भारत के सार्वजनिक प्रसारण और फिल्म नियामक निकायों के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए, शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने प्रसून जोशी का स्थान लिया है, जो अब प्रसार भारती के अध्यक्ष की भूमिका में स्थानांतरित हो गए हैं।
1. नियुक्त व्यक्तियों का विवरण
| विशेषता | शशि शेखर वेम्पति | प्रसून जोशी |
| वर्तमान भूमिका | अध्यक्ष, CBFC | अध्यक्ष, प्रसार भारती |
| पृष्ठभूमि | तकनीकी विशेषज्ञ; प्रसार भारती के पूर्व CEO (2017–2022); AI समर्थक। | रचनात्मक विशेषज्ञ; पटकथा लेखक, गीतकार और विज्ञापन पेशेवर। |
| प्रमुख योगदान | सार्वजनिक प्रसारण का डिजिटल परिवर्तन; भारतीय भाषा AI मॉडल (BharatGen) पर ध्यान। | ‘ई-सिनेप्रमाण’ (डिजिटल प्रमाणन) का कार्यान्वयन; 2017 से CBFC का नेतृत्व किया। |
संस्थानों को समझना
A. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC)
- प्रकृति: सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत एक साविधिक निकाय (Statutory Body)।
- जनादेश: सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को नियंत्रित करता है।
- भूमिका: यह एक प्रमाणन निकाय है, न कि सख्त कानूनी अर्थों में “सेंसर” बोर्ड। हालांकि, यदि कोई फिल्म संविधान के अनुच्छेद 19(2) (उचित प्रतिबंध) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है, तो उसके पास दृश्यों को काटने या प्रमाणन से इनकार करने की शक्ति है।
B. प्रसार भारती
- प्रकृति: भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रसारक; यह प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के तहत स्थापित एक साविधिक स्वायत्त निकाय है।
- घटक: इसमें दूरदर्शन (DD) और आकाशवाणी (AIR) शामिल हैं।
- उद्देश्य: जनता को सूचित करने, शिक्षित करने और मनोरंजन करने के लिए निष्पक्ष प्रसारण सेवाएं प्रदान करना।
फिल्म प्रमाणन में प्रमुख रुझान और चुनौतियाँ
- डिजिटलीकरण (e-Cinepramaan): पिछले कार्यकाल के दौरान, CBFC ‘ई-सिनेप्रमाण’ प्रणाली में स्थानांतरित हुआ। इस पोर्टल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और मानवीय हस्तक्षेप को कम करना था।
- जांच का विस्तार: 2018 और 2022 के बीच सेंसरशिप के दायरे में विस्तार देखा गया, विशेष रूप से:
- राजनीतिक हस्तियां: जीवित या ऐतिहासिक राजनीतिक व्यक्तियों पर आधारित फिल्मों की गहन जांच।
- धार्मिक विषय: उन विषयों के प्रति संवेदनशीलता जो “धार्मिक भावनाओं को ठेस” पहुँचा सकते हैं।
- सूचना तक पहुँच: हाल ही में, CBFC ने “कट लिस्ट” (फिल्म से हटाए गए दृश्यों की सूची) तक सार्वजनिक पहुँच को सीमित कर दिया है, जो पहले पारदर्शिता के लिए उपलब्ध थी।
संवैधानिक और कानूनी ढांचा
- अनुच्छेद 19(1)(a): भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसमें सिनेमाई अभिव्यक्ति भी शामिल है।
- अनुच्छेद 19(2): राज्य को भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या नैतिकता के हित में “उचित प्रतिबंध” लगाने की अनुमति देता है।
- सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023: इस हालिया संशोधन ने पायरेसी के लिए सख्त सजा पेश की और माता-पिता के मार्गदर्शन के लिए एक नई आयु-आधारित वर्गीकरण प्रणाली (UA 7+, UA 13+, UA 16+) स्थापित की।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा (Objective)
Q1. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है।
- यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
- सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने ‘UA’ प्रमाणन के लिए आयु-आधारित उप-श्रेणियाँ शुरू की हैं।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2, और 3
उत्तर: (b) केवल 3
(व्याख्या: CBFC एक साविधिक निकाय है, न कि संवैधानिक; और यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आता है।)
मुख्य परीक्षा (Descriptive)
Q2. “भारतीय फिल्म उद्योग में ‘सेंसरशिप’ से ‘प्रमाणन’ की ओर संक्रमण अभी पूरी तरह से महसूस किया जाना बाकी है।” हाल के नेतृत्व परिवर्तनों और सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम 2023 के आलोक में, रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
