Table of Contents
हाल ही में, केंद्र सरकार ने उच्च अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क हटा दिया है। यह पहल विशेष रूप से 22%, 25%, 27% और 30% मिश्रणों (blends) जैव ईंधन (biofuels) के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
मुख्य बिन्दु
- दोहरे कर (Dual Levy) से बचाव: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना कानूनी रूप से एक “विनिर्माण गतिविधि” (manufacturing activity) माना जाता है। वर्तमान में, पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है, जबकि एथेनॉल पर जीएसटी (GST) लगता है। यदि छूट न दी जाए, तो अंतिम मिश्रित उत्पाद पर पूरी मात्रा के लिए फिर से उत्पाद शुल्क लग सकता है। यह छूट टैक्स के दोहराव (टैक्स पर टैक्स लगने की प्रक्रिया) को रोकती है।
- पूर्व की स्थिति: वित्त मंत्रालय पहले ही 20% तक के मिश्रित पेट्रोल (E20) को अंतिम उत्पाद पर लगने वाले इस उत्पाद शुल्क से छूट दे चुका है।
- तत्काल रोलआउट नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कर छूट एक “प्रारंभिक पूर्वापेक्षा” (preliminary prerequisite) है। यह E22-E30 मिश्रणों के तत्काल व्यावसायिक रोलआउट का संकेत नहीं है, जो केवल व्यापक परीक्षण और हितधारकों (stakeholders) के साथ परामर्श के बाद ही होगा।
- हालिया उपलब्धियां: यह अधिसूचना भारत द्वारा 5 जून को E85 संस्करण (15% गैसोलीन के साथ 85% एथेनॉल मिश्रित) के औपचारिक शुभारंभ के बाद आई है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
- नीतिगत स्थिरता: ग्रेन एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (Grain Ethanol Manufacturers Association – GEMA) जैसे उद्योग निकाय इसे दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता के एक मजबूत संकेत के रूप में देखते हैं।
- निवेश के लिए उत्प्रेरक: यह पहल उत्पादन, भंडारण, ईंधन खुदरा बिक्री (fuel retailing) और फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी समाधानों सहित संपूर्ण एथेनॉल मूल्य श्रृंखला (value chain) में नए निवेश को आकर्षक बनाता है।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की आवश्यकता: डिस्टिलर संघों ने राज्य सरकारों से अपने स्थानीय कर ढांचे को संरेखित (align) करने का आग्रह किया है ताकि अंतिम उपभोक्ता को वास्तव में रिटेल पंप पर इसका लाभ मिल सके।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol – EBP) कार्यक्रम क्या है?
- उत्पत्ति और उद्देश्य: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा इस पहल को 2003 में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयात निर्भरता को कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और जीवाश्म ईंधन के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करना है।
- प्रक्रिया: इसमें कृषि शर्करा और स्टार्च के किण्वन (fermentation) से उत्पादित एथेनॉल (एक बायो-अल्कोहल) को सीधे पारंपरिक मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) के साथ मिलाना शामिल है।
- कार्यान्वयन: तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies – OMCs) के लिए सरकार द्वारा रणनीतिक रूप से तय की गई लाभकारी कीमतों पर घरेलू डिस्टिलरीज से एथेनॉल खरीदना अनिवार्य है।
- लक्ष्य का विकास: प्रारंभ में 5% सम्मिश्रण लक्ष्य से शुरू होकर, इस कार्यक्रम का उत्तरोत्तर विस्तार किया गया है। इसका वर्तमान प्राथमिक मिशन देश भर में 20% मिश्रण (E20) प्राप्त करने पर केंद्रित है।
जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति (2018)
- ईंधन का वर्गीकरण: यह नीति जैव ईंधन को प्रथम पीढ़ी (1G – खाद्य फसलों से), द्वितीय पीढ़ी (2G – लिग्नोसेल्युलोसिक बायोमास/कृषि अपशिष्ट से), और तृतीय पीढ़ी (3G – शैवाल जैव ईंधन / algal biofuels) में वर्गीकृत करती है।
- कच्चे माल का विस्तार: इसने एथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमेय कच्चे माल का दायरा बढ़ा दिया है, जिसमें अधिशेष खाद्यान्न (जैसे मक्का और एफसीआई चावल) और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त क्षतिग्रस्त अनाज शामिल हैं।
- उन्नत लक्ष्य: हाल ही में, इस नीति में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया गया, इसके तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) प्राप्त करने के लक्ष्य को वर्ष 2030 के बदले 2025-26 कर दिया है।
- वित्तीय प्रोत्साहन: यह नीति उन्नत 2G बायो-रिफाइनरियों की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, इसके साथ ही व्यावहारिक अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding – VGF) सहित मजबूत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles – FFVs)
- परिभाषा: ये ऐसे वाहन हैं जो एक आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine – ICE) से युक्त होते हैं। इन्हें विशेष रूप से एक से अधिक प्रकार के ईंधन (आमतौर पर पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण) पर चलने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
- हार्डवेयर संशोधन: उच्च-एथेनॉल मिश्रणों के अद्वितीय रासायनिक गुणों (संक्षारण या जंग लगने की प्रवृत्ति) का सामना करने के लिए FFVs में विशेष, जंग-प्रतिरोधी इंजन घटक (जैसे अपग्रेड की गई ईंधन लाइनें, पंप और इंजेक्टर) होते हैं।
- स्मार्ट इंजन प्रबंधन: इनमें एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल (Electronic Control Modules – ECMs) होते हैं जो टैंक में सटीक एथेनॉल-पेट्रोल अनुपात का स्वचालित रूप से पता लगाते हैं और तदनुसार ईंधन इंजेक्शन और इग्निशन टाइमिंग को समायोजित करते हैं।
- परिवर्तन का दूत: भारत E20 सीमा से आगे बढ़ कर E85 (85% एथेनॉल) या E100 जैसे उच्च मिश्रणों को अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए FFVs को अपनाना अनिवार्य शर्त है।
इस कदम का महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा: आयातित कच्चे तेल को घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल से प्रतिस्थापित करने से भारत वैश्विक तेल कीमतों के झटकों से काफी हद तक सुरक्षित हो जाता है और अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
- पर्यावरणीय स्थिरता: शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल कहीं अधिक स्वच्छ ऊर्जा विकल्प है। इससे टेलपाइप उत्सर्जन, ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) और कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
- कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह पहल अधिशेष गन्ना, मक्का और क्षतिग्रस्त अनाजों को जैव ईंधन में परिवर्तित करने का विकल्प प्रदान करता है। इससे किसानों के लिए एक स्थिर, द्वितीयक एवं आकर्षक आय का स्रोत निर्मित होता है।
- अपशिष्ट का उपयोग: 2G एथेनॉल को बढ़ावा देने से कृषि अवशेषों (जैसे धान की पराली) को धन में प्रभावी ढंग उपयोग किया जा सकता है। इससे फसल जलाने से होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या का भी समाधान होता है।
चुनौतियाँ
- मौजूदा वाहनों में संशोधन: देश में बड़े पैमाने पर मौजूदा वाहन बेड़े को संशोधित करना पड़ेगा। इसके साथ ही उच्च एथेनॉल मिश्रणों को बिना किसी गंभीर नुकसान के कुशलतापूर्वक ईंधन उपयोग में सक्षम नए इंजन बनाने हेतु वाहन निर्माताओं को भारी पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) करना पड़ेगा।
- भंडारण और रसद (Logistics): एथेनॉल अत्यधिक जल-शोषक (hygroscopic) होता है, जिसका अर्थ है कि इसे पारंपरिक पेट्रोलियम पाइपलाइनों के माध्यम से प्रेषित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए एक अलग विशेष भंडारण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
- खाद्य बनाम ईंधन की दुविधा (Food vs Fuel): इस पहल को बढ़ावा देने से ईंधन उत्पादन में कृषि योग्य भूमि और जल जैसे संसाधनों को लगाना पड़ेगा। महत्वपूर्ण खाद्य फसलों (जैसे चावल) को ईंधन उत्पादन में लगाने से खाद्य सुरक्षा और भूजल की कमी संबंधी दीर्घकालिक चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
- कराधान में असमानता: विभिन्न राज्यों में असंगठित कर ढांचे और अलग-अलग मूल्य वर्धित कर (VAT) की दरें हैं। यह कर संरचना केंद्रीय उत्पाद शुल्क छूट के प्रभाव को कम कर सकती हैं, जिससे खरीद और मूल्य निर्धारण जटिल हो जाता है।
भविष्य की रणनीति
- 2G जैव ईंधन को प्राथमिकता: सरकार को इस प्रकार की नीतिगत पहल करनी चाहिए जो सब्सिडी को आक्रामक रूप से द्वितीय पीढ़ी (2G) के एथेनॉल संयंत्रों को प्राथमिकता दे। कृषि अपशिष्ट का उपयोग करने से खाद्य-बनाम-ईंधन संघर्ष का समाधान हो सकता है।
- बुनियादी ढांचे में सुधार: इस पहल को सफल बनाने के लिए समर्पित एथेनॉल रेल परिवहन नेटवर्क, विकेंद्रीकृत भंडारण डिपो और खुदरा बिक्री केंद्रों पर विशेष डिस्पेंसिंग पंप बनाने में निवेश की आवश्यकता है।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करना: सरकार को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के निर्माण और प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इसे अपनाने में तेजी लाने के लिए कर छूट, कम जीएसटी स्लैब और उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन लाभों की पेशकश करनी चाहिए।
- सहकारी संघवाद सुनिश्चित करना: सरकार द्वारा नीतिगत स्थिरता के प्रदर्शन से दीर्घकालिक निजी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है। इस उद्देश्य के लिए जीएसटी परिषद के माध्यम से जैव ईंधन के लिए एक एकीकृत, पूर्वानुमेय अखिल भारतीय कर व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत में एथेनॉल के कराधान और सम्मिश्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वर्तमान कर व्यवस्था के तहत, पेट्रोल केंद्रीय उत्पाद शुल्क के अधीन है, जबकि सम्मिश्रण के लिए उपयोग किए जाने वाले एथेनॉल पर वस्तु एवं सेवा कर लगता है।
- पेट्रोल के साथ एथेनॉल के सम्मिश्रण को एक विनिर्माण गतिविधि के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो स्वाभाविक रूप से अंतिम मिश्रण को उत्पाद शुल्क के लिए उत्तरदायी बनाता है जब तक कि विशेष रूप से छूट न दी गई हो।
- भारत सरकार ने अपने 2025-26 के जैव ईंधन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए E30 (30% एथेनॉल) पेट्रोल के तत्काल देशव्यापी व्यावसायिक रोलआउट का आदेश दिया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (a)
- कथन 1 सही है: ईंधन के लिए भारत के दोहरे कर ढांचे में, पेट्रोल/डीजल जैसे पारंपरिक परिवहन ईंधन जीएसटी के दायरे से बाहर हैं (इन पर उत्पाद शुल्क/वैट लगता है), जबकि एथेनॉल पर जीएसटी व्यवस्था के तहत कर लगाया जाता है।
- कथन 2 सही है: सम्मिश्रण को कानूनी रूप से एक विनिर्माण प्रक्रिया माना जाता है। “दोहरे कर” (मिश्रण करने पर पहले से ही कर-युक्त पेट्रोल और एथेनॉल पर फिर से कर लगाने) से बचने के लिए, केंद्र अंतिम मिश्रित उत्पाद के लिए विशिष्ट उत्पाद शुल्क छूट जारी करता है।
- कथन 3 गलत है: सरकार ने स्पष्ट किया है कि E22, E25, E27 और E30 के लिए हालिया कर छूट विशुद्ध रूप से प्रारंभिक तैयारी है। इन उच्च मिश्रणों का रोलआउट केवल व्यापक परीक्षण के बाद होगा; यह कोई तत्काल देशव्यापी आदेश नहीं है।
UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “भारत के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol- EBP) कार्यक्रम की सफलता के लिए कर सामंजस्य (Tax harmonization) और नीतिगत स्थिरता महत्वपूर्ण पूर्वापेक्षाएँ हैं।” उच्च एथेनॉल मिश्रणों पर उत्पाद शुल्क में दी गई छूट के आलोक में, EBP कार्यक्रम के आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व की चर्चा कीजिए। E85 जैसे उच्च मिश्रणों की ओर बढ़ने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? (150 शब्द, 10 अंक)
मुख्य परीक्षा के लिए संक्षिप्त दृष्टिकोण:
- प्रस्तावना: सरकार द्वारा नीतिगत स्थिरता के प्रयास को प्रदर्शित करते हुए, दोहरे कर को रोकने के लिए उच्च एथेनॉल मिश्रणों (E22-E30) पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क को हाल ही में हटाने का संक्षेप में उल्लेख करें।
- आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व:
- आर्थिक: कच्चे तेल के आयात को कम करके भारी विदेशी मुद्रा की बचत; कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय को बढ़ावा (अधिशेष अनाज/गन्ने की खरीद के माध्यम से); डिस्टिलरीज और लॉजिस्टिक्स में निवेश को बढ़ावा देना।
- पर्यावरणीय: बिना मिश्रित पेट्रोल की तुलना में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन, कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन में उल्लेखनीय कमी।
- उच्च मिश्रणों (E20 से E85) की ओर बढ़ने की चुनौतियाँ:
- ऑटोमोटिव परिवर्तन: फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) में बड़े निवेश और उच्च-एथेनॉल सामग्री से होने वाले संक्षारण (जंग) को रोकने के लिए मौजूदा इंजन घटकों को संशोधित करने की आवश्यकता।
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): समर्पित एथेनॉल भंडारण, खुदरा केंद्रों पर अलग डिस्पेंसिंग पंप और मजबूत रसद की आवश्यकता।
- कराधान घर्षण: केंद्र (उत्पाद शुल्क/जीएसटी) और राज्यों (वैट) के बीच एक समान कर संरेखण की कमी उपभोक्ता लाभों को शून्य कर सकती है।
- निष्कर्ष: निष्कर्ष निकालें कि E20 से आगे बढ़ने के लिए एक “समग्र सरकार” (Whole of Government) दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें ओईएम (OEM) निर्माता, चीनी/अनाज मिलें और कराधान में सहकारी संघवाद शामिल हो।
