हाल ही में, एक राजनयिक दस्तावेज़ से पता चला है कि संदिग्ध अवैध प्रवासियों के प्रत्यावर्तन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। जहाँ भारत ने ‘नोट वर्बेल’ (Notes Verbale) के माध्यम से अपनी राजनयिक पहुँच तेज कर दी है, वहीं बांग्लादेश ने भारतीय राजनीतिक नेतृत्व की टिप्पणियों के बाद “पुश-इन” (धकेलने) के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है।
प्रमुख आँकड़े और डेटा बिंदु
| श्रेणी | आँकड़ा |
| भेजे गए ‘नोट वर्बेल’ | 1,137 (सितंबर 2020 से) |
| समेकित अनुस्मारक (Reminders) | 456 |
| लंबित सत्यापन मामले | 2,862 मामले (कुछ 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित) |
| मुख्य शिकायत | राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए ढाका से “कार्रवाई योग्य प्रतिक्रिया” का अभाव। |
विवाद के मुख्य बिंदु
- “पुश-इन” बनाम “प्रत्यावर्तन” बहस:
- भारत का रुख: भारत का दावा है कि प्रत्यावर्तन के सभी उपाय भारतीय कानूनों और स्थापित द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के पालन में किए जाते हैं।
- बांग्लादेश की चिंता: ढाका ने उन टिप्पणियों का विरोध किया जिनमें सुझाव दिया गया था कि सीमा रक्षक बिना सुरक्षा वाले हिस्सों से व्यक्तियों को “धकेल (Push-in)” रहे हैं। बांग्लादेश इसे औपचारिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन मानता है।
- राष्ट्रीयता सत्यापन (Nationality Verification): यह प्राथमिक बाधा है। द्विपक्षीय समझौतों के तहत, किसी व्यक्ति को तभी वापस भेजा जा सकता है जब उसका मूल देश (बांग्लादेश) उसकी नागरिकता की पुष्टि करे। भारत का आरोप है कि ढाका आवश्यक सहयोग नहीं दे रहा है।
- घरेलू राजनीति: राज्य चुनावों (असम और पश्चिम बंगाल) के दौरान की बयानबाजी अक्सर द्विपक्षीय कूटनीति में बाधा डालती है, जिससे दूतों को “समन” जारी किए जाते हैं और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन होते हैं।
बांग्लादेश से भारत में अवैध प्रवासन
मुद्दा: बिना दस्तावेजी प्रवासन (Undocumented Migration)
यह मुद्दा बिना वैध यात्रा दस्तावेजों या कानूनी प्राधिकरण के 4,096 किमी लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर व्यक्तियों की आवाजाही को संदर्भित करता है।
- भौगोलिक संदर्भ: यह सीमा भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ साझा की जाने वाली सबसे लंबी सीमा है, जो छिद्रपूर्ण इलाकों (porous terrains), नदीय क्षेत्रों (चार भूमि) और घने जंगलों की विशेषता वाली है, जिससे इसकी निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।
प्रवासन के कारण
| पुश कारक (बांग्लादेश से) | पुल कारक (भारत की ओर) |
| आर्थिक संकट: ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गरीबी और रोजगार के अवसरों की कमी। | आर्थिक अवसर: भारत के निर्माण और घरेलू क्षेत्रों में कम लागत वाले श्रम की मांग। |
| पर्यावरणीय संवेदनशीलता: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में बार-बार चक्रवात और बाढ़ (जलवायु शरणार्थी)। | सांस्कृतिक समानता: पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में साझा भाषा (बंगाली), जातीयता और रिश्तेदारी। |
| धार्मिक/राजनीतिक कारक: अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाली हिंसा या अस्थिरता। | छिद्रपूर्ण सीमाएँ: नदी के अंतराल और अधूरी बाड़ के कारण सीमा पार करने में आसानी। |
प्रमुख चिंताएँ
- राष्ट्रीय सुरक्षा: कट्टरपंथी तत्वों की घुसपैठ और पूर्वोत्तर में विद्रोही समूहों द्वारा सुरक्षित पनाहगाह के रूप में सीमा का उपयोग।
- जनसांख्यिकीय परिवर्तन: सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकी में महत्वपूर्ण बदलाव, जिससे सामाजिक घर्षण और “मिट्टी के लाल (sons of the soil)” आंदोलन पैदा होते हैं।
- आर्थिक दबाव: कम कुशल नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा और राज्य के संसाधनों (सब्सिडी, स्वास्थ्य सेवा) पर बढ़ता बोझ।
- सीमा पार अपराध: मानव तस्करी, मवेशी तस्करी और जाली भारतीय मुद्रा नोटों (FICN) का संचलन।
प्रस्तावित समाधान
- व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS): नदी के अंतरालों को भरने के लिए इंफ्रारेड सेंसर, कैमरों और जीपीएस का उपयोग करके “स्मार्ट फेंसिंग” की ओर बढ़ना।
- राजनयिक सुव्यवस्थितीकरण: “प्रत्यावर्तन गतिरोध” से बचने के लिए समयबद्ध राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए ढाका के साथ एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) स्थापित करना।
- बायोमेट्रिक डेटाबेस: बिना दस्तावेजी व्यक्तियों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए एक मजबूत प्रणाली का कार्यान्वयन ताकि उन्हें संप्रभु दस्तावेज (आधार, मतदाता पहचान पत्र) प्राप्त करने से रोका जा सके।
- आर्थिक सहयोग: “पुश” कारकों को कम करने के लिए बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में निवेश करना।
- कार्य परमिट (Work Permits): नागरिकता प्रदान किए बिना कानूनी मौसमी श्रम प्रवासन की अनुमति देने वाली “वर्क परमिट” प्रणाली।
UPSC के लिए मुख्य शब्द
- नोट वर्बेल (Note Verbale): तीसरे व्यक्ति में तैयार किया गया एक औपचारिक राजनयिक संचार जो अहस्ताक्षरित होता है। यह ‘पत्र’ से कम औपचारिक लेकिन ‘एड-मेमोयर’ से अधिक औपचारिक होता है।
- प्रत्यावर्तन (Repatriation): किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से या जबरन उसके मूल स्थान या नागरिकता वाले देश में वापस भेजने की प्रक्रिया।
- राष्ट्रीयता सत्यापन: एक संप्रभु प्रक्रिया जहाँ एक राज्य पुष्टि करता है कि संदिग्ध अवैध प्रवासी वास्तव में उसका नागरिक है या नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा (PT) संबंधित
प्रश्न 1. अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के संदर्भ में, ‘नोट वर्बेल’ शब्द का तात्पर्य है:
(a) राष्ट्राध्यक्षों के बीच एक मौखिक समझौता जो कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
(b) तीसरे व्यक्ति में लिखा गया एक औपचारिक, अहस्ताक्षरित राजनयिक संचार।
(c) केवल दो देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच साझा किया गया एक गुप्त दस्तावेज।
(d) संयुक्त राष्ट्र महासभा में की गई एक सार्वजनिक घोषणा।
प्रश्न 2. भारत अपनी सबसे लंबी भूमि सीमा निम्नलिखित में से किस देश के साथ साझा करता है?
(a) चीन
(b) पाकिस्तान
(c) बांग्लादेश
(d) म्यांमार
प्रश्न 3. अवैध प्रवासियों के प्रत्यावर्तन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, एक देश दूसरे देश से प्रत्यावर्तित किए जा रहे अपने नागरिकों को स्वीकार करने के लिए बाध्य है।
- भारत और बांग्लादेश के बीच औपचारिक द्विपक्षीय प्रत्यावर्तन प्रक्रिया में राष्ट्रीयता सत्यापन एक अनिवार्य कदम है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
मुख्य परीक्षा (Mains) संबंधित
प्रश्न 1. “अवैध प्रवासन एक ‘मुख्य मुद्दा’ बना हुआ है जो समय-समय पर बांग्लादेश के संबंध में भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर दबाव डालता है।” औपचारिक प्रत्यावर्तन प्रक्रिया में चुनौतियों का विश्लेषण करें और इस राजनयिक गतिरोध को हल करने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
प्रश्न 2. पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने में घरेलू राजनीतिक बयानबाजी की भूमिका पर चर्चा करें। भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बांग्लादेश के प्रति अपनी राजनयिक प्रतिबद्धताओं के साथ कैसे संतुलित कर सकता है? (150 शब्द)
