हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में एक संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को इस अधिनियम के दायरे में शामिल करना है, जिससे इसके गायन का अपमान करना या उसमें बाधा डालना एक दंडनीय अपराध बन जाएगा।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971
वर्तमान में, यह अधिनियम विशिष्ट राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है:
- वर्तमान में संरक्षित प्रतीक: राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत का संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन)।
- वर्तमान दंड: अधिनियम की धारा 2 और धारा 3 के तहत, जानबूझकर अपमान करने या राष्ट्रगान के गायन को रोकने के लिए तीन साल तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
- प्रस्तावित परिवर्तन: इस संशोधन के माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान ही वैधानिक संरक्षण और कानूनी समानता प्रदान करना चाहती है।
वंदे मातरम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- उत्पत्ति: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1880 के दशक की शुरुआत में लिखित। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया गया।
- राष्ट्रीय आंदोलन: यह गीत 1905 के बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक प्रेरणा बन गया।
- राजनीतिक अंगीकरण: 1937 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसके पहले दो पदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया ताकि इसकी देशभक्ति की भावना को बनाए रखते हुए इसे समावेशी बनाया जा सके।
- संवैधानिक स्थिति: 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि “वंदे मातरम को जन गण मन के समान ही सम्मानित किया जाएगा और इसे उसके समान दर्जा प्राप्त होगा।”
हालिया दिशानिर्देश और निर्देश
गृह मंत्रालय (MHA) ने पहले (फरवरी 2026) कुछ परामर्शी दिशानिर्देश जारी किए थे, जिन्हें अब इस कैबिनेट निर्णय से मजबूती मिली है:
- अवधि: आधिकारिक कार्यक्रमों में इस गीत के सभी छह पदों (लगभग तीन मिनट) को बजाया/गाया जाना है।
- वरीयता: जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों बजाए जाते हैं, वहाँ राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान से पहले वरीयता दी जानी चाहिए।
- वैधानिक आधार: पहले ये दिशानिर्देश केवल परामर्शी (advisory) थे। नया संशोधन इन प्रोटोकॉल को वैधानिक (कानूनी) आधार प्रदान करता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रीय गीत
| विशेषता | राष्ट्रगान (जन गण मन) | राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) |
| रचयिता | रवींद्रनाथ टैगोर | बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय |
| अपनाने की तिथि | 24 जनवरी, 1950 | 24 जनवरी, 1950 |
| मूल भाषा | बंगाली (संस्कृतनिष्ठ) | संस्कृत और बंगाली |
| कानूनी स्थिति | 1971 के अधिनियम के तहत संरक्षित | 1971 के अधिनियम के तहत संरक्षित होगा (प्रस्तावित) |
आगे की राह
- राष्ट्रीय एकीकरण: समर्थकों का तर्क है कि वैधानिक संरक्षण राष्ट्रीय पहचान की भावना और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देता है।
- न्यायिक स्पष्टता: इससे पहले, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रगान की तुलना में राष्ट्रीय गीत के लिए विशिष्ट दंडात्मक प्रावधानों की कमी पर ध्यान दिया था। यह संशोधन उस विधायी शून्यता को भरने का प्रयास करता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा (PT) के लिए प्रश्न
Q1. वंदे मातरम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसे मूल रूप से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित किया गया था।
- संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को इसे भारत के ‘राष्ट्रगान’ के रूप में अपनाया था।
- मूल गीत में छह पद (stanzas) हैं।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
A) केवल 1
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 3)
Q2. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह वर्तमान में राष्ट्रीय ध्वज और भारत के संविधान के अपमान के लिए दंड का प्रावधान करता है।
- यह अधिनियम राष्ट्रगान के गायन को रोकने के लिए अधिकतम पाँच वर्ष के कारावास का प्रावधान करता है।
- संसद के पास राष्ट्रीय महत्व के अन्य प्रतीकों को शामिल करने के लिए इस अधिनियम में संशोधन करने की शक्ति है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
A) केवल 1
B) केवल 1 और 3
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 3)
मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए प्रश्न
प्रश्न: “राष्ट्रीय प्रतीक किसी राष्ट्र की पहचान और विरासत के आधार स्तंभ होते हैं। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय गीत को वैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के महत्व का मूल्यांकन कीजिए और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संवैधानिक स्वतंत्रता के साथ संतुलित करने में संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।” (250 शब्द)
