काजीरंगा रैप्टर और स्टॉर्क सर्वेक्षण

काजीरंगा में सर्वेक्षण

हाल ही में, काजीरंगा टाइगर रिजर्व (Kaziranga Tiger Reserve- KTR) प्राधिकरण ने गुवाहाटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काजीरंगा रैप्टर और स्टॉर्क सर्वेक्षण सम्पन्न किया है। अः सर्वेक्षण दो महत्वपूर्ण पारिस्थितिक समूहों—रैप्टर्स (शिकारी पक्षी) और स्टॉर्क (सारस) पर केंद्रित हैं।

  • मुख्य उद्देश्य: KTR के विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रजातियों की प्रचुरता और उनकी आबादी के वितरण का दस्तावेजीकरण करना।
  • रिपोर्ट जारी होने की तिथि का महत्व: 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस)।

भौगोलिक एवं पारिस्थितिक महत्व

असम के समृद्ध, विविध आर्द्रभूमि (wetlands) और हिमालय की तलहटी (foothills) इन शिकारी पक्षियों और सारस प्रजातियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास (critical habitats) प्रदान करते हैं।

  • रैप्टर विविधता: भारत रैप्टर्स (दिवाचर/दिन में सक्रिय और निशाचर/रात में सक्रिय दोनों) की 112 प्रजातियों का घर है। काजीरंगा और उसके आस-पास का परिदृश्य इनमें से लगभग 50 प्रजातियों (~45%) को आश्रय देता है।
  • स्टॉर्क विविधता: वैश्विक स्तर पर, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्टॉर्क की 20 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत इनमें से 8 प्रजातियों का घर है। विशेष बात यह है कि ये सभी 8 प्रजातियां असम में पाई जाती हैं, जिनमें से 6 इस सर्वेक्षण के दौरान विशेष रूप से काजीरंगा में दर्ज की गईं।

काजीरंगा के भीतर जोन-वार वितरण

सर्वेक्षण में पार्क के तीन प्रमुख प्रशासनिक प्रभागों को शामिल किया गया, जिसमें प्रजातियों का वितरण इस प्रकार देखा गया:

प्रशासनिक प्रभागदर्ज रैप्टर (प्रजातियां)दर्ज स्टॉर्क (प्रजातियां)
पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग215
विश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग206
नगांव वन्यजीव प्रभाग145

प्रजाति-विशिष्ट मुख्य तथ्य

क. स्टॉर्क (सारस)

  • सर्वाधिक संख्या: एशियन ओपनबिल (Anastomus oscitans) — 92 पक्षी देखे गए।
  • सबसे दुर्लभ: ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क (Leptoptilos dubius) — केवल 3 पक्षी दर्ज किए गए। (नोट: यह आर्द्रभूमि के क्षरण को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है)।

ख. रैप्टर्स (शिकारी पक्षी)

  • सर्वाधिक संख्या: हिमालयन ग्रिफन वल्चर (Gyps himalayensis) — 69 पक्षी देखे गए।
  • सबसे दुर्लभ: बूटेड ईगल और व्हाइट-टेड ईगल (प्रत्येक का केवल 1-1 पक्षी देखा गया)।

ग. विशिष्ट प्रजाति: पलास फिश ईगल (Haliaeetus leucoryphus)

  • काजीरंगा इस प्रजाति के लिए वैश्विक स्तर पर एक अंतिम सुरक्षित गढ़ के रूप में कार्य करता है।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा जनवरी 2020 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, KTR में इसके 10 सक्रिय घोंसले पाए गए थे, जो इसे दुनिया में पलास फिश ईगल के सर्वाधिक प्रजनन स्थलों वाला संरक्षित क्षेत्र बनाता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रासंगिक प्रश्न

प्रश्न 1. उत्तर-पूर्व भारत की पक्षी विविधता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत दुनिया की उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय स्टॉर्क प्रजातियों में से लगभग आधी प्रजातियों का घर है, और ये सभी असम राज्य में पाई जा सकती हैं।
  2. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पलास फिश ईगल (Pallas’s Fish Eagle) के लिए दुनिया में सबसे अधिक प्रजनन स्थलों वाला संरक्षित क्षेत्र है।
  3. हिमालयन ग्रिफन वल्चर (Himalayan Griffon Vulture) एक निशाचर (nocturnal) शिकारी पक्षी है जो ब्रह्मपुत्र घाटी के आर्द्रभूमियों में आमतौर पर देखा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर: (a) केवल 1 और 2

  • व्याख्या: कथन 1 सही है (भारत में दुनिया की 20 स्टॉर्क प्रजातियों में से 8 पाई जाती हैं, और ये सभी 8 असम में मौजूद हैं)। कथन 2 भी WII के सर्वेक्षण के आधार पर सही है। कथन 3 गलत है क्योंकि गिद्ध (Vultures) दिवाचर (diurnal/दिन में सक्रिय) शिकारी पक्षी होते हैं, निशाचर नहीं।

मुख्य परीक्षा के लिए प्रासंगिक प्रश्न

प्रश्न. “रैप्टर्स जैसे शीर्ष पक्षी शिकारियों और स्टॉर्क जैसी संकेतक प्रजातियों का संरक्षण, आर्द्रभूमि-बाढ़ के मैदान (wetland-floodplain) पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य को दर्शाता है।” उत्तर-पूर्व भारत के संरक्षित क्षेत्रों में हाल ही में हुए पक्षी सर्वेक्षणों के आलोक में, इन पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व और उनके महत्वपूर्ण आवासों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)

उत्तर की रूपरेखा/संकेत:

  • प्रस्तावना: हाल ही में काजीरंगा में हुए पक्षी सर्वेक्षण का उल्लेख करें, जो यह दर्शाता है कि KTR भारत की ~45% रैप्टर विविधता को समेटे हुए है और पलास फिश ईगल के लिए दुनिया का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल है।
  • पारिस्थितिक महत्व:
    • शीर्ष शिकारी के रूप में रैप्टर्स: ये छोटे स्तनधारियों, मछलियों और सरीसृपों की आबादी को नियंत्रित करते हैं; खाद्य श्रृंखला के स्वास्थ्य संकेतक हैं। गिद्ध प्रकृति के मेहतर (scavengers) के रूप में बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।
    • संकेतक प्रजाति के रूप में स्टॉर्क: इनकी उपस्थिति सीधे तौर पर स्वस्थ, निर्बाध आर्द्रभूमि और मछलियों की प्रचुरता (जैसे- एशियन ओपनबिल, ग्रेटर एडजुटेंट) पर निर्भर करती है।
  • आवासों के समक्ष चुनौतियां: आर्द्रभूमियों पर अतिक्रमण, कृषि अपवाह (agricultural runoff) के कारण शिकारी पक्षियों में कीटनाशकों का जैव-संचय (bioaccumulation), बुनियादी ढांचे का विकास और ब्रह्मपुत्र बेसिन में जलवायु-प्रेरित बाढ़ के बदलते पैटर्न।
  • निष्कर्ष: समुदाय के नेतृत्व में आर्द्रभूमि संरक्षण, क्षेत्रीय ज़ोनिंग योजनाओं और वन विभाग व शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोगात्मक निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता पर बल देते हुए उत्तर समाप्त करें।

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