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हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के पास लगातार कई परीक्षण किए। इसके तहत भारत की बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली और नौसेना की मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल उड़ान परीक्षण संपन्न हुआ।
परीक्षणों की मुख्य विशेषताएं
बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD)
- असाधारण क्षमता (Elite Capability): इन परीक्षणों ने उन्नत और अत्यधिक गति वाले हवाई खतरों को बीच में ही रोकने और नष्ट करने की भारत की क्षमता को साबित किया है, जिसमें अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी तक के खतरे शामिल हैं।
- स्तरीय संरचना (Layered Architecture): इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों को बिल्कुल सटीक तरीके से निशाना बनाया। इसने विभिन्न ऊंचाइयों पर (वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों जगह) दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने के लिए बनाई गई एक जटिल प्रणाली की पुष्टि की है।
- वैश्विक स्तर पर पहचान (Global Standing): इस सफल प्रदर्शन के साथ, भारत परिचालन स्तर (operational-level) की बहुस्तरीय BMD प्रणाली रखने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों (जैसे अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल) के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है।
नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-मध्यम दूरी (NASM-MR)
- NASM-MR के पहले उड़ान परीक्षण ने इसके उड़ान मानकों (flight parameters) और गाइडेंस सिस्टम को सफलतापूर्वक साबित किया है।
- इसे मध्यम दूरी पर दुश्मन के समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ भारतीय नौसेना की सटीक मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो एक अत्यधिक प्रभावी समुद्री स्ट्राइक विकल्प प्रदान करता है।
- सी-स्किमिंग प्रोफाइल (Sea-Skimming Profile): आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलें (जैसे NASM-MR) अक्सर “सी-स्किमिंग” उड़ान प्रोफाइल का उपयोग करती हैं। इसका मतलब है कि मिसाइल समुद्र की सतह के जितना संभव हो सके उतने करीब (अक्सर पानी से कुछ ही मीटर ऊपर) उड़ती है ताकि वह दुश्मन के रडार की नजरों (radar horizon) से बची रहे। इससे दुश्मन के युद्धपोतों के लिए हमले के आखिरी पलों तक इसका पता लगाना और इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।
रणनीतिक महत्व (Strategic Significance)
- क्षेत्रीय निवारक (Regional Deterrence): यह पड़ोस में विरोधियों के बढ़ते मिसाइल भंडारों और उभरती क्षमताओं (जैसे MIRV) के खिलाफ भारत के रणनीतिक सुरक्षा कवच को मजबूत करता है।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta in Defence): ये परीक्षण स्वदेशी डिजाइन और विकास की पुष्टि करते हैं, जो DRDO वैज्ञानिकों, घरेलू उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाते हैं। इससे आयातित एंटी-मिसाइल प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी।
- समुद्री प्रभुत्व (Maritime Dominance): NASM-MR एक महत्वपूर्ण स्वदेशी ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ विकल्प प्रदान करता है, जिससे तेजी से प्रतिस्पर्धी हो रहे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत के रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने की नौसेना की क्षमता बढ़ती है।
- क्षेत्रीय मिसाइल विस्तार का मुकाबला (અतिरिक्त रणनीतिक बिंदु): भारत की बहुस्तरीय BMD प्रणाली को प्राथमिकता देना सीधे तौर पर पड़ोस में उन्नत लंबी दूरी के बैलिस्टिक वेक्टरों के बढ़ते प्रसार का मुकाबला करता है, विशेष रूप से पाकिस्तान के विकासशील फतेह-I (Fateh-I), फतेह-II (Fateh-II) और चीनी मूल के P282 मिसाइल सिस्टम जैसे खतरों को निष्क्रिय करता है।
- परमाणु ब्लैकमेल को रोकना (Denying Nuclear Blackmail): एक विश्वसनीय और चालू मिसाइल कवच महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे, आवश्यक कमांड नोड्स और नागरिक आबादी वाले केंद्रों की रक्षा करता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन विरोधियों के गैर-समानुपातिक (asymmetric) खतरों से दूर हो जाता है।
- समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) को सुरक्षित करना: NASM-MR का आना भारतीय नौसेना को दुश्मन के युद्धपोतों को पीछे धकेलने के लिए एक बेहद शक्तिशाली हथियार देता है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र के महत्वपूर्ण जलक्षेत्र में समुद्री निवारक क्षमता मजबूत होती है।
भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम
भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) ढांचे की परिकल्पना एक अत्यधिक एकीकृत नेटवर्क के रूप में की गई है। इसमें अर्ली-वार्निंग ट्रैकिंग रडार, स्थानीयकृत कमांड-एंड-कंट्रोल नोड्स और बहुस्तरीय सतह से हवा में मार करने वाले इंटरसेप्टर शामिल हैं। यह खतरों को क्रमबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ (आयरन डोम अवधारणा पर भारत का जवाब) जैसे स्वदेशी छतरियों के व्यापक विजन के तहत, यह ढांचा इंटरसेप्शन को अलग-अलग ऊंचाइयों में विभाजित करता है:
- एक्सो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्शन (Exo-Atmospheric Interception): पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर 100 किमी से अधिक की ऊंचाई पर आने वाली दुश्मन की मिसाइलों को निशाना बनाता है, जिससे खतरा अंतरिक्ष में ही नष्ट हो जाता है।
- एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्शन (Endo-Atmospheric Interception): यह आंतरिक कवच के रूप में काम करता है, जो 100 किमी की ऊंचाई की सीमा से नीचे वायुमंडल के निचले क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले लक्ष्यों को उलझाकर निष्क्रिय करता है।
- फेज-II कैपस्टोन (Phase-II Capstone): हालिया सफल परीक्षणों ने उन उन्नत इंटरसेप्टर वेरिएंट्स की पुष्टि की है जो 2,000 किमी से 5,000 किमी तक की रेंज वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBM) का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं, जिससे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी तक के खतरों को बेअसर करने का रास्ता साफ हो गया है।
तकनीकी बढ़त: NASM-MR का सी-स्किमिंग प्रोफाइल
जहां एक तरफ BMD कवच आसमान को सुरक्षित करता है, वहीं नौसेना की मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण दुश्मन के नौसैनिक युद्धपोतों के खिलाफ एक अत्यधिक परिष्कृत आक्रामक बढ़त पेश करता है। इसकी मारक क्षमता के केंद्र में इसका कम ऊंचाई वाला सी-स्किमिंग उड़ान प्रोफाइल है।
- रडार से बचाव (Radar Evasion): पानी की सतह से महज कुछ मीटर ऊपर उड़कर, यह मिसाइल अपने क्रूज़ चरण के दौरान दुश्मन के युद्धपोतों के रडार क्षितिज (radar horizon) के नीचे छिपे रहने के लिए पृथ्वी की वक्रता (curvature) का लाभ उठाती है।
- प्रतिक्रिया का कम समय (Compressed Reaction Window): आखिरी पलों तक दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को अंधा रखकर, यह सटीक मार करता है और दुश्मन के क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) के पास हमले से पहले इंटरसेप्शन की गणना करने के लिए केवल कुछ सेकंड का समय छोड़ता है।
कठिन वास्तविकताएं: परिचालन और तकनीकी चुनौतियां
- हाइपरसोनिक खतरे (The Hypersonic Threat Vector): पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें जहां अनुमानित रास्तों (trajectories) पर चलती हैं, वहीं विरोधियों द्वारा विकसित किए जा रहे अत्यधिक गतिशील हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों (HGVs) का मुकाबला करने के लिए अभूतपूर्व प्रोसेसिंग गति वाले सेंसर और फुर्तीले इंटरसेप्टर की आवश्यकता होती है।
- त्रि-सेवा एकीकरण (Tri-Service Integration): बिना किसी देरी (latency) के जमीन-आधारित ट्रैकिंग नेटवर्क, हवाई प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (airborne early-warning) और नौसैनिक बेड़े के रडार को एक एकीकृत, रीयल-टाइम कमांड-एंड-कंट्रोल मैट्रिक्स में मिलाना एक बहुत बड़ी तकनीकी बाधा बनी हुई है।
- सप्लाई चेन और लागत (Supply Chain & Cost Scaling): अत्यधिक जटिल इंटरसेप्टर सिस्टम, विशेष ठोस-ईंधन प्रणोदन इकाइयों (solid-fuel propulsion units) और उन्नत सीकर हेड्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए भारी व निरंतर पूंजी तथा गहरी औद्योगिक आपूर्ति-श्रृंखला की स्थिरता की आवश्यकता होती है।
आगे की राह: टेस्टबेड से सामरिक तैनाती की ओर बढ़ना
- तत्काल यूजर ट्रायल्स की ओर कदम (Transition to Immediate User Trials): विक्सात्मक परीक्षणों की शानदार सफलता के बाद, नए परीक्षण किए गए एक्सो- और एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर मिसाइल ब्लॉकों को सशस्त्र बलों द्वारा कड़े उपयोगकर्ता परीक्षणों (user trials) के लिए तेजी से सौंपा जाना चाहिए।
- औद्योगिक विस्तार और आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी सेंसर, सीकर और मिसाइल घटकों की उत्पादन क्षमता में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे इस पूरे इकोसिस्टम को विदेशी आपूर्ति-श्रृंखला के व्यवधानों से सुरक्षित किया जा सके।
- प्रमुख केंद्रों की रणनीतिक घेराबंदी (Strategic Layering): तत्काल परिचालन फोकस तीन-स्तरीय ‘सुदर्शन चक्र’ प्रणाली को तैनात करने पर होना चाहिए ताकि महत्वपूर्ण महानगरों, उच्च-मूल्य वाले आर्थिक क्षेत्रों और रणनीतिक परमाणु सुविधाओं को सुरक्षा घेरे में लिया जा सके।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) कार्यक्रम और हालिया DRDO परीक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- हालिया उड़ान परीक्षणों ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी तक के खतरों को रोकने की भारत की क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
- नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-मध्यम दूरी (NASM-MR) दुश्मन के विमान भेदी हमले से बचने के लिए अपने अंतिम उड़ान चरण (terminal flight phase) के दौरान पूरी तरह से अधिक ऊंचाई पर काम करती है।
- भारत का बहुस्तरीय BMD ढांचा विशेष रूप से पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) आने वाली दुश्मन की मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (a)
- कथन 1 सही है: हालिया परीक्षण अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी तक के उन्नत खतरों का मुकाबला करने के लिए भारत की बहुस्तरीय BMD क्षमता की पुष्टि करते हैं।
- कथन 2 गलत है: NASM-MR को रडार की पकड़ से बचने के लिए उच्च ऊंचाई पर उड़ान भरने के बजाय कम ऊंचाई वाले “सी-स्किमिंग” उड़ान प्रोफाइल का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- कथन 3 गलत है: एक “बहुस्तरीय” (multi-layered) BMD प्रणाली का तात्पर्य है कि इसे पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) और अंदर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) दोनों अलग-अलग परतों में खतरों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “एक बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन भारत की रणनीतिक निवारक क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मोड़ (watershed moment) है।” इस कथन का मूल्यांकन कीजिए और चर्चा कीजिए कि ऐसे स्वदेशी तकनीकी मील के पत्थर राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को कैसे मजबूत करते हैं। (150 शब्द, 10 अंक)
मुख्य परीक्षा के लिए संक्षिप्त दृष्टिकोण:
- प्रस्तावना (Introduction): DRDO द्वारा हाल ही में बहुस्तरीय BMD प्रणाली और NASM-MR के सफल परीक्षण का उल्लेख करें, और ICBM-इंटरसेप्शन क्षमता रखने वाले देशों के विशिष्ट समूह में भारत के प्रवेश पर जोर दें।
- रणनीतिक निवारक को बढ़ावा देना (Bolstering Strategic Deterrence):
- खत्रों को बेअसर करना: विरोधी पड़ोसियों की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs/ICBMs) के खिलाफ एक मजबूत रक्षात्मक कवच प्रदान करता है।
- परमाणु सिद्धांत के साथ तालमेल: महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कमान केंद्रों और आबादी वाले क्षेत्रों की रक्षा करता है, जो भारत के ‘नो फर्स्ट यूज़’ (NFU) परमाणु सिद्धांत के तहत जवाबी हमले की क्षमताओं की उत्तरजीविता (survivability) सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना:
- समुद्री सुरक्षा: NASM-MR जैसी स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-शिप मिसाइलें हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना के स्टैंड-ऑफ़ स्ट्राइक विकल्पों और समुद्री इनकार (sea denial) क्षमताओं को मजबूत करती हैं।
- तकनीकी संप्रभुता: एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (AESA) रडार, भाई-स्पीड इंटरसेप्टर और रियल-टाइम गाइडेंस एल्गोरिदम जैसे जटिल क्षेत्रों में घरेलू क्षमता को साबित करके रक्षा में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण की पुष्टि करता है।
- निष्कर्ष (Conclusion): निष्कर्ष निकालें कि भारत के लिए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ (net security provider) के रूप में प्रभावी ढंग से शक्ति प्रदर्शन करने के लिए अगली पीढ़ी की रणनीतिक तकनीकों पर महारत हासिल करना अनिवार्य है।
