सोने और चांदी पर आयात शुल्क में वृद्धि

सोने और चांदी

भारतीय रुपये को स्थिर करने और चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक बड़े राजकोषीय (वित्तीय) कदम के तहत, केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को दोगुना कर दिया है। कुल कर प्रभाव (tax incidence) 13 मई, 2026 से प्रभावी होकर 9.2% से बढ़कर 18.4% हो गया है।

संशोधित कर संरचना

भारत में कीमती धातुओं पर लगने वाला कर बुनियादी सीमा शुल्क (BCD), कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) का एक संयोजन है।

घटकपिछली दरनई दर (मई 2026)
बुनियादी सीमा शुल्क (BCD)5%10%
कृषि उपकर (AIDC)1%5%
आईजीएसटी (IGST)3%3%
कुल प्रभावी कर~9.2%~18.4%

शुल्क वृद्धि के पीछे का तर्क

सरकार का यह निर्णय बाहरी आर्थिक दबावों और विदेशी मुद्रा के रणनीतिक प्राथमिकताकरण (strategic prioritization) की आवश्यकता से प्रेरित है:

  • चालू खाता घाटा (CAD) प्रबंधन: वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात 71.9 बिलियन डॉलर (24% की वृद्धि) तक पहुंच गया। विदेशी मुद्रा के इतने बड़े पैमाने पर बहिर्वाह (outflow) से देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर भारी दबाव पड़ता है।
  • पश्चिम एशिया संकट: भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में भारी उछाल आया है। एक बड़े तेल आयातक के रूप में, भारत को ईंधन, उर्वरक और रक्षा उपकरण जैसे “आवश्यक आयातों” के भुगतान के लिए अपने अमेरिकी डॉलर (USD) भंडार को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
  • मुद्रा स्थिरता: सोने जैसे “गैर-आवश्यक” आयातों की मांग को कम करने से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्यह्रास (depreciation) को रोकने में मदद मिलती है।
  • संसाधनों का प्राथमिकताकरण: सरकार उपभोग और निवेश-संचालित कीमती धातुओं की तुलना में औद्योगिक कच्चे माल और महत्वपूर्ण तकनीकों के आयात पर अपना विदेशी मुद्रा भंडार केंद्रित कर रही है।

प्रमुख चिंताएं और आलोचनाएं

उद्योग विशेषज्ञों और ‘रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद’ (GJEPC) जैसे निकायों ने इस पर कई चिंताएं (red flags) जताई हैं:

  • तस्करी को बढ़ावा मिलना: ऐतिहासिक रूप से, भारत में उच्च आयात शुल्क के कारण ग्रे-मार्केट (समानांतर बाजार) की गतिविधियों और सोने की तस्करी में तेजी आई है, क्योंकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच कीमतों का अंतर बहुत बढ़ जाता है।
  • MSME के लिए नकदी (तरलता) का संकट: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) आभूषण उद्योग का 80% हिस्सा हैं। उच्च शुल्क के कारण उनकी कार्यशील पूंजी ब्लॉक हो जाएगी और इन छोटे निर्माताओं के लिए गंभीर नकदी संकट पैदा हो जाएगा।
  • पारदर्शिता के मुद्दे: थिंक-टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) ने उल्लेख किया है कि ये अधिसूचनाएं “बहु-परतीय” (layered) और जटिल हैं, जिससे व्यवसायों के लिए वास्तविक लागू शुल्क का निर्धारण करना मुश्किल हो जाता है, जो “व्यापार सुगमता” (Ease of Doing Business) के उद्देश्य के विपरीत है।
  • निर्यात पर प्रभाव: घरेलू स्तर पर सोने की ऊंची कीमतें वैश्विक बाजार में भारतीय आभूषण निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकती हैं।

UPSC के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाएं

  • चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD): किसी देश के वस्तुओं और सेवाओं के कुल आयात मूल्य और उसके कुल निर्यात मूल्य के बीच का नकारात्मक अंतर। कच्चे तेल के बाद सोने को अक्सर भारत के CAD में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता माना जाता है।
  • AIDC (कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर): एक समर्पित कोष जिसका उपयोग देश में कृषि अवसंरचना के सुधार और विकास के लिए वित्तपोषण करने हेतु किया जाता है।
  • लोचहीन मांग (Inelastic Demand): अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि भारत में सोने की मांग सांस्कृतिक रूप से “लोचहीन” है, जिसका अर्थ है कि ऊंची कीमतें भी इसकी खपत को महत्वपूर्ण रूप से कम करने में विफल रहती हैं; बल्कि इसके बजाय मांग वैध माध्यमों से हटकर अनधिकृत (अवैध) चैनलों की ओर स्थानांतरित हो जाती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न. भारत में सोने के आयात पर कराधान (taxation) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) सोने पर कुल प्रभावी आयात कर का एक घटक है।
  2. सोने पर आयात शुल्क बढ़ाना मुख्य रूप से चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली एक रणनीति है।
  3. सोने के आयात पर आईजीएसटी (IGST) की गणना धातु की लागत को छोड़कर, केवल बुनियादी सीमा शुल्क के आधार पर की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2

B) केवल 2 और 3

C) केवल 1 और 3

D) 1, 2 और 3

उत्तर: A) केवल 1 और 2

व्याख्या: कथन 3 गलत है क्योंकि आईजीएसटी (IGST) की गणना कुल निर्धारणीय मूल्य (total assessable value) पर की जाती है, जिसमें धातु की लागत, बीमा, माल ढुलाई (freight) और सभी लागू सीमा शुल्क शामिल होते हैं।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “भारत में सोने की खपत को नियंत्रित करने के लिए एक साधन के रूप में उच्च आयात शुल्क का उपयोग करने को अक्सर एक ‘अस्पष्ट/मूर्खतापूर्ण उपकरण’ (blunt instrument) के रूप में वर्णित किया जाता है जो घटते प्रतिफल (diminishing returns) प्रदान करता है।” भारत के विदेशी मुद्रा प्रबंधन और एक तेजी से बढ़ती समानांतर अर्थव्यवस्था (parallel economy) के जोखिम के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण (Critically analyze) कीजिए। (250 शब्द)

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