायी” (pro tem) उपाय था जब तक कि संसद अनुच्छेद 324(2) के तहत अपनी शक्ति का उपयोग नहीं करती।
  • शक्तियों का पृथक्करण: न्यायालय ने विधायी कार्यों और न्यायिक समीक्षा के बीच की सूक्ष्म रेखा को रेखांकित किया।

चुनावी सुधारों पर दिनेश गोस्वामी समिति (1990)

दिनेश गोस्वामी समिति का गठन 1990 में भारतीय चुनावों में धन और बाहुबल के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए किया गया था। इसकी सिफारिशें आधुनिक चुनावी प्रथाओं का आधार बनी हुई हैं।

प्रमुख सिफारिशें:

  • ECI को मजबूत करना: सुझाव दिया कि ECI को तीन सदस्यीय निकाय होना चाहिए। नियुक्ति के लिए PM, LoP और CJI की समिति प्रस्तावित की।
  • धन और बाहुबल पर लगाम: चुनावों के लिए ‘वस्तु के रूप में’ (जैसे ईंधन, वाहन, कागज) सरकारी फंडिंग (State Funding) का सुझाव दिया, न कि नकद।
  • EVM का उपयोग: बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के उपयोग की पुरजोर सिफारिश की।
  • मतदाता पहचान: धोखाधड़ी रोकने के लिए सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र (EPIC) जारी करने का प्रस्ताव दिया।
  • दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची): सिफारिश की कि दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराने की शक्ति अध्यक्ष के बजाय राष्ट्रपति या राज्यपाल (ECI की सलाह पर) के पास होनी चाहिए।

कार्यान्वयन की स्थिति

स्थितिसुधार उपाय
लागूतीन सदस्यीय चुनाव आयोग (1993 में स्थायी बनाया गया)।
लागूEVM का व्यापक उपयोग और फोटो पहचान पत्र की शुरुआत।
लागूउपचुनाव कराने के लिए छह महीने की वैधानिक समय सीमा।
लंबितCEC/ECs की नियुक्ति PM-LoP-CJI समिति द्वारा (2023 एक्ट ने CJI को हटा दिया)।
लंबितअयोग्यता (10वीं अनुसूची) की शक्ति राष्ट्रपति/ECI को सौंपना।

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा (Objective)

Q1. भारत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. अनुच्छेद 324(2) के तहत, राष्ट्रपति संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के प्रावधानों के अधीन CEC और ECs की नियुक्ति करता है।
  2. अनूप बरनवाल (2023) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को तब तक शामिल किया जाना चाहिए जब तक कि संसद कानून न बना दे।
  3. 2023 के अधिनियम ने चयन पैनल से विपक्ष के नेता को पूरी तरह से हटा दिया।

उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 2 (2023 अधिनियम ने विपक्ष के नेता को नहीं हटाया, बल्कि CJI की जगह कैबिनेट मंत्री को शामिल किया)।

मुख्य परीक्षा (Descriptive)

प्रश्न: “भारत के निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता संविधान के ‘मूल ढांचे’ को सुरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।” 2023 के अधिनियम के आलोक में, चुनावी नियुक्तियों में कार्यपालिका के विशेषाधिकार और संस्थागत स्वायत्तता के बीच संतुलन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

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